【28 नवंबर 2020 से 04 दिसंबर 2020 तक】
सौरभ अग्रवाल इंजीनियरिंग का दोस्त और ज़िगरी दोस्तों में से एक। कॉलेज में 4 ही ज़िगरी हुए और चारों चित्तौड़ के ही इसलिए राजस्थान में चित्तौड़ ❤ सौरभ की ही शादी है।
ये रही हम चारों की तस्वीर जब हम 2011 में जयपुर SKIT कॉलेज में 1st ईयर में थे 🙂

अनुराग, हर्षित, सौरभ, मन्टू 🙂
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28 नवंबर 2020 🙂
सुबह-सुबह की घुमक्कड़ी, सिग्नेचर ब्रिज, दिल्ली ❤







पैकिंग कर लिया, रूम सही कर लिया, घर पर सबसे ख़ूब बातें कर लीं, सो भी लिया एक दोस्त (ईशा) के लिए ख़त भी लिख दिया। शाम को 7 बजे से ट्रेन है 🤘





वो चाँद प्यारा-प्यारा ❤

ट्रैन का सफ़र हो, खिड़की वाली सीट और गाने और चाय और ख़ूबसूरत दुनिया… और जीने को क्या चाहिए 🙂

छवि और लक्की, दोनों हद बदमाश

मथुरा से आगे
गुड नाईट 🙂
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29 नवंबर 2020 🙂
चित्तौड़गढ़ 💃




चाय 🤘
ट्रैन टाइम से (5 बजे) पहुँच गई। तीनों को बारी-बारी से कॉल लगाया। सौरभ, अनुराग का तो पता था नहीं उठाने वाले कॉल पर दुःख इस बात का हुआ कि हर्षित ने भी सोना चुना और कॉल नहीं उठाया, मतलब चाय ठीक नहीं बनी होती तो मैं प्लेटफार्म पर नीचे ठंडे फ़र्श पर बैठ के रोने लगना था पर कंट्रोल किया… वैसे भी चित्तौड़ रुकना नहीं था, उन्हें मिलने के लिए बुला रहा था। नीमच जाके महेंद्र भाई के रुकना है। शादी भी नीमच ही होनी है तो सौरभ ये लोग 1 को नीमच पहुंचेंगे 🙂
अब नीमच चलते हैं…





चित्तौड़ में दिल्ली से ज़्यादा ठंड लगी। और जैसे साँस के लिए हवा से ज़्यादा आग की ज़रूरत हो।















नीमच के चाय + समोसे 😋






मनासा 💕

महेंद्र भाई खाना बना के मेरा ही इंतजार कर रहे थे 😍

फ़िर चाय 🙂

आज शाम को इस चूल्हे पर मक्के की रोटी + सरसों की साग ❤

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अब चलते हैं खेतों पर जहाँ पिछले महीने जब आए थे तब लहसुन रोपे थे




महेंद्र भाई और उनके एकदम ख़ास ज़िगरी पीयूष भईया
महेंद्र भाई जब दिल्ली होते हैं तो उनके सारे ज़रूरी काम उनसे भी बढ़िया तरीके से पीयूष भईया अंजाम देते हैं।





अफ़ीम की खेती 🙂 पीयूष भईया की है। रोचक तरीके से अफ़ीम के किस्से सुनाते हैं नेकदिल पीयूष भईया



अब चलते हैं पीयूष भईया के कार्यस्थल (लाइट कंट्रोल ग्रिड) पर


विजय भईया के हाथ की चाय ❤










कॉफ़ी 😍
गुड नाईट 🙂 कल सुबह-सुबह ही गाँधी सागर डैम पहुँच जाना है। उगते सूरज को वहीं से क़ैद करेंगे 💃
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30 नवंबर 2020 🙂
नवंबर का आख़िरी दिन आज। अब दिसंबर का महीना है। मेरा सबसे पसंदीदा महीना, बाल्टी भर चाय बना के पीते रहो कविता लिखते रहो…


अब चलते हैं गाँधी सागर डैम (चंबल नदी)


भोर का चाँद 😍


तरुण भईया, महेंद्र भाई के लंगोटिया यार और ज़िंदादिल इंसान 🙂



















































नीतेश भईया, सहरसा, बिहार से है। कोटा में रहकर वहीं कर रहे हैं 😂









नितेश भाई के साथी लोग, एक असम से एक यूपी से






ख़ूब गाते हुए गएँ ख़ूब गाते हुए आ गएँ 💃💃
अब खाते हैं

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कल सुखानन्द जी और फ़िर दोस्त की शादी में नीमच 💃💃💃
❤ 🙂






























































































































































































































