27 नवंबर 2020 🙂
IGNOU से हिंदी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा हूँ। इस साल आख़िरी है। करोना का नाटक नहीं होता तो अब तक 2nd ईयर का असाइनमेंट भी जमा हो चुका होता और एग्जाम का डेट भी अनाउंस हो चुका होता जो कि दिसंबर में होता। पर अब तक सात सब्जेक्ट में से 3 का ही स्टडी मटेरियल मिला है जो कि फ़रवरी में मिला था। बाकी का मटेरियल वो पोस्ट कर चुके हैं जो कि नज़दीक के पोस्ट ऑफिस (बुराड़ी) में धूल फांक रहा है। इतना ही पता करने के लिए मुझे IGNOU जाना पड़ा। इत्ती बात ये लोग फ़ोन उठा के भी कह सकते थे पर नहीं फ़ोन करो तो घोड़ा बेच के सो रहे होते हैं। इसलिए जाना पड़ा। ट्रैक आईडी लेकर आया हूँ। मटेरियल बुराड़ी से वापस लौट ना जाए बस अब। एग्जाम दिसंबर में ही होंगे उसके पहले सातों सब्जेक्ट के असाइनमेंट जमा करने होंगे उसके पहले स्टडी मटेरियल लाना होगा, उससे पहले ये ब्लॉग लिखना होगा 😂
कल ही जाना था मगर खा के ज़रा देर के लिए सोया तो शाम को उठा। तो आज जाना ही था।
सुबह आज सिग्नेचर ब्रिज चलते हैं 🤘
कल से ही सिग्नेचर ब्रिज जाना शुरू किया है जो कि रूम से 3.5km पड़ता है और अब रोज़ ही जायेंगे, रवि भाई जाए चाहे









लौटते वक़्त सोनी(छोटी बहन) के ट्वीट से पता चला कि आज तो रवि(छोटा भाई) का जन्मदिन है, जो कि भूल गया था।
आज ही रिजल्ट आया कि रवि का DU के Atma Ram Sanatan Dharam College में हिंदी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन हो गया। अच्छी बात है, लड़का दिल्ली आ रहा है अब…




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चलो अब चला जाये IGNOU





अमृता प्रीतम-इमरोज़ ❤
दिल्ली गेट 🙂





IGNOU का जो काम करना था कर लिया अब चलो पैदल चलते हैं मेट्रो पकड़ने राजीव चौक के लिए 🙂


राजघाट 🙏


फ़िर रास्ते में मैंने ये पढ़ा तो सोचा गाँधी जी से रिलेटेड कोई तो अच्छी किताब मिल जाएगी चल के देखने में क्या दिक्कत.. लेंगे नहीं तो कम से किताबों के नाम तो पढ़ेंगे कि किसने लिखा क्यों लिखा, और दोहराएंगे कि कितना कुछ पढ़ना है और जीवन इत्ता कम ही काहे दिए भगवान जी…



छोटू ❤



कालेलकर जी की दो किताब लेली।
लौटने लगा तो कैंपस की दूसरी साइड ये पत्थर की मूर्ति दिखी तो देखने चला आया, छोटू के साथ कि चल के पढ़ता हूँ कालेलकर जी के बारे में…

यहीं पास में धूप में कुर्सी लगा कुसुम शाह जी बैठी मिलीं और आदतन मेरे सवाल शुरू कि इनका कोई म्यूजियम भी है क्या, कुत्तों के नाम क्या है ? इनके बच्चे नहीं हैं क्या ? आपका नाम क्या है ? कहाँ से है आप ?
तब कुसुम अम्मा कहती हैं चलो तुमको दिखाती हूँ कालेलकर जी की स्मृतियाँ। तब हम छोटू, किसमिस, पिस्ता के साथ उस कमरे में गएँ जहाँ कालेलकर जी अपने आख़िरी के 25 साल बिताएँ और उस दरम्यान मेरे चेहरे पर जो ख़ुशी देखने लायक थी, बस नाचना ही बाकी रह गया था, पर जल्दी ही ध्यान आया कि उस कमरे में बहुत कुछ है जिसके बारे में जानना है, फ़ोटो क्लिक करना है,
अम्मा से रज़ामन्दी लेनी है कि ब्लॉग लिख सकता हूँ कि नहीं जहां पर आपकी भी और इस कमरे की भी तस्वीर शेयर करूँगा। अम्मा ने ‘हाँ’ कहा और विस्तार से सबकुछ बताया कि कालेलकर जी कहाँ जन्मे, देश के लिए क्या-क्या किया, देश ने उनके मरणोपरांत उनके लिए क्या क्या किया, सबकुछ। अम्मा 80 साल की हो चुकी हैं। सारा जीवन अविवाहित रहीं। 16 साल तक कालेलकर जी के साथ काम कीं। महाराष्ट्र की हैं और अब यहाँ दिल्ली में इन स्मृतियों को सहेजने का जिम्मा उठाई हैं।






जापानी गुरु फ़िजी की ओर से भेंट में मिली उनको घड़ी। 2:45 दोपहर को ही कालेलकर जी ने आख़िरी साँस ली थीं।

जेल में रहते हुए का उनका सामान, कैदी नंबर भी है।


पद्यविभूषण, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हाथों मिला उन्हें

गाँधी जी के सबसे प्रिय शिष्यों में से एक थे कालेलकर जी

जन्मशताब्दी पर इंदिरा गाँधी ने डाक टिकट जारी किया था।




दो बार वे राज्यसभा के लिए भी चुने गएँ। सर्व धर्म समभाव के पुरज़ोर समर्थक थे जो कि उनके कमरे में लगीं सभी धर्म गुरुओं की तस्वीर देखकर कोई भी समझ सकता है। उनके लेखन का विशाल संग्रह भी गौर करने लायक है। जिसकी 10वीं ग्रंथावली- डायरी लेकर आया हूँ। कालेलकर जी को उनके एक निबंध संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला।
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तीन प्यारे दोस्त बने मेरे।
एक तो छोटू, दूसरा किसमिस, तीसरा पिस्ता, दो और थे काजू और बादाम, अब नहीं रहें।











अम्मा से ढ़ेर सारी बातें हुईं फ़िर। मेरे बारे में जाना उन्होंने और नंबर लिया मेरा और कहीं कि आते रहना। अगली बार शुक्रवार को ही आना। राजघाट पर इनकी तरफ़ से विशेष प्रार्थना सभा होती हैं।


मैंने उनसे फ़िर से मिलने का वादा करके, नमस्ते किया और मुस्कुराते हुए मेट्रो स्टेशन की तरफ़ बढ़ा। अब राजीव चौक जाना है।
2 दिसंबर को सौरभ की शादी है। उसमें चमकने के लिए कपड़े लेने थे 🙈
मगर मगर मगर कपड़े के नाम पर एक स्वेटर उठा लाया बस। और बहुत कुछ नहीं लाना था वो ले आयें, बहुत कुछ नहीं करना था वो कर आयें 🙊










आज का हासिल 🙂
अब लौटो भाई.. कल चित्तौड़ के लिए निकलना है 🤘
अब चित्तौड़-नीमच मिलेंगे 🙂
बाकी दुआ करना मेरे लिए आप सब और करोना मुई को जी भर के कोसना, है ना ? हाँ
❤ 🙂



































































































































































































