शादी से पहले: चित्तौड़-कुकड़ेश्वर-गाँधी सागर डैम :)

【28 नवंबर 2020 से 04 दिसंबर 2020 तक】

सौरभ अग्रवाल इंजीनियरिंग का दोस्त और ज़िगरी दोस्तों में से एक। कॉलेज में 4 ही ज़िगरी हुए और चारों चित्तौड़ के ही इसलिए राजस्थान में चित्तौड़ ❤ सौरभ की ही शादी है।

ये रही हम चारों की तस्वीर जब हम 2011 में जयपुर SKIT कॉलेज में 1st ईयर में थे 🙂

अनुराग, हर्षित, सौरभ, मन्टू 🙂

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28 नवंबर 2020 🙂

सुबह-सुबह की घुमक्कड़ी, सिग्नेचर ब्रिज, दिल्ली ❤

पैकिंग कर लिया, रूम सही कर लिया, घर पर सबसे ख़ूब बातें कर लीं, सो भी लिया एक दोस्त (ईशा) के लिए ख़त भी लिख दिया। शाम को 7 बजे से ट्रेन है 🤘

वो चाँद प्यारा-प्यारा ❤

ट्रैन का सफ़र हो, खिड़की वाली सीट और गाने और चाय और ख़ूबसूरत दुनिया… और जीने को क्या चाहिए 🙂

छवि और लक्की, दोनों हद बदमाश

मथुरा से आगे

गुड नाईट 🙂

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29 नवंबर 2020 🙂

चित्तौड़गढ़ 💃

चाय 🤘

ट्रैन टाइम से (5 बजे) पहुँच गई। तीनों को बारी-बारी से कॉल लगाया। सौरभ, अनुराग का तो पता था नहीं उठाने वाले कॉल पर दुःख इस बात का हुआ कि हर्षित ने भी सोना चुना और कॉल नहीं उठाया, मतलब चाय ठीक नहीं बनी होती तो मैं प्लेटफार्म पर नीचे ठंडे फ़र्श पर बैठ के रोने लगना था पर कंट्रोल किया… वैसे भी चित्तौड़ रुकना नहीं था, उन्हें मिलने के लिए बुला रहा था। नीमच जाके महेंद्र भाई के रुकना है। शादी भी नीमच ही होनी है तो सौरभ ये लोग 1 को नीमच पहुंचेंगे 🙂

अब नीमच चलते हैं…

चित्तौड़ में दिल्ली से ज़्यादा ठंड लगी। और जैसे साँस के लिए हवा से ज़्यादा आग की ज़रूरत हो।

नीमच के चाय + समोसे 😋

मनासा 💕

महेंद्र भाई खाना बना के मेरा ही इंतजार कर रहे थे 😍

फ़िर चाय 🙂

आज शाम को इस चूल्हे पर मक्के की रोटी + सरसों की साग ❤

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अब चलते हैं खेतों पर जहाँ पिछले महीने जब आए थे तब लहसुन रोपे थे

महेंद्र भाई और उनके एकदम ख़ास ज़िगरी पीयूष भईया

महेंद्र भाई जब दिल्ली होते हैं तो उनके सारे ज़रूरी काम उनसे भी बढ़िया तरीके से पीयूष भईया अंजाम देते हैं।

अफ़ीम की खेती 🙂 पीयूष भईया की है। रोचक तरीके से अफ़ीम के किस्से सुनाते हैं नेकदिल पीयूष भईया

अब चलते हैं पीयूष भईया के कार्यस्थल (लाइट कंट्रोल ग्रिड) पर

विजय भईया के हाथ की चाय ❤

कॉफ़ी 😍

गुड नाईट 🙂 कल सुबह-सुबह ही गाँधी सागर डैम पहुँच जाना है। उगते सूरज को वहीं से क़ैद करेंगे 💃

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30 नवंबर 2020 🙂

नवंबर का आख़िरी दिन आज। अब दिसंबर का महीना है। मेरा सबसे पसंदीदा महीना, बाल्टी भर चाय बना के पीते रहो कविता लिखते रहो…

अब चलते हैं गाँधी सागर डैम (चंबल नदी)

भोर का चाँद 😍

तरुण भईया, महेंद्र भाई के लंगोटिया यार और ज़िंदादिल इंसान 🙂

नीतेश भईया, सहरसा, बिहार से है। कोटा में रहकर वहीं कर रहे हैं 😂

नितेश भाई के साथी लोग, एक असम से एक यूपी से

ख़ूब गाते हुए गएँ ख़ूब गाते हुए आ गएँ 💃💃

अब खाते हैं

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कल सुखानन्द जी और फ़िर दोस्त की शादी में नीमच 💃💃💃

❤ 🙂

IGNOU के बहाने :)

27 नवंबर 2020 🙂

IGNOU से हिंदी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा हूँ। इस साल आख़िरी है। करोना का नाटक नहीं होता तो अब तक 2nd ईयर का असाइनमेंट भी जमा हो चुका होता और एग्जाम का डेट भी अनाउंस हो चुका होता जो कि दिसंबर में होता। पर अब तक सात सब्जेक्ट में से 3 का ही स्टडी मटेरियल मिला है जो कि फ़रवरी में मिला था। बाकी का मटेरियल वो पोस्ट कर चुके हैं जो कि नज़दीक के पोस्ट ऑफिस (बुराड़ी) में धूल फांक रहा है। इतना ही पता करने के लिए मुझे IGNOU जाना पड़ा। इत्ती बात ये लोग फ़ोन उठा के भी कह सकते थे पर नहीं फ़ोन करो तो घोड़ा बेच के सो रहे होते हैं। इसलिए जाना पड़ा। ट्रैक आईडी लेकर आया हूँ। मटेरियल बुराड़ी से वापस लौट ना जाए बस अब। एग्जाम दिसंबर में ही होंगे उसके पहले सातों सब्जेक्ट के असाइनमेंट जमा करने होंगे उसके पहले स्टडी मटेरियल लाना होगा, उससे पहले ये ब्लॉग लिखना होगा 😂

कल ही जाना था मगर खा के ज़रा देर के लिए सोया तो शाम को उठा। तो आज जाना ही था।

सुबह आज सिग्नेचर ब्रिज चलते हैं 🤘

कल से ही सिग्नेचर ब्रिज जाना शुरू किया है जो कि रूम से 3.5km पड़ता है और अब रोज़ ही जायेंगे, रवि भाई जाए चाहे

लौटते वक़्त सोनी(छोटी बहन) के ट्वीट से पता चला कि आज तो रवि(छोटा भाई) का जन्मदिन है, जो कि भूल गया था।

आज ही रिजल्ट आया कि रवि का DU के Atma Ram Sanatan Dharam College में हिंदी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन हो गया। अच्छी बात है, लड़का दिल्ली आ रहा है अब…

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चलो अब चला जाये IGNOU

अमृता प्रीतम-इमरोज़ ❤

दिल्ली गेट 🙂

IGNOU का जो काम करना था कर लिया अब चलो पैदल चलते हैं मेट्रो पकड़ने राजीव चौक के लिए 🙂

राजघाट 🙏

फ़िर रास्ते में मैंने ये पढ़ा तो सोचा गाँधी जी से रिलेटेड कोई तो अच्छी किताब मिल जाएगी चल के देखने में क्या दिक्कत.. लेंगे नहीं तो कम से किताबों के नाम तो पढ़ेंगे कि किसने लिखा क्यों लिखा, और दोहराएंगे कि कितना कुछ पढ़ना है और जीवन इत्ता कम ही काहे दिए भगवान जी…

छोटू ❤

कालेलकर जी की दो किताब लेली।

लौटने लगा तो कैंपस की दूसरी साइड ये पत्थर की मूर्ति दिखी तो देखने चला आया, छोटू के साथ कि चल के पढ़ता हूँ कालेलकर जी के बारे में…

यहीं पास में धूप में कुर्सी लगा कुसुम शाह जी बैठी मिलीं और आदतन मेरे सवाल शुरू कि इनका कोई म्यूजियम भी है क्या, कुत्तों के नाम क्या है ? इनके बच्चे नहीं हैं क्या ? आपका नाम क्या है ? कहाँ से है आप ?

तब कुसुम अम्मा कहती हैं चलो तुमको दिखाती हूँ कालेलकर जी की स्मृतियाँ। तब हम छोटू, किसमिस, पिस्ता के साथ उस कमरे में गएँ जहाँ कालेलकर जी अपने आख़िरी के 25 साल बिताएँ और उस दरम्यान मेरे चेहरे पर जो ख़ुशी देखने लायक थी, बस नाचना ही बाकी रह गया था, पर जल्दी ही ध्यान आया कि उस कमरे में बहुत कुछ है जिसके बारे में जानना है, फ़ोटो क्लिक करना है,

अम्मा से रज़ामन्दी लेनी है कि ब्लॉग लिख सकता हूँ कि नहीं जहां पर आपकी भी और इस कमरे की भी तस्वीर शेयर करूँगा। अम्मा ने ‘हाँ’ कहा और विस्तार से सबकुछ बताया कि कालेलकर जी कहाँ जन्मे, देश के लिए क्या-क्या किया, देश ने उनके मरणोपरांत उनके लिए क्या क्या किया, सबकुछ। अम्मा 80 साल की हो चुकी हैं। सारा जीवन अविवाहित रहीं। 16 साल तक कालेलकर जी के साथ काम कीं। महाराष्ट्र की हैं और अब यहाँ दिल्ली में इन स्मृतियों को सहेजने का जिम्मा उठाई हैं।

जापानी गुरु फ़िजी की ओर से भेंट में मिली उनको घड़ी। 2:45 दोपहर को ही कालेलकर जी ने आख़िरी साँस ली थीं।

जेल में रहते हुए का उनका सामान, कैदी नंबर भी है।

पद्यविभूषण, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हाथों मिला उन्हें

गाँधी जी के सबसे प्रिय शिष्यों में से एक थे कालेलकर जी

जन्मशताब्दी पर इंदिरा गाँधी ने डाक टिकट जारी किया था।

दो बार वे राज्यसभा के लिए भी चुने गएँ। सर्व धर्म समभाव के पुरज़ोर समर्थक थे जो कि उनके कमरे में लगीं सभी धर्म गुरुओं की तस्वीर देखकर कोई भी समझ सकता है। उनके लेखन का विशाल संग्रह भी गौर करने लायक है। जिसकी 10वीं ग्रंथावली- डायरी लेकर आया हूँ। कालेलकर जी को उनके एक निबंध संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला।

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तीन प्यारे दोस्त बने मेरे।

एक तो छोटू, दूसरा किसमिस, तीसरा पिस्ता, दो और थे काजू और बादाम, अब नहीं रहें।

अम्मा से ढ़ेर सारी बातें हुईं फ़िर। मेरे बारे में जाना उन्होंने और नंबर लिया मेरा और कहीं कि आते रहना। अगली बार शुक्रवार को ही आना। राजघाट पर इनकी तरफ़ से विशेष प्रार्थना सभा होती हैं।

मैंने उनसे फ़िर से मिलने का वादा करके, नमस्ते किया और मुस्कुराते हुए मेट्रो स्टेशन की तरफ़ बढ़ा। अब राजीव चौक जाना है।

2 दिसंबर को सौरभ की शादी है। उसमें चमकने के लिए कपड़े लेने थे 🙈

मगर मगर मगर कपड़े के नाम पर एक स्वेटर उठा लाया बस। और बहुत कुछ नहीं लाना था वो ले आयें, बहुत कुछ नहीं करना था वो कर आयें 🙊

आज का हासिल 🙂

अब लौटो भाई.. कल चित्तौड़ के लिए निकलना है 🤘

अब चित्तौड़-नीमच मिलेंगे 🙂

बाकी दुआ करना मेरे लिए आप सब और करोना मुई को जी भर के कोसना, है ना ? हाँ

❤ 🙂

छठ पूजा, खतौली और मेरठ :)

19-20-21 नवंबर 2020 🙂

19 नवंबर 2020 की सुबह

खतौली, जो कि मुज़फ्फरनगर जिले में आता है मगर मेरठ से थोड़ा सा ही आगे है। मेरठ और मुज़फ्फरनगर के सीमा पर स्थित है खतौली। छोटा सा शहर जो चीनी मील के लिए जाना जाता है। मेरठ के बाद हर छोटा शहर सकौती, दौराला, खतौली, मंसूरपुर इन सब जगह चीनी मील है। शुरुआत में इन जगहों पर चीनी मील जब बना होगा तो बमुश्किल कुछ ही लोग यहाँ रहते होंगे। धीरे-धीरे लोग आते गएँ और अब ये शहर में तब्दील होते जा रहे हैं।

खतौली, मेरी मौसीजी (रूबी) रहती हैं जो जस्ट माँ से छोटी है। और मेरे लिए माँ के ही बराबर। बल्कि माँ से भी ज़्यादा माँ!

दीवाली में रवि भाई नहीं आए होते तो मैं खतौली दीवाली में ही पहुँच गया होता और छठ पूजा के बाद आता। मगर रवि भाई आ गये तो दीवाली दिल्ली में साल। मगर छठ में मेरे से दिल्ली रुका न जाता। इसलिए ऐसा मानिए कि दिल्ली से दौड़ते हुए भागा मैं खतौली की तरफ़। मौसी और मैंने रवि भाई को भी बोलें कि तुम भी चलो पर इनका मन नहीं हुआ।

जब आनन्द विहार बस लेने के लिए जा रहा था तब लो फ्लोर में चढ़ के लगा स्वर्ग में आ गए। मतलब जितनी सीट उतने लोग। 😍

मोदीनगर

रैपिड मेट्रो बनना है उससे पहले सड़क के जितने भी काम है।चौड़ीकरण या ओवरब्रिज बनाने का, सब तेजी से चल रहा है दिल्ली मेरठ रोड पर।

😂😂😂😂😂

मेरठ

18:40 तक खतौली पहुँच चुका था। खरना के पूजा का मुहूर्त 19:22 बजे तक था। सही जगह सही समय पर रहना मेरी फ़ितरत है 😎

रूबी मौसी

गोलू(तुषार), मौसा जी, पवन, शैफाली, शिवानी, मन्टू, मौसी जी

गोलू ब्रो, पता ? बहुत टैलेंटेड है ये, मुज़फ्फरनगर के नवोदय विद्यालय में पढ़ता है। इंजीनियर तो ये बाय बर्थ है। चेस में मुझे हरा देता है।

मैं गाँव भी होता हूँ या मोतिहारी तो रात को 1-2 बजे उठ के अगले दिन मेन पूजा के लिए प्रसाद(ठेकुआ, पुलकिया, मिठाई) बनाने में माँ, मौसी, नानी की मदद करता ही था। खतौली भी एक दिन पहले आने का मेन कारण यहीं था कि रात को मौसी की मदद करेंगे।

खरना के पूजा बाद तय हुआ कि नींद तो आने से रही 11:30 से ही प्रसाद बनना है। मौसी सो गयीं। हमलोग जगे रहे पर 11 बजते-बजते मैं लुढ़कने लगा। तो 1 घण्टे के लिए सो गया। 12 बजे उठा तो मौसी जी तैयारी में लगी थीं।

फ़िर शिवानी भी उठ गई। तब हम तीन मील के पहले तो गुड़ वाला ठेकुआ बनाए साथ में रुनझुन (JBL स्पीकर) ने शारदा सिन्हा और अनुराधा पौडवाल के गाए छठ गीत को सुनाना शुरू कर दिया। बाद में पवन भी उठा। फ़िर मौसा जी। शैफाली और गोलू घोड़ा हाथी केंचुआ बेच के सोते रहें।

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20 नवंबर 2020 🙂

चलो, खरीददारी करने 🤘

अब चलते हैं, छठ घाट सजाने

अब घर चलो.. शाम के अरघ देने की तैयारी करो

तभी घर से ख़बर आई कि जगत मौसा जी की तबियत ख़राब हो गई है, कम ही चांस है। पिछ्ली रात को ही वीडियो कॉल पर उन्हें देखा था तब दर्द से कराह रहे थे। तय था एक न दिन कैंसर से जंग हार जायेंगे वो पर सांझ घाट के दिन ही वो दिन होगा किसी ने नहीं सोचा था। बाद में ख़बर आई कि नहीं रहे। मौसी जी ख़ूब रोई, वो तो अगले 3 दिन रोती रहीं हमसब उन्हें चुप कराते रहें और अलग-अलग अकेले में सब रोते रहें। शिवानी छत पर जाके रोई, शैफाली अपने कमरे में, पवन गोलू मौसा जी का नहीं पता, मैं नहाते टाइम बाथरुम में रोया। मौसा जी के लिए नहीं, कैंसर को कोसते हुए कि इससे छुटकारा कब और कैसे खोज निकालेगा मनुष्य जाति…..

अरघ देने का फाइनल नहीं था अब, मगर घर से कहा गया कि पूजा होगी, घाट पर जाना है सबको।

पिछले साल भी मैं दीवाली+छठ पर खतौली ही था। तब भी मौसा जी के दूर का कोई पट्टीदार मर गया था तो हमलोग घाट पर नहीं गए थे न पूजा हुई थी। पर इसबार किया जा सकता था।

वंशिका 😍

सुरु देव डूब गएँ, सांझ का अरघ सम्पन्न 🙂

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21 नवंबर 2020 🙂

सबेरे का अरघ

पूरे छठ पूजा में सबसे अच्छा हमको यहीं लगता है। 1-2 बजे रात को उठना और काँपते हुए घाट पर जाना। इसमें सबसे इम्पोर्टेन्ट बात रात में ही नहाना होता है। मुझे ठंडे पानी से नहाना पसन्द तो अपने कोई दिक्कत नहीं तो अपन सब भाई बहन को ज़बरदस्ती नहवाते हैं 😂😂😂

हाँ ये कर लो, ये ज़रूरी है तुम्हारे लिए

पवन ब्रो, पता ? ये बन्दा नेगेटिव में टैलेंटेड है 😂😂😂

शिवानी ❤

पता ? मौसी बुआ मामा ख़ुद की सब मिला के मेरी 19 बहनें हैं जिनमें मेरी सबसे अच्छी बहन शिवानी ही है। मेरे बारे में जितना मैं नहीं जानता उससे कहीं ज़्यादा ये जानती है। मेरी ख़ुद की चारों बहनों को शिकायत रहती कि मैं उनके बजाय शिवानी के क्लोज क्यों हूँ 😂

शैफाली, ये लड़की बिग बॉस देखती है। इसलिए मेको 3 ग्राम कम पसंद 😂

दोनों भाई गोलू तो 1.78km लम्बा है।

वो निकले सुरुज देव ट्रेन की खिड़कियों से

आशीर्वाद लीजिए 🙏

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ये कप शिवानी के दोस्त ने उसे दी थी,मैं मार के दिल्ली ले आया 💃

घर आकर खाना खाकर चलो अब मेरठ 🙂

राधा मैम से मिलना हुआ।

मेरठ के किसी थिएटर का हाल

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दिल्ली ❤

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ख़त्म 🙂

स्वानंद किरकिरे लिखते हैं-

मन तो गधा है, थेथर है, इसे क्या समझा के मरो

खेत बाप का, घास चचे की, जब जहाँ करे दिल, चरो।”

अब कहाँ मिलेंगे ? नीमच 🤘

चित्तौड़गढ़ वाले दोस्त(सौरभ) की शादी है 2 दिसंबर को नीमच में 🙂

❤ 🙂

दीवाली और इतवार की घुमक्कड़ी :)

14-15 नवंबर 2020 🙂

14 नवंबर 2020….

पहले तो रवि भाई से मिलिए.. चंदौली से हैं और कोचिंग में सबसे पहले मित्र बने और आजीवन बने रहेंगे। पता? अच्छा दोस्त भाई नहीं होता, एक अच्छा दोस्त भाई से बढ़कर होता है।

रवि मन्टू पंकज

हम तीनों ही साथ रहने वाले हैं। पंकज भाई दीवाली के बाद आने वाले हैं और लग रहा इनसे 2021 में ही मुलाक़ात होगी। रवि ब्रो भी दीवाली बाद ही आते पर मेरी गुज़ारिश टाल नहीं पाए और घरवालों को कैसे भी मना के इस साल की दीवाली मनाने को मेरा साथ चुना।

दीवाली की सुबह

ये तस्वीर जब उत्कर्ष को भेजे तो कहता है “गृहस्थी बसाओ” 😐

तल्लीनता देख रहे हो 😎

अब चाय बना के पी लेते हैं

टाइम हो गया पूजा कर लेते हैं

रात को 2-3 बजे तक केवल बड़ा वाला दिया साथ निभा रहा था।

चलो दीवाली ख़त्म 🙂

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15 नवंबर 2020 🙂

आज इतवार तो कहीं न कहीं घूमने जाना था। मगर दीवाली के पटाखों ने आसमान पर फरमान ज़ारी किया हुआ था कि निकले बाहर तो समझ जाओ.. मगर वहीं है ना, सुनता है मेरा ख़ुदा

झमाझम बारिश, दीवाली के अगले ही दिन.. सारे धुएँ रोते हुए जमींदोज हो गए और मन्टू निकला चाय पीकर घुम्मकड़ी पर, रवि भाई को भी टांगते हुए ले गएँ

पहले गए बायोडायवर्सिटी पार्क जहाँ मैं ख़ूब बैडमिंटन खेला, जब शुरू शुरू में दिल्ली आया था और कोचिंग शुरू होने में महीना भर का वक़्त था तब..

फ़िर वहाँ से गएँ ललित भईया से मिलने उनके कपड़े की दुकान पर। ललित भईया, पहले पहल के मकान मालिक, जो बड़े भईया के माफ़िक़ हैं।

मास्क पहन ही रखा था प्लस कैप भी तो दुकान में घुसते ही मैंने कहा भईया हाफ पैंट दिखाइए। भईया मेरी आँखों को देखते रहे कहते हैं “आवाज जानी पहचानी लग रही है” तब मैंने मास्क हटा के नमस्ते किया हाथ मिलाया और पंचायती शुरू हमारी

ललित भईया का फ्लैट छोड़ने के बाद मैं इनसे लगभग हर संडे मिलता ही था। अब थोड़ा दूर आ गया हूँ तो कभी कभार.. पर भूले नहीं है मुझे..

फ़िर यहाँ से हम गएँ उस जगह जो मेरा स्वर्ग था

ये स्वर्ग

यहाँ भी मैंने 5th फ्लोर पर ही फ्लैट लिया था वहीं छत की वज़ह से.. यहाँ गया भी अभी इसमें फैमली रहती है 3 महीने से, जबकि पहले 2-3 बार गया तो खाली पड़ा मिलता क्योंकि हर किसी को छत नहीं चाहिए कि 67 सीढ़ी चढ़ के.. समझ रहे हैं ना ?

साक्षी-सक्षम से न मिल पाया, ये लोग गाँव(नालंदा, बिहार) शिफ्ट हो चुके हैं। इनकी माँ सब्जी की दुकान चलाती थी, बिहार से जुड़ाव की वज़ह से दीदी मुझे ताज़ी सब्जी देती थीं हर बारी। नालंदा जाना हुआ तो पक्का मिलूँगा।

शाद सऊद भी अब तक जम्मूकश्मीर से नहीं लौटे, बात हुई शाइस्ता मैम से.. आने वाले हैं ये लोग 🙂

फ़िर यहाँ से हमलोग मंदिर गए जहाँ मैं रोज़ शाम को जाता था

फ़िर यहाँ से उस ठेले के गए जहाँ जलेबी लगभग रोज़ मगर टिक्की और बर्गर कभी कभी खाते थे। जलेबी नसीब में न सही टिक्की ठूँस लिये…

चलिए ख़त्म 🙂

2018 वाली दीवाली में जयपुर था, 2019 में मेरठ और इस साल दिल्ली के हिस्से आया मैं। दिल्ली के लिए 2020 में कुछ तो याद रखने लायक हुआ ही अब। 😎

ऐसा नहीं था कि घर से दूर था तो उदास और फलाना ढिमकाना.. अपुन हर हाल में ख़ुशियाँ ही चुनते हैं.. ये देखकर और ख़ुश होता हूँ कि अब ख़ुशियाँ मुझे भी चुनने लगी हैं। तो बताइए क्या चाहिए मुझे अब, कुछ नहीं हाँ माँ चाहती हैं कि उनका बड़ा बेटा किसी जिले की कमान संभाले.. तो माँ के चाहे मुराद के लिए मैं हूँ मेरा आगे का सफ़र है… 【मन्टू बातों की जादूगरी कम ज़रा, ok】

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भवानीप्रसाद मिश्र की 1968 में लिखी एक कविता है मोह से अधिक। पढ़िए-

मोह से अधिक ताकतवर

कुछ नहीं होता

हमारे मोह ने हमको

संसार के और समय के

केंद्र में समझा था

चेहरे हमें अपने लगते थे

सूरजमुखी से ज़्यादा सुनहले

और खिले हुए

सूरज हमारे इशारे पर

निकलता-डूबता है शायद

पहाड़ियाँ जो तरल नहीं हैं

सो इसलिए कि हम उन पर

चढ़ सकें घूमें फिरें नाम आंकें

चाहें तो तराशे तस्वीरें

उन पर

अपने मन की।

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अब कहाँ मिलेंगे ? कहीं तो मिलेंगे, देखते जाइये 🙂

❤ 🙂