शिमला

9-10-11 अप्रैल 2019 🙂

बिहार से राहुल और जीशान भाई आए थे। और प्रतिक भाई ने पहले ही कहा था कि राहुल का जन्मदिन शिमला में मनाया जाएगा।

तो 9 की क्लास करने के बाद रात से ट्रेन थी कालका के लिए, हमसब निकल लिये-

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन चाँद के साथ हमारा इंतज़ार करती हुई।

कालका-शिमला रेलवे

सुबह-सुबह 5 बजे कालका पहुँचे और ठंडी हवाओं ने शिमला के अगले दो दिन का रोमांच हमारे अंदर भर दिया।

चाय 😍

देवी लाल भाई 🙂

कालका से शिमला के लिए 8 बजे से टॉय ट्रेन थी। तो मैंने कालका स्टेशन के हर कोने को खंगाल लिया। एक जगह स्कूल जाते देवी लाल भाई मिले, जो स्कूल से होते हुए घर वापस जा रहे थे और ख़ुश इसलिए थे कि स्कूल का गेट खुला नहीं था यानी कि छुट्टी थी उसदिन।

वाह! क्या ज़िन्दगी है

शिमला चलोगे ?

कालका से शिमला की दूरी 96 किलोमीटर है, लेकिन पहाड़ी रास्ता होने की वज़ह से यह दूरी 5-6 घंटे में पूरी होती है। और इस 5-6 घंटे में आप 5 साल जितना ख़ुशी भरा जीवन जी लेते हैं।

पहाड़ी फूल

मॉल रोड, शिमला

घूमने आने वालों के लिए ये जगह ही शिमला की सबसे मुख्य जगह है।

हालाँकि, मैंने 2012 की दीवाली शिमला में ही मनाया था, फ़िर भी 7 साल में बहुत बदलाव तो नहीं फ़िर भी कुछ नज़र आने वाले बदलाव हो गए हैं।

क्राइस्ट चर्च 😍

अभिषेक भईया, क्या शानदार गाते हैं।

हैप्पी बर्थडे राहुल 🙂

रात का क्राइस्ट चर्च

11 अप्रैल की सुबह, मैं अकेला ही 5 बजे उठ के जाखू मंदिर के लिए निकल पड़ा, जो कि शिमला के सभी पहाड़ों में सबसे ऊंचा है। हालांकि अब रोपवे बन चुका है पर जो मज़ा पहाड़ को पैदल नापने में है वो रोपवे में कहाँ।

इसी जगह पर ‘3 इडियट्स’ फ़िल्म की शूटिंग हुई थी।

जाखू मंदिर _/\_

मेरा नया दोस्त, हालाँकि डरा हुआ था, फ़िर जब इसकी माँ आ गई तो मैं डरा हुआ था 😂

जितना ये प्यारा है इसका घर उससे ज़्यादा प्यारा है।

मैंने इस कहानी में चंदन और वो जीभ वाली लड़की जाखू मंदिर का भी ज़िक्र किया है 🙂

निखिल शर्मा, जाखू मंदिर के पुजारी के बेटे हैं।8th क्लास में पढ़ते हैं। इनके साथ पहाड़ से उतरना और ऐसी-ऐसी गलियों से होते हुए इनके स्कूल तक जाना,काफ़ी मजेदार रहा।

सूरज सा चमके हम स्कूल चले हम

अख़बार और चाय नहीं नहीं नहीं चाय और अख़बार 😂

राहुल, जीशान, प्रतीक, मैं 🙂

कुफ़्री के लिए रवानगी-

इन वादियों में टकरा चुके हैं

हमसे मुसाफ़िर यूँ तो कई 😍

【एक छोटी सी प्रेम कहानी】

भंडारा, भूखे-प्यासे को पहाड़ से उतरते भंडारा मिल जाए, उसके लिए स्वर्ग है 😂

ग्रीन वैली, शिमला

चलो भाई वापस 🙂

अब चंडीगढ़ में मिलेंगे 🙂

राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली

30 मार्च 2019 🙂

30 मार्च 2019 की सुबह,

गली नंबर-9 वज़ीराबाद

रिया चतुर्वेदी, DDA का एग्जाम देने दिल्ली आई है। तो मिलना तय हुआ। विशाल भईया, रिया और हम पहुँचे राजीव चौक। कहाँ बैठे और पंचायती करें। मैंने विशाल भईया को कहा कि बताओ आप, आपको कोई जगह ध्यान हो तो।मना कर दिए तब हम उन दोनों के हाथ पकड़ के Oxford Book Store ले गएँ 😂

सौंफ वाली चाय 😍

🙂

विशाल भईया, मुझे तो बेचैन आत्मा लगे 😂😂😂

रिया चतुर्वेदी-बहुत कम बोलती है और जो कुछ सामने चल रहा है उसपर ध्यान नहीं, पीछे-आगे पता नहीं कहाँ गुम रहती है।

…और बोले तो एकदम बच्ची है 😂

ट्विटर पर रिया को ये किताब देने का वादा किया था तो दे दिया 🙂

उस वक़्त विशाल भईया को क़िताब मेंशन करना भूल गया था तो इनके लिए ख़ास किताब लेकर गया था। मेरी ख़ुद की किताब 😎😂🙈

क्लोजिंग ईयर होने की वज़ह से विशाल भईया 12 बजे तक ही वक़्त दे सके। फ़िर इन्हें ऑफिस चले जाना था। तो वो चले गए।

मैं और रिया राष्ट्रीय संग्रहालय के लिए निकल गए 🙂

पहले खा लेते हैं कुछ 😋

बड़ा आदमी बन जाएगी तो रिया अपने लिए ऐसा खरीदेगी 😂

ये सुप्रिया मैम की तरफ़ से रिया, प्यारी रिया के लिए 🙂

😍😍😍

इतना कुछ था दुनिया में
लड़ने झगड़ने को
पर ऐसा मन मिला
कि जरा-से प्यार में डूबा रहा
और जीवन बीत गया।

~ कुँअर नारायण

ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर हिंदी साहित्य उत्सव-2019

24 मार्च 2019 🙂

जब होली के लिए वृंदावन गया था तभी छोटे भाई【रवि】का ट्वीट लिंक मैसेज में आ गया था इस उत्सव का। तब मैंने सोचा था देख लूँगा, चला जाऊँगा, इतवार है उस दिन।

‘ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर हिंदी साहित्य उत्सव’ का यह चौथा संस्करण था। मेरे लिए पहला 🙂

24 मार्च को सुबह उठा और 11 बजे तक मन बना लिया कि चलते हैं ना। अरुन्धति रॉय से मिलना हो जाएगा 😍

…तो पहुँच गए हम ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर

वहाँ जाते ही पुष्पेश पंत सर मिल गए। जब से अख़बार पढ़ने की लत लगी तब से ही, शायद ही कोई आर्टिकल इनका मेरे से छूटा होगा।

कहानी पाठ-

गौतम राजऋषि, हिमांशु भाजपेयी सुजाता,विजयश्री तनवीर, सुमन परमार

प्रभात रंजन भईया की मनोहर श्याम जोशी जी पर लिखी आत्मीय वृतांत का विमोचन कार्यक्रम

मनोहर श्याम जोशी जी की सहधर्मिणी भगवती जोशी जी

🙏

कविता पाठ-

अनामिका, मृत्युंजय, सविता सिंह, इल्ला कुमार, प्रकृति करगेती

इल्ला कुमार जी

मृत्युंजय जी

सविता सिंह जी

प्रकृति करगेती जी

इल्ला कुमार मैम

😍

‘तीन रोज़ इश्क़’ की लेखिका ‘पूजा उपाध्याय’ मैम 🙂

ऐसे अचानक मुलाक़ात की सोचा नहीं था।

😍

प्रकृति करगेती मैम

😍😍😍

अरुन्धति रॉय

😍

प्रभात रंजन भईया

😍

अनामिका मैम 🙂

शब्द-कागज़ से स्क्रीन तक

अनवर जमाल, मिहिर पंड्या, गौतम राजऋषि से गिरिराज किराड़ू की बातचीत

ये सेशन बढ़िया था 🙂

चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय ✋

😍

मिहिर पंड्या भईया के साथ

दास्तानगोई- फलों के राजा की

हिमांशु बाजपेयी के यह प्रस्तुति, जितनी तारिफ़ की जाए कम है।

ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर हिंदी साहित्य उत्सव का हासिल 🙂

“चलना मनुष्य का धर्म है, जिसने इसे छोड़ा वह मनुष्य होने का अधिकारी नहीं है।” ~ राहुल सांकृत्यायन

अब कहाँ मिलेंगे ? पता नहीं!

🙂

श्री धाम वृंदावन की होली

20-21 मार्च 2019 🙂

प्रतीक भाई ने जनवरी में ही कहा था, इस बार होली पर मथुरा चलेंगे, मैंने कहा था मेरा जोधपुर जाने का रहेगा तो कम ही उम्मीद है।पर होली आ गयी और हमदोनों चले गए मथुरा। रोहित, शनि, गोविंद, नितिन, उत्कर्ष इन सबसे कहा था चलने को।होली के नज़दीक आते-आते सबके घर वाले उन्हें घर बुलाने लगे नहीं तो पक्का चलते वो। और तो और सबके इसबार घर जाना जाना बहुत ज़रूरी हो गया था 😂

ख़ैर, तो प्रतीक भाई और मैं, चल पड़े

वज़ीराबाद 🙂

20 मार्च को मौसम ठीक नहीं लग रहा था,तेज़ हवा के साथ बादल और सूरज की लुक्का-छीपी दिन भर चलती रही।

हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन खुलने के इंतज़ार में, ये प्यासा साथी मिला 🙂

हवाएँ, ले जाएँ जाने कहाँ हवाएँ

दिल्ली से बाहर निकलते ही गेंहू से अटे पड़े खेत गाँव की याद दिलाते।

मथुरा 🙂

मथुरा की चाय और समोसे

प्रतीक भाई

हम सोच के चले थे कि मथुरा में ही रुकेंगे।अगले दिन वृंदावन चलेंगे फ़िर एक ट्रैफिक पुलिस वाले अंकल जी मिले चौराहे पर चालान काटते हुए। हम उनके फ़्री हो जाने का इंतज़ार कर रहे थे पर वो समझ गए कि हम कुछ पूछने के लिए खड़े हैं। चालान काटना छोड़ हमसे पूछा, क्या ? हमने कहा कि कहाँ रुके मथुरा कि वृंदावन ? कहते हैं वृंदावन निकल जाओ, वहाँ रुकने की भी दिक्कत नहीं होगी, ख़ूब धर्मशाला है।

तब हम वृंदावन के लिए निकल लिए जो कि मथुरा से 14 किलोमीटर है बस।

पूर्णमासी की चाँद 😍

रंग जी मंदिर, वृंदावन

पुराना गोविंद मंदिर

वृंदावन की गलियां

आज तक की सबसे शानदार चाय 😍

अंकल जी से मैंने पूछ लिया कैसे बनाया, क्या-क्या डाला। कहते हैं पानी एक बूंद नहीं।ख़ाली दूध की चाय और दूध भी पैकेट वाला नहीं।

गोविंद घेरा, वृंदावन की होलिका दहन-

बहुत सही, डफली ना सही, प्लेट-छोलनी सही

नया बस स्टैंड की होलिका दहन

पुराना गोविंद मंदिर

होली की सुबह 🙂

रंग जी मंदिर

मेरो तो गिरधर गोपाल दुसरो ना कोई

इस मन्दिर में विधवा महिलाएँ होली खेलती हैं

【इस तस्वीर को ध्यान से देखना】

जमुना जी ओर जाते हुए

परिक्रमा मार्ग पर चलते हुए होली का आनंद

बहुत सही बहुत सही

जूली 😍

सुबह वाली होली ख़त्म

कुल्हड़ में डालो भाई कप में दिल्ली पियेंगे

😂

श्री बाँके बिहारी लाल 🙏

दोपहर वाली होली ख़त्म

प्रिया कांत जू मंदिर-

नई दिल्ली

मथुरा के पेड़े

वृन्दावन की होली देखते-खेलते हुए बचपन की गाँव की होली याद हो आयी और यह मलाल जाता रहा।

‘ढप धरि दे यार, गई पर की’

और

गयौ मस्त महीना फागुन कौ, अब जीवै सो खेलै होरी-फाग’

मतलब अपनी ढफली और साज़ रख दो और अगले साल का इंतज़ार करो।फागुन का मस्त महीना तो अब ख़त्म हो गया, अब जो जीएगा, वही अगली होली खेलेगा।

अब कहाँ मिलेंगे ? पता नहीं !

🙂