चम्पारण गाँधी चम्पारण :)



एडवेंचर कुछ नहीं, सिर्फ़ बुरी तैयारी का नतीजा है ~ रोआल्ड एमंडसन 【जिन्होंने दक्ष‍िणी ध्रुव की खोज की】

 

24-25 सितंबर 2020 🙂


नवम्बर 2018 में लिखा था मैंने: “जब दुविधा में हो तो घूमो- एक कमरे से दूसरे कमरे, एक घर से दूसरे घर, एक गली से दूसरी गली, एक गाँव से दूसरे गाँव, एक शहर से दूसरे शहर, एक राज्य से दूसरे राज्य, एक देश से दूसरे देश, एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव, एक ग्रह से दूसरे ग्रह, एक आकाशगंगा से दूसरी आकाशगंगा, बस घूमो… ‘ब्लैक होल’ के पास नहीं जाना है, उसके बाजू से होके निकलना है”

 

दुविधा में था कि नहीं पता नहीं पर घूमना था, तो शायद किसी दुविधा में होऊँगा। 23 सितंबर को मोतिहारी आ गया अगले दो दिन शहर में बिताने के लिए पर अगले ही दिन माँ से गाँव बात हुई तो माँ कहती हैं कि पापा को बाइक की ज़रूरत है तो मुझे गाँव लौट जाना था 24 सितंबर को ही. पर पापा का काम टल गया और हथिया नक्षत्र की वज़ह तथा ख़राब सड़क की वज़ह से माँ ने गाँव लौटने को मना कर दिया। तब मैंने सोचा गाँव का रास्ता ख़राब है तो क्या हुआ चकिया का रास्ता तो ठीक ही है. मौसी कब से कह रही हैं कि आजा घर जो नया बना है उसे देख जा. बहाना भी था मौसम भी, मैं तो था ही और मेरा Wanderlust{A strong desire to travel.} उफान मार ही रहा था. साथ में अंजली {सोनी: छोटी बहन} को भी मौसी बुला रहीं थीं तो बेमन से ही उसे भी साथ लेना पड़ा. कोई नहीं, उसका साथ में चलना ज़रूरी था….

चलते हैं अब-

24 सितंबर 2020 🙂



अदरक की पहली चाय, बारिश की बूँदें, ओम थानवी जी की किताब से दिन की शुरुआत 🙂







मौसम 😍



गाँधी स्मारक, चन्द्रहिया 🙂



14 महीने पहले जब आया था तब भी इसका काम चालू था अब भी चालू ही है और अभी पता नहीं कब तक चलता रहेगा 😦






श्री कृष्णा जी की ड्यूटी है यहाँ पर स्थानीय लोग बताते हैं कि कृष्णा जी ज़्यादातर वक़्त ताला लगाकर ग़ायब ही रहते हैं, घूमने वाले ऐसे ही बाहर से देख के फ़ोटो और मलाल साथ में लेके जाते हैं!










पिपरा कोठी



अगले ही दिन दीनदयाल जी का जन्मदिन है। मेरे पसंदीदा राजनीतिक व्यक्तित्व में से एक 🙂





 



चकिया जब मौसी के हम पहुँच गए तब अंजली कहती है- “भईया, केसरिया बौद्ध स्तूप चलते हैं ना, बचपन में ही गई थी एक बार” चकिया से केसरिया 25km है, मेरा भी मन हो गया हालाँकि मैं 2 साल पहले ही घूम आया था और जैसी वहाँ की स्थिति है उस हिसाब से दुबारा घूमने लायक जगह नहीं है। पर अंजली ने जैसे कहा तो मना नहीं कर पाया।

साथ में पवन(मौसी का लड़का), राजा(पवन का कजिन), गोलू मामा जी(दूर के मामा जी) हो लिये। एक बाइक पर मैं और अंजली, दूसरे पर वो तीनों और ख़राब सड़क 😭



“केसरिया एक महत्‍वपूर्ण बौद्ध स्‍थल है। यह चंपारण में स्थित एक छोटा सा शहर है जो गंडक नदी के किनारे बसा हुआ है। इसका इतिहास काफी पुराना व समृद्ध है। बौद्ध तीर्थस्‍थलों में इसका महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। बुद्ध ने वैशाली से कुशीनगर जाते हुए एक रात केसरिया में बिताई थी तथा लिच्‍छवियों को अपना भिक्षा-पात्र प्रदान किया था। कहा जाता है कि जब भगवान बुद्ध यहां से जाने लगे तो लिच्‍छवियों ने उन्‍हें रोकने का काफी प्रयास किया। लेकिन जब लिच्‍छवि नहीं माने तो भगवान बुद्ध ने उन्‍हें रोकने के लिए नदी में कृत्रिम बाढ़ उत्‍पन्‍न की। इसके पश्‍चात् ही भगवान बुद्ध यहां से जा पाने में सफल हो सके थे। सम्राट अशोक ने यहां एक स्‍तूप का निर्माण करवाया था। इसे विश्‍व का सबसे बड़ा स्‍तूप माना जाता है।”



 

















गूगल करने पर ये मिलता है-

पूर्वी चम्पारण जिला की भौगोलिक, ऐतिहासिक एवं पुरानत्विक विरासत युगों से रही है। परन्तु 1998 में पुरातत्व अन्वेषण विभाग द्वारा केसरिया में उत्खनन के बाद दुनिया का सबसे ऊँचा बौद्ध स्तूप मिलने के बाद बिहार ने अपने अतीत का गौरव फिर से प्राप्त कर लिया।
केसरिया बौद्ध स्तूप की ऊँचाई आज भी 104 फीट है जबकि इंडोनेसिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बोरोबदुर (जावा) बौ़द्ध स्तूप की ऊँचाई 103 फीट है। ये दोनों स्तूप छह तल्ले वाला है जिसके प्रत्येक दिवाक खण्ड में बुौद्ध की मूर्तिया स्थापित है। स्तूप में लगी ईटे मौर्य कालिन है। सभी मूर्तियां विभिन्न मुद्राओं में है। 1861-62 में इस स्तूप के सम्बन्ध में जनील कर्निंधम ने लिखा हैं कि केसरिया का यक स्तूप 200 ई0 से 700 ई0 के मध्य कभी बना होगा। चीनी यात्री फाहियान के अनुसार केसेरिया के देउरा स्थल पर भगवान बुद्ध अपने महापरिनिर्वाण के ठीक पहले वैशाली से कुशीनगर जाने वक्त एक रात का विश्राम किया था तथा साथ आये वैशाली के भिझुकों को अपना भिक्षा पात्र प्रदान कर कुशीनगर के लिए प्रस्थान किया। आज केसरिया बौद्ध स्पूत देखने विदेशों से हजारो हजार पर्यटक एवं बौद्ध भिक्षुक रोज आते है।

हज़ारों… ऐ अम्मा, ई जादा हो गया। एक दिन में मुश्किल से 10-12 जने आते होंगे। बाहर गिनती के दुकान वाले बताते हैं। दुकान वाले ही कहते हैं कि कुछ साल पहले ही इसकी चारदीवारी का निर्माण हुआ है नहीं तो जनता स्तूप तक कब्ज़ा कर चुकी होती।



स्तूप के पेड़ ऐसे विलुप्त हो रहे हैं 😦






























🙈





चलो वापस चकिया, बारिश में भीगते हुए 💃💃💃



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 25 सितंबर 2020 🙂

सुबह उठकर, साईकल की कंडीशन ठीक होने की वज़ह से मोतिहारी से 12km पर पड़ने वाली नदी से मिल आया, जहाँ 2 साल पहले रोज़ जाता है था 🙂





 







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अब गाँधी स्मारक बड़हरवा लखनसेन जाने की तैयारी- साथ में आज पवन(कजिन) चलने वाला था। अंजली और स्नेहा को कैसे भी करके मना किया गया 🙏





 











 







 





ये कुँआँ गाँधी जी के समय का है, हालात देखिए!



ये बरगद का पेड़ भी ऐतिहासिक है। इसी के नीचे गाँधी जी लोगों को पढ़ाते या सम्बोधित करते थें।



उनके द्वारा उपयोग में लाई गई तालाब











 











🙏🙏🙏






















अनिल कुमार जी, संयोग देखिए, हमारे पुलिस थाने के क्षेत्र के ही गाँव के हैं, विज्ञान पढ़ाते हैं और टीचर की कमी का रोना रोते हैं, साथ में यह भी कहते हैं कि शिक्षा को लेकर वर्तमान सरकार का रवैया एकदम उदासीन करने वाला है। अनिल जी चाय बनवाकर लाने की बात कहते हैं, मैं मन कर देता हूँ कि अगली बारे आगे से कहूँगा कि चाय माँगवाइये 😂



सोनालाल राउत जी, ये न होते तो इस जगह के बारे में मुझे कुछ पता नहीं चल पाता। ये यहां प्यून के पोस्ट पर हैं। अपने घर की तीसरी पीढ़ी। इनके दादा जी गाँधी के समय प्यून थे।



इनके दादा जी का उस वक़्त का बैच



सरकार इस स्कूल को +2 बनाने की घोषणा कर चुकी है। निर्माणाधीन भवन की रफ़्तार शून्य ही समझिए।
अब चला जाए यहाँ से 🙂









हम्ममम्म….. कैसे तू इतना ज़रूरी हो गया 🙈





नीरज मुसाफ़िर की किताब केवल फ़ोटो में शामिल करने वास्ते लेकर नहीं चला था, चाय पीते हुए 2 पेज पढ़े हैं, उनसे ये हासिल हुआ कि कैसे लद्दाख जाने के लिए श्रीनगर एयरपोर्ट से आप हाथ पाँव मार के एक कीमती दिन की बचत कर सकते हैं।

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सोनालाल राउत और अनिल कुमार जी ने ही कहा कि मधुबनी आश्रम चले जाइए, रास्ते में ही है, जबकि आश्रम का सोच के नहीं चला था। यहाँ तक कि मैं इस आश्रम को मोतिहारी के ही दूसरे ब्लॉक मधुबन समझता था, जो कि मोतिहारी से अलग दिशा में है।
पर आज भ्रम दूर हुआ और पहुँच गए मधुबनी आश्रम 💃

ये कभी सूत काटने का मुख्य केंद्र होता था। आज खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, अभी भी बहुत कुछ का खंडहर होना बाकी है।











ये करना हर सरकार का अधिकार है। 2018 में कुछ पोर्शन को चमका के अपना नाम लिखवा देना है, अभी 2021 में नई सरकार भी आके ऐसा कुछ करेगी, देखना..























ये विनोबा भावे भवन है, ऐसे ही राजेन्द्र प्रसाद भवन भी है। जब ये लोग यहाँ आए थे तो इन्हीं भवनों में ठहरे थे। अब यहाँ कोबरा ठहरते हैं। मुझे ख़ास हिदायत देकर इधर जाने दिया गया कि तेज़ भाग सको तभी जाना।


























कार्यालय का हाल देखिये-













मौजेलाल सिंह जी, यहाँ के केअर टेकर, जिन्हें 500₹ का महीना मिलता है। इनकी मदद(ताला लगाने और खोलने के लिए) इनका पोता रविरंजन जी करते हैं। इंटर में हैं आर्ट्स सब्जेक्ट से। मौजेलाल जी जब इतिहास की परत खोलते हैं तब लगता है 4-5 दिन भी कम पड़ जाना है। जाते वक़्त कहते हैं मुझसे कि ऐसे खाली मत जाइए, घर चल के चाय नास्ता कीजिए। मैंने इनका और यहाँ के मैनेजर(जो ज़्यादातर वक़्त ग़ायब ही रहते हैं) का फ़ोन नंबर ले लिया और इन्हें तसल्ली दी कि अगली बार आने से पहले फ़ोन करके आऊँगा, आप बस उस दिन चाय के लिए दूध का इंतज़ाम करके रखिएगा 😂






ये ऊपर का हाल देख ही लिए… शिक्षा का हाल ही बिहार में जब कहने लायक नहीं है तो पर्यटन के क्या ही कहने।


साथ ही में ये भी कहूँ की वर्तमान सरकार में पर्यटन मंत्री(श्री प्रमोद कुमार) हमारे शहर(मोतिहारी शहरी क्षेत्र) से ही हैं **तालियाँ**









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26 सितंबर 2020 🙂


चलो! नानी से मिल के गाँव वापस, जहाँ माँ दही जमा के इंतज़ार कर रही हैं। दही-भूजा ❤



लालबकेया नदी 😍





….जैसे गाँव मेरे ही इंतज़ार में थी कि मन्टू लौट आए तो ये मंजर पेश किया जाए 😎









कहीं दूर जब….


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27 सितंबर 2020 🙂

आज माँ को लेकर वापस मोतिहारी आ गया। कल दिल्ली के लिए रवानगी है 💃









राहुल सांस्कृत्यायन जी को जानते हैं आप ? नहीं ? वक़्त निकाल के जानिए 🙂

सांस्कृत्यायन जी कहते हैं-


“जीवन एक अनवरत यात्रा है. यात्रा मनुष्य को स्वतंत्र, ऊर्ध्वगामी उदार, तर्कशील और मानवीय बनाती है. इन आधारों पर वे किसी भी बड़े-से-बड़े विश्वास, आस्था को उत्तर-आधुनिक अर्थों में विखंडित करने का साहस रखते हैं बल्कि उसकी सीमाओं से मुक्त हो नई दिशाओं में बढ़ने का जोखिम भी उठाते हैं.”

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अब जयपुर मिलेंगे 💃
मन कर गया तो अजमेर, चितौरगढ़, उदयपुर भी


….और और और कुछ ज़्यादा ही मन कर गया तो बड़ौदा-सूरत भी 🙈





❤ 🙂

 

 

वर्ल्ड फ़ोटोग्राफी डे- 2020

“हुनर सिखाया नहीं जाता है, हासिल किया जाता है। मैं आपको कैमरा तो दे सकता हूं, लेकिन आपके अंदर विजन (नज़र) पैदा नहीं कर सकता।”

– रघु राय {Indian photographer and photojournalist.}

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ये तस्वीरें 2012 से लेकर 2020 तक की हैं। गाँव से लेकर अलग-अलग शहरों तक, जहाँ घूमा जहाँ कुछ सीखा जहाँ बहुत कुछ ख़ुद से छोड़ के आ गया जहाँ से ढ़ेर सारा जीवन समेटकर लौटा और अब लगता है कि अभी कितना कुछ सीखना बाकी है, कितना कुछ जीना बाकी है।

ख़ैर, आज वर्ल्ड फ़ोटोग्राफी डे होने की वज़ह से सोचा कि जो मुझे अच्छी तस्वीरें लगती हैं उन्हें एक साथ करके एक ब्लॉग पोस्ट बना लूँ तो उसी का ये नतीजा कह सकते हैं 🙂

लो सफ़र शुरू हो गया… 🙂

2014, दीपही गाँव, चम्पारण

2014, दीपही गाँव, चम्पारण

2014, चिरैया, मोतिहारी

2015, दीपही गाँव, मछली 😍

2015, दीपही गाँव

2012, चितौड़गढ़, राजस्थान

2012, जयगाँव, पश्चिम बंगाल, भारत-भूटान बॉर्डर

2020, शहर- मोतिहारी, बिहार

2016, मोतिहारी

2016, मोतिहारी,

उड़ने को सौ पंख दिए हैं
चढ़ने को खुला आसमां

मुड़ने को है करवट करवट
और बढ़ने को मेरा जहाँ…. 🙂

2016, मोतिहारी 😍

2016, मोतिहारी

2015, महात्मा गाँधी स्मारक, मोतिहारी

2017, नारेली, अजमेर, राजस्थान

2016, महात्मा गाँधी सेतु, पटना, बिहार

2016, वैशाली, बिहार

2015, वाल्मीकि नगर, बिहार का एकमात्र टाइगर रिज़र्व, भारत-नेपाल बॉर्डर पर।

2016, लालबकेया नदी, चंपारण, दुर्गापूजा मूर्ति विसर्जन

2012, जगतपुरा, जयपुर, राजस्थान

2017, राजमंदिर, जयपुर

2016, उदयपुर, राजस्थान😍

2012, भानगढ़, राजस्थान

2012, सरिस्का अभयारण्य, राजस्थान

2016, रॉक गार्डन, चंडीगढ़

2019, स्वर्ण मंदिर, अमृतसर पंजाब

2019, अटारी-वाघा बॉर्डर

2019, अटारी-वाघा बॉर्डर

2012, शिमला हिमाचल प्रदेश

2012, शिमला

2019, मॉल रोड, शिमला

2019, कुफ़्री घाटी, शिमला

2019, चाँदनी चौक, दिल्ली

2017, आगरा, ताज़महल ❤

2017 ❤❤❤

2018, रण ऑफ़ कच्छ , गुजरात, 31 दिसंबर 2018 😍

2018, रण ऑफ़ कच्छ

2019, कांकरिया लेक, अहमदाबाद , 1 जनवरी 2019 😍

2019, मथुरा

2019, वृन्दावन धाम

2019, ऋषिकेश

2019, ऋषिकेश

2019, ऋषिकेश

2019, ऋषिकेश ~ हिमालय का प्रवेश द्वार

2019, ऋषिकेश ~ हिमालय का प्रवेश द्वार

2019, गाँधी विहार, मुखर्जी नगर, नई दिल्ली

2019, वज़ीराबाद, नई दिल्ली

2019, अक्षरधाम, दिल्ली 🙈

2020, दीपही

2020, दीपही

2020, दीपही

2020, दीपही

2020, बटुकनाथ-मंटो, दीपही 😍

2020, दीपही-धरहरवा नहर

2020, दीपही

2015, दीपही, पहलवानी

2019, दीपही

फुटबॉल-

2014, दीपही

2016, रूपडीह, मोतिहारी

2020, दीपही

😍

ये जो कहते हैं कि सहारे है मेरे

मेरे भटक जाने का सबब पूछो इनसे

“फ़ोटोग्राफी, देखने का हुनर सिखाती है।” – बेरेनिस अबोट {American photographer.}

दिन ने हाथ थाम कर इधर बिठा लिया
रात ने इशारे से उधर बुला लिया
सुबह से शाम से मेरा दोस्ताना
मुसाफ़िर हूँ यारों…

ना घर है ना ठिकाना
मुझे चलते जाना है
बस चलते जाना… – गुलज़ार

अमृतसर :)

13 अप्रैल 2019 🙂

घर में मुझे छोड़ लगभग सभी जने अमृतसर जा चुके हैं। तो सभी घर वाले साथ होने पर घूमने की बात होती और बाकी घर वालों को पता चलता कि मैं अमृतसर नहीं गया हूँ तो सब कहते ”तू अमृतसर नहीं गया?”

तो इसबार सोचा चलते हैं अमृतसर

पहले चाय पी लेते हैं 😂

पंजाब के खेत 😍

पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट

ये पर्चा बाँटकर फण्ड इकठ्टा कर रहे थे, मुझे यही पर पता चला कि आज 13 अप्रैल है और आज ही जलियांवाला बाग घटना के 100 साल पूरे हो रहे हैं।

स्वर्ण मंदिर 🙂

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जलियांवाला बाग 🙂

शहीदी कुआँ

गोलियों के निशां

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भारत-पाकिस्तान बॉर्डर 🙂

अटारी-वाघा बॉर्डर पर होने वाले परेड को देखे बिना किसी को मरना नहीं चाहिए, ख़ासकर के किसी भारतीय को 🙂

पाकिस्तान में डूबते सूरज को देखना

परेड देखते हुए रोमांचित होते हुए भावुक हो जाना

वो सफ़ेद पट्टी जो निर्धारित करता है कि उधर कोई और मुल्क है इधर भारत है

‘मंटो’ की कहानी ‘टोबा टेक सिंह’ को याद करना

दो मुल्क जो एक थे कभी या दुनिया की तमाम सरहदें, मन में कहाँ तक खींची रहती हैं ?

ख़ैर….

….चल ख़ुसरो घर आपणो

प्राचीन मिस्रवासी मानते थे कि ”जीवन के दौरान अपनी पूरी सामर्थ्य को प्राप्त करके एक अर्थपूर्ण मृत्यु को पाने की तैयारी करना जीवन का उद्देश्य है।”

अब कहाँ मिलेंगे ? पता नहीं, शायद जयपुर मिलेंगे 🙂

चंडीगढ़ :)

12 अप्रैल 2019 🙂

शिमला से लौटते हुए राहुल, जीशान, और प्रतीक भाई दिल्ली चले गए मैं चंडीगढ़ रुक गया

और सुबह की चाय

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गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी 🙂

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सिटी म्यूजियम 🙂

चंडीगढ़ शहर को कैसे बसाया गया था, उसी के लिए ये म्यूजियम समर्पित है और इसे देखे बिना चंडीगढ़ को घूमना पूरा नहीं होगा

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नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम 🙂

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रोज़ गार्डन 🙂

825 Varieties of Rose’s. 😲

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रॉक गार्डन 🙂

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सुकना झील 🙂

अब अमृतसर में मिलेंगे 🙂