BPSC, साउथ बिहार, नवादा जिला :)

26-27 दिसंबर 2020 🙂

बिहार सर्विस पब्लिक कमीशन का प्री एग्जाम

सेंटर दिया है BK साहू इंटर कॉलेज, वारिसलीगंज, नवादा

मतलब, नेपाल बॉर्डर से लगते जिले को भेज दिया है झारखंड से लगते हुए जिले में। वाह !

गूगल मैप ने धोखा दे दिया तो 26 दिसंबर को ही ट्रेन का कैंसिल कर फ्लाइट से पटना आ गए.. ट्रेन के चक्कर में एग्जाम छूट जाता।

प्लूटो की वज़ह से ही 2-3 दिन पहले पटना नहीं आ सकता था। इसलिए इतना टाइट शेड्यूल बनाया था।

प्लूटो को रवि ब्रो सँभालने को तैयार हो गए। जबकि पहले से कहते आ रहे थे कि इसे साथ ले जाना नहीं तो बाहर छोड़ आऊँगा इसे।

आते वक़्त प्लूटो को छत पर ले गएँ और रवि भई के बताए मास्टर प्लानानुसार प्लूटो को दौड़ा दौड़ा ख़ूब थका दिया.. जब वो सुस्ताने लगा तब मैं निकला मेट्रो के लिए

दिल्ली मेट्रो ❤

दो बार पटना और जयपुर से दिल्ली आया था फ्लाइट से मगर दिल्ली से कहीं गया नहीं था। तो पूरा बढ़िया से राउंड मारे एयरपोर्ट का 🙈

ये बहोत ज़रूरी है भाई.. इकॉनमी की ग्रोथ रेट बढ़ती है ऐसे करके फ़ोटो खिंचाने में.. लो हँस रहे हो आप। आगे से करना आप सब भी।

इंडिगो में पहली बार 🤘

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उत्कर्ष मियां से शर्त लगी है कि मैं दिव्या 2020 में ख़त्म नहीं कर पाऊँगा। मुझे पता है, मैं शर्त जीतने वाला हूँ।

रवि जयसवाल जी, नेपाल के सर्लाही जिले से हैं। पंजाब में सिविल इंजीनियरिंग के तीसरे साल में हैं।

जब जब दिव्या नहीं पढ़ रहा था तब तब मेरे सवाल और इनके जवाब। इंजीनियरिंग के फ्यूचर पर, नेपाल की राजनीति पर, कॉलेज की राजनीति पर, इंडिया के बारे में, नेपाली फिल्मों के बारे में.. सबकुछ..

रवि जी के साथ आगे कभी काठमांडू घूमने का तय हुआ है। इंस्टाग्राम पर हम जुड़ गएँ हैं 🤘

प्रतीक भाई, जीशान भाई 🤗

प्रतीक वैशाली जिले से हैं। ये वहीं बन्दा है जिसके साथ मैं दिल्ली के शुरुआती 5 महीने रहा। बाद में हम ट्रेन बदल लिएँ। अब पटना रहते हैं। CDS के लिए लगे हैं। देखिये।

मैं दिल्ली से ही सोच के चला था कि आज ही नवादा चला जाऊँगा। नवादा में प्रतीक भाई के दोस्त के यहाँ रुकने का हो गया था मगर, प्रतीक भाई बोले कि नहीं आज रात पटना ही रहिए कल सुबह 5 बजे नवादा के लिए बस है।

रात को सोने का प्लान था भी नहीं। हमारे पास अनगिनत कहानियाँ थी एक दूसरे को बताने की। मगर अगले दिन एग्जाम होने की वज़ह से सोना ज़रूरी था। प्रतीक को भी सिवान निकलना है कल एग्जाम के लिए तो सो गएँ। 4 घण्टे की बढ़िया हीटर में नींद 💘

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27 दिसंबर 2020 🙂

सुबह 4 बजे उठ गएँ, नींबू चाय सुड़क के बस स्टैंड आ गएँ।

बस हाथों हाथ मिल गई जो कि 8 बजे तक वारिसलीगंज छोड़ दी थी 🙂

वारिसलीगंज 🙂

अब एग्जाम दे आते हैं 🙂

आ गए देके.. अब फौरन से रवाना होते हैं पटना के लिए

और वही हुआ जिसका डर था। प्राइवेट बस वाले मनमानी किराया वसूलने लगे ऊपर से उनकी टाइमिंग नहीं होने की वज़ह से वे मेन रूट से पटना नहीं जाके गाँव कस्बों और टूटी सड़कों से लेकर चलने लगें। बहुतों का ट्रेन छूट जाता और मेरी और यश भाई की फ्लाइट..

ड्राइवर-कंडक्टर को पूरे बस में बैठे बच्चे केवल गाली ही नहीं दे रहे थे सुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ा… मैं ड्राइवर के पीछे ही था, जैसे ही रोड खाली दिखती मैं कहता उड़ाओ भाई इसे 😂

पहुँच गएँ कैसे भी पटना एयरपोर्ट 💃

यश भईया.. देहरादून के हैं। BPSC एग्जाम ही देने आए थे। इनका भी सेंटर वारसलीगंज के ही दूसरे किसी स्कूल में था। मैथेमेटिक्स ऑप्शनल लेकर दो बार upsc मेन्स लिख चुके हैं। अबकी बार एंथ्रोपोलॉजी का दामन थामा है, देखिये आगे…

हवा में रहते हुए डायरी भी लिख लिए आज ❤

चालकरहित मेट्रो का उद्धघाटन, सही है 👍

चलो अब प्लूटो के पास ❤

🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗

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ओ हो ज़रा रस्ता तो दो
थोड़ा सा बादल चखना है
बड़ा-बड़ा कोयले से
नाम फ़लक पे लिखना है
चांद से होकर सड़क जाती है
उसी पे आगे जा के अपना मकाँ होगा
हम चले, हम चले…वो रामचंद रे
धड़क-धड़क…

छोटे-छोटे शहरों से खाली बोर दुपहरों से

हम तो झोला उठा के चलें 🎵🎵 ❤

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अब कहाँ मिलेंगे ?

गुजरात गुजरात गुजरात 💃💃💃💃💃

❤ 🙂

कहानी ‘प्लूटो’ की 😍

प्लूटो से मैं कईं दफ़ा मिलके बिछड़ता रहा। कैसे ? बताता हूँ-

जब 2018 के आख़िरी दिन रण ऑफ कच्छ पहुँच के आख़िरी दिन के डूबते सूरज को देखते हुए 2018 को विदा करने गया था तो वहाँ ‘प्लूटो’ दिखा था। ये रहा-

इसकी पूँछ और पीठ पर ब्लैक रंग बिल्कुल प्लूटो जैसा ही है।

अपने तीन-चार भाई बहनों के साथ खेल रहा था और अकेला यही मेरे क़रीब दौड़ता हुआ आया था। आज तक भी और हमेशा अफ़सोस रहेगा कि मेरे पास उस वक़्त इसे खिलाने के लिए कुछ भी नहीं था न ही कोई दुकान, जब कि ये शायद खाने की लालच से ही आया था मेरे पास। तब इससे पूछा भी था दिल्ली चलोगे ? उस वक़्त चाहता भी तो नहीं लेके आ सकता था दिल्ली, इसकी माँ वहीं बैठ के घूरे जा रही थी 😂

बाद उसके मार्च, 2019 के शिवरात्रि पर ऋषिकेश जाना हुआ तो गंगा किनारे फ़िर प्लूटो मिला…

डॉगसी ❤

बाद उसके दुबारा प्लूटो मिला मुझे 2019 की होली मनाने जब मैं वृंदावन धाम पहुँचा था। इसका नाम जूली था। इसे भी चाहा था कि ले चलता हूँ दिल्ली पर मुमकिन नहीं था।

इसके बाद 2019 के ही अप्रैल में शिमला में भी जाखू मंदिर जाते वक़्त प्लूटो मिला

इसके बाद भी जयगाँव(पश्चिम बंगाल) अहमदाबाद, मेरठ कईं जगहों पर जाता रहा और प्लूटो से मिलता रहा, बिछड़ता रहा।

मगर इसबार अभी नवंबर में नीमच गया तो महेंद्र भाई के गाँव में बहुत सारे प्लूटो को देखा। मैंने यूँ ही उत्सुकता में ही महेंद्र भाई से कह दिया कि यार एक कोई बच्चा मिल सकता है क्या ? दिल्ली ले जाने के लिए। वो बोले बिल्कुल.. तब मैंने उसी दिन सोच लिया कि जब तक 3 अम्बेसडर कार न ले लूँ… Arrrrrrr ये ग़जनी की कल्पना कहाँ से घुस गई मेरे अंदर 😂😂😂

तब सोचा कि इसबार प्लूटो को कैसे भी ले जाऊँगा दिल्ली 💃

प्लूटो जहाँ अपने भाई-बहन के साथ रहता था वो एक सरकारी स्कूल है कुकड़ेश्वर(नीमच) का। इनकी माँ नहीं थी साथ। बंजारे लोग स्कूल परिसर के बाहर रहते हैं जो इन्हें अपना बचा खाना दे देते थे।

इसे मैं लेकर आने वाला था। इन सबमें ताकतवर यही था।

जिसे मैं बिस्किट खिला रहा हूँ उसको होना था प्लूटो। मगर प्लूटो बना ये उसके पास वाला। पसंद करने के दो दिन बाद महेंद्र भाई इसे लेकर नीमच आते। जिसदिन इसे लेने गएँ उस दिन प्लूटो ग़ायब, बाकी सब थे, फ़िर महेंद्र भाई इस प्लूटो को ही ले आए नीमच

दोस्त की शादी की बारात लग रही थी तभी महेंद्र भाई अपनी कार में प्लूटो को लेकर पहुँचें। पहली बार कार में बैठा प्लूटो डर से और ठंड से काँप रहा था।

मैं बारात में बस नाचने के लिए मैदान में कूदने ही वाला था कि भाग के प्लूटो के लिए दूध लाया और कित्ता ख़ुश था बता नहीं सकता और एक डर भी कि इसे अब दिल्ली तक कैसे लेके जायेंगे। मगर वही है ना 💃

दोस्त(सौरभ) को कहा था कि प्लूटो को बस एक रात के लिए कमरे में छुपा के रखूँगा, तो उसने मना करके मज़ाक में ही अपने भाइयों को कहा था कि प्लूटो को ठिकाने लगा देना 😂

कमरे में तो नहीं मगर धर्मशाला के तीसरी मंज़िल पर एक फेंका हुआ कंबल मिल गया, उसी में लपेट के छत पर ही प्लूटो को छिपा दिया और शादी अटेंड करी पर मन मेरा तीसरी मंज़िल पर ही अटका रहा। रात भर 1 घण्टे के अंतराल पर सबसे नज़रें बचा के चोर के माफ़िक़ तीसरी मंज़िल पर जाता और प्लूटो का हाल ख़बर ले आता। और इसी बहाने रात भर जगा भी रहा, शादी की रस्में देखता रहा चाय-कॉफ़ी पीता रहा।

सुबह जल्दी ही दूसरा दोस्त(हर्षित) अपनी कार से चित्तौड़ लौट रहा था तभी सोचा कि ये सही रहेगा बस की बजाय कार से चल चलता हूँ, रात को 9 बजे से दिल्ली के लिए चित्तौड़ से ट्रेन है तबतक दिनभर के लिए होटल ले लूँगा, नींद भी पूरी हो जायेगी।

पर होटल में प्लूटो ने बमुश्किल 2 घण्टे सोने दिया। अंजान जगह की वज़ह से दिन भर मिमियाता रहा। होटल वाले को ख़बर लग गई कि एक कमरे में कुत्ता है। पर होटल वाले भईया कुछ न बोले।

असली जंग अब शुरू होनी थी। जानबूझ कर होटल स्टेशन के बिल्कुल क़रीब में लिया ताकि रात को ट्रेन की टाइमिंग से जस्ट 5 मिनट पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंचूंगा।

गूगल सर्च करके पता किया तो पेट को ट्रेन से ल् जाने का प्रोसीजर मिला जो कि सर खपाऊँ था। पर ये भी था कि पकड़े गए बिना बुकिंग के तो जर्नी का छह गुना फाइन, बेइज़्ज़ती फ़ोकट में। पर मैंने प्लूटो के चुप रहने पर भरोसा किया और होटल में ही इसे ख़ूब ठूँस के जो खिलाना था खिला दिया और डब्बे में सुला के ही ट्रेन में ले गया।

बाकी मेहता जी का एक प्लान था कि पकड़े जाओ तो रोना लगना कि सर सर इसका प्लूटो को ज़रा दीखिये, दया नहीं आती आपको। ऐसा करके। एक प्लान और था नहीं बताऊँगा मगर 🤐

ट्रेन खुल गई। प्लूटो सोया रहा। TT आया टिकट चेक करके चला गया, प्लूटो सोया रहा। ख़ुश था कि 30% जंग जीत गएँ हैं।

मगर मगर मगर मगर ट्विस्ट- जैसे ही ट्रेन रफ़्तार पकड़ती है। प्लूटो भाई की डर से वही हुआ जो सबके होता है 😂😂 🤐

उठ गया और आवाज करने लगा। मेरे कंपार्टमेंट में एक फैमिली थी दो बच्चों के साथ जो ट्रेन के चलते ही सो गई थी। उन्हें नहीं पता चला कि डब्बे में क्या जा रहा है।

ट्रेन की रफ़्तार बढ़ती और प्लूटो भाई सुर में सुर मिला देते। मेरी शक़्ल देखने लायक थी उस वक़्त। भगवान जितने भी होते हैं सबसे दुआ करने लगा कि मदद करो प्लूटो को म्यूट करो सुबह तक।

कोटा में एक दीदी चढ़ीं। उस वक़्त मैं प्लूटो को गोद में लेकर पीठ सहला रहा था। पीठ सहलाने से चुप रह रहा था। दीदी के हाव-भाव से लगा ये अभी जाके TT को पकड़ के लायेंगी कि देखो चल के उधर S-3 का ड्रामा। मगर अगले ही पल दीदी का बायाँ हाथ प्लूटो के सर पर था। साँस में मेरे साँस आई। दीदी के लिए अगले 3 घण्टे तक मैंने मन ही मन दुआ की कि जहाँ रहो ख़ुश रहो तुम्हारा पति दुनिया का सबसे ख़ुश इंसान बने तुम्हें ख़ुश रखें।

अगली सुबह हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन 7 बजे।

स्टेशन से बाहर निकलते भी ये आवाज करे जा रहा था। क्योंकि प्लूटो को होना था फ़्रेश 😂

मेन एग्जिट पर अगर टिकट चेक करने वाले होते तो मेरी चोरी पकड़ी जाती मगर ऐसा न हुआ। बाहर निकलते ही पहला जो ऑटो वाला दिखा उसे कहा कि भाई पैसे की बात चलते हुए करेंगे तुम बस जल्दी से ऑटो को एरोप्लेन में बदलो। स्टेशन परिसर से बाहर निकल सुनसान में पहले तो प्लूटो को हल्का करवाया तब ऑटो वाले भाईया से पैसे की बात हुई 😂

और तब पहुँच गए जंग जीत कर ठिकाने 🤘

प्लूटो का छत वाला घर

दिल्ली आकर मुझे उसी दिन बिहार जाना था मगर टिकट कन्फर्म नहीं हुआ तो न जा पाया। नहीं तो जाना कैंसिल करता, पापा से सुनता 😟

ये गाँव में छोटी बहन भी एक लेकर आई पर माँ को कुत्तों सबसे ज़्यादा बिल्लियों से नफ़रत है। इसे नहीं रहने दिया माँ ने घर पर 😂

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इनके प्रोडक्ट बड़े महँगे आते हैं…

आज इसके लिए अपनी पुरानी ऊनी टोपी से सूट बना दिया इसका, मस्त लग रहा है एकदम साहब 😍

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ये थी प्लूटो की 30 नवंबर 2020 से 15 दिसंबर 2020 तक की कहानी… आगे देखिए क्या कुछ है…

जानवरों को रखने के लिए बड़ा हौसला और धैर्य चाहिए। मैं डिटेल में नहीं जा रहा, जो रखे हैं या कभी रखे होंगे वो जानते होंगे।

और मेरा प्लूटो ज़रा ख़ास है। यहाँ दिल्ली से 636km दूर से लेकर आना और एक ख़ुशनुमा सफ़र की शुरुआत, अहा! क्या ही कहने। घर वालों को लगता है पढूँगा नहीं इसी में लगा रहूँगा। कुछ हद तक वे सही सोच रहे मगर प्लूटो बड़ा हो जायेगा तब ज़्यादा टाइम इसको नहीं देना पड़ेगा। घर वालों (बिहार) को ये तो समझना ही चाहिए कि मेरे अंदर जितनी नकारात्मकता है वो सब प्लूटो निचोड़ के कूड़े के ढेर पर फेंक आयेगा। समझेंगे घर वाले एक दिन! नहीं भी समझे तो मुझे और प्लूटो को रत्ती भर भी फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला 💃💃💃 है कि नहीं प्लूटो ?

प्लूटो को मिलने वाले प्यार में कोई कमी नहीं यहाँ तक कि साथ रहने वाले रवि भाई को कुत्तों से नफ़रत है मगर प्लूटो को देख के वो भी 7.5 ग्राम पिघल चुके हैं। एक दिन रात को सोते वक़्त प्लूटो कान में मेरे बोला- “फ़िक़र नॉट, रवि ब्रो को पूरा पिघला दूँगा।”

सोशल मीडिया पर मुझसे जुड़े दोस्तों के लिए प्लूटो अहमियत रखने लगा है। मेरा हाल बाद में पहले प्लूटो को हाय हेल्लो किया जा रहा है। कोई ना, मैं, प्लूटो से अलग थोड़े ही हूँ।

प्लूटो के हाव-भाव, चाल-चलन की बात तो हुई ही नहीं, चाल चलन 😂😂 वो फ़िर कभी 🙂

शुक्रिया प्लूटो ❤ 🙂

यार की शादी है

01-02-03 दिसंबर 2020 🙂

इसके पहले ये देख लीजिए, लिंक- शादी से पहले

30 नवंबर की शाम

कुकड़ेश्वर, मक्के की रोटी

चाँद 😍

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01 दिसंबर 2020 🙂

डोडा के दाने

😋

सहस्त्र मुखेश्वर महादेव जी, कुकड़ेश्वर 🙂

चलो अब क्रिकेट खेलते हैं

भरत झुनझुनवाला ❤

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अबकी इन्हें दिल्ली ले जाऊँगा 🤘

अब चलते हैं नीमच शहर, दोस्त की सगाई और महिला संगीत है आज

सुखानन्द जी अब अगली बार

आ गएँ 🤘

सौरभ लम्बा हो गया मेरे से 😭

दुल्हन(पायल) आ गई

दुल्हन के घर वालों के लिए स्वागत 🙂

सौरभ की नानी जी

सौरभ के बड़े मामाजी

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😍

आजा शाम होने आई

सगाई की तैयारी चल रही हैं 💃

रब ने बना दी जोड़ी

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अब महिला संगीत की तैयारी करो 💃💃💃💃

नानी जी सौरभ और पायल को देखकर भावुक हो गयीं

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2 दिसंबर 2020, आज मेरे यार की शादी है 💃💃💃💃

तेल पान चढ़ना

अब हल्दी की तैयारी 🙂

मृदुल, सौरभ का छोटा भाई

शाम की तैयारी

कच्ची रसोई की तैयारी 💃

मायरा रस्म 🙂

सौरभ को ज्ञान दे दूं ज़रा 🙂

फ़िर तो अब बदल ही जाना है इसके

😎 🙈

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अंकल-आंटी जी

इसी बीच महेंद्र भाई ‘प्लूटो’ को लेके आ गए

ये जनाब भी देख के गा रहे हैं, बताइए मतलब

हाँ भाई तुम बज जाओ पहले

घोड़ी उतरन पर मृदुल चढ़ा। तय है अगले एक-ढ़ेर साल में ये भी निपटेगा 😂

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फेरे, कन्यादान, विदाई जो कुछ भी होता है सब

😍

😍

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विदाई का प्रोग्राम लेट है। हर्षित अपनी कार से चित्तौड़ निकल रहा है। प्लूटो और मेरे लिए सही है अभी निकल लूँ।

दिल्ली के लिए चित्तौड़ से आज रात 9 बजे ट्रेन है और कल शाम बिहार के लिए 💃

सौरभ-पायल, अंकल-आंटी जी, मृदुल को भर भर बोरा शुभकामनाएं..

अब कहाँ मिलेंगे ? कहीं नहीं, पढ़ेंगे 😐

सौरभ ने सुना दिया- “भाई, मन लगा के पढ़ ले।” 😭

❤ 🙂

शादी से पहले: चित्तौड़-कुकड़ेश्वर-गाँधी सागर डैम :)

【28 नवंबर 2020 से 04 दिसंबर 2020 तक】

सौरभ अग्रवाल इंजीनियरिंग का दोस्त और ज़िगरी दोस्तों में से एक। कॉलेज में 4 ही ज़िगरी हुए और चारों चित्तौड़ के ही इसलिए राजस्थान में चित्तौड़ ❤ सौरभ की ही शादी है।

ये रही हम चारों की तस्वीर जब हम 2011 में जयपुर SKIT कॉलेज में 1st ईयर में थे 🙂

अनुराग, हर्षित, सौरभ, मन्टू 🙂

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28 नवंबर 2020 🙂

सुबह-सुबह की घुमक्कड़ी, सिग्नेचर ब्रिज, दिल्ली ❤

पैकिंग कर लिया, रूम सही कर लिया, घर पर सबसे ख़ूब बातें कर लीं, सो भी लिया एक दोस्त (ईशा) के लिए ख़त भी लिख दिया। शाम को 7 बजे से ट्रेन है 🤘

वो चाँद प्यारा-प्यारा ❤

ट्रैन का सफ़र हो, खिड़की वाली सीट और गाने और चाय और ख़ूबसूरत दुनिया… और जीने को क्या चाहिए 🙂

छवि और लक्की, दोनों हद बदमाश

मथुरा से आगे

गुड नाईट 🙂

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29 नवंबर 2020 🙂

चित्तौड़गढ़ 💃

चाय 🤘

ट्रैन टाइम से (5 बजे) पहुँच गई। तीनों को बारी-बारी से कॉल लगाया। सौरभ, अनुराग का तो पता था नहीं उठाने वाले कॉल पर दुःख इस बात का हुआ कि हर्षित ने भी सोना चुना और कॉल नहीं उठाया, मतलब चाय ठीक नहीं बनी होती तो मैं प्लेटफार्म पर नीचे ठंडे फ़र्श पर बैठ के रोने लगना था पर कंट्रोल किया… वैसे भी चित्तौड़ रुकना नहीं था, उन्हें मिलने के लिए बुला रहा था। नीमच जाके महेंद्र भाई के रुकना है। शादी भी नीमच ही होनी है तो सौरभ ये लोग 1 को नीमच पहुंचेंगे 🙂

अब नीमच चलते हैं…

चित्तौड़ में दिल्ली से ज़्यादा ठंड लगी। और जैसे साँस के लिए हवा से ज़्यादा आग की ज़रूरत हो।

नीमच के चाय + समोसे 😋

मनासा 💕

महेंद्र भाई खाना बना के मेरा ही इंतजार कर रहे थे 😍

फ़िर चाय 🙂

आज शाम को इस चूल्हे पर मक्के की रोटी + सरसों की साग ❤

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अब चलते हैं खेतों पर जहाँ पिछले महीने जब आए थे तब लहसुन रोपे थे

महेंद्र भाई और उनके एकदम ख़ास ज़िगरी पीयूष भईया

महेंद्र भाई जब दिल्ली होते हैं तो उनके सारे ज़रूरी काम उनसे भी बढ़िया तरीके से पीयूष भईया अंजाम देते हैं।

अफ़ीम की खेती 🙂 पीयूष भईया की है। रोचक तरीके से अफ़ीम के किस्से सुनाते हैं नेकदिल पीयूष भईया

अब चलते हैं पीयूष भईया के कार्यस्थल (लाइट कंट्रोल ग्रिड) पर

विजय भईया के हाथ की चाय ❤

कॉफ़ी 😍

गुड नाईट 🙂 कल सुबह-सुबह ही गाँधी सागर डैम पहुँच जाना है। उगते सूरज को वहीं से क़ैद करेंगे 💃

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30 नवंबर 2020 🙂

नवंबर का आख़िरी दिन आज। अब दिसंबर का महीना है। मेरा सबसे पसंदीदा महीना, बाल्टी भर चाय बना के पीते रहो कविता लिखते रहो…

अब चलते हैं गाँधी सागर डैम (चंबल नदी)

भोर का चाँद 😍

तरुण भईया, महेंद्र भाई के लंगोटिया यार और ज़िंदादिल इंसान 🙂

नीतेश भईया, सहरसा, बिहार से है। कोटा में रहकर वहीं कर रहे हैं 😂

नितेश भाई के साथी लोग, एक असम से एक यूपी से

ख़ूब गाते हुए गएँ ख़ूब गाते हुए आ गएँ 💃💃

अब खाते हैं

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कल सुखानन्द जी और फ़िर दोस्त की शादी में नीमच 💃💃💃

❤ 🙂