प्लूटो से मैं कईं दफ़ा मिलके बिछड़ता रहा। कैसे ? बताता हूँ-
जब 2018 के आख़िरी दिन रण ऑफ कच्छ पहुँच के आख़िरी दिन के डूबते सूरज को देखते हुए 2018 को विदा करने गया था तो वहाँ ‘प्लूटो’ दिखा था। ये रहा-

इसकी पूँछ और पीठ पर ब्लैक रंग बिल्कुल प्लूटो जैसा ही है।

अपने तीन-चार भाई बहनों के साथ खेल रहा था और अकेला यही मेरे क़रीब दौड़ता हुआ आया था। आज तक भी और हमेशा अफ़सोस रहेगा कि मेरे पास उस वक़्त इसे खिलाने के लिए कुछ भी नहीं था न ही कोई दुकान, जब कि ये शायद खाने की लालच से ही आया था मेरे पास। तब इससे पूछा भी था दिल्ली चलोगे ? उस वक़्त चाहता भी तो नहीं लेके आ सकता था दिल्ली, इसकी माँ वहीं बैठ के घूरे जा रही थी 😂
बाद उसके मार्च, 2019 के शिवरात्रि पर ऋषिकेश जाना हुआ तो गंगा किनारे फ़िर प्लूटो मिला…




डॉगसी ❤
बाद उसके दुबारा प्लूटो मिला मुझे 2019 की होली मनाने जब मैं वृंदावन धाम पहुँचा था। इसका नाम जूली था। इसे भी चाहा था कि ले चलता हूँ दिल्ली पर मुमकिन नहीं था।




इसके बाद 2019 के ही अप्रैल में शिमला में भी जाखू मंदिर जाते वक़्त प्लूटो मिला


इसके बाद भी जयगाँव(पश्चिम बंगाल) अहमदाबाद, मेरठ कईं जगहों पर जाता रहा और प्लूटो से मिलता रहा, बिछड़ता रहा।
मगर इसबार अभी नवंबर में नीमच गया तो महेंद्र भाई के गाँव में बहुत सारे प्लूटो को देखा। मैंने यूँ ही उत्सुकता में ही महेंद्र भाई से कह दिया कि यार एक कोई बच्चा मिल सकता है क्या ? दिल्ली ले जाने के लिए। वो बोले बिल्कुल.. तब मैंने उसी दिन सोच लिया कि जब तक 3 अम्बेसडर कार न ले लूँ… Arrrrrrr ये ग़जनी की कल्पना कहाँ से घुस गई मेरे अंदर 😂😂😂
तब सोचा कि इसबार प्लूटो को कैसे भी ले जाऊँगा दिल्ली 💃
प्लूटो जहाँ अपने भाई-बहन के साथ रहता था वो एक सरकारी स्कूल है कुकड़ेश्वर(नीमच) का। इनकी माँ नहीं थी साथ। बंजारे लोग स्कूल परिसर के बाहर रहते हैं जो इन्हें अपना बचा खाना दे देते थे।


इसे मैं लेकर आने वाला था। इन सबमें ताकतवर यही था।


जिसे मैं बिस्किट खिला रहा हूँ उसको होना था प्लूटो। मगर प्लूटो बना ये उसके पास वाला। पसंद करने के दो दिन बाद महेंद्र भाई इसे लेकर नीमच आते। जिसदिन इसे लेने गएँ उस दिन प्लूटो ग़ायब, बाकी सब थे, फ़िर महेंद्र भाई इस प्लूटो को ही ले आए नीमच
दोस्त की शादी की बारात लग रही थी तभी महेंद्र भाई अपनी कार में प्लूटो को लेकर पहुँचें। पहली बार कार में बैठा प्लूटो डर से और ठंड से काँप रहा था।

मैं बारात में बस नाचने के लिए मैदान में कूदने ही वाला था कि भाग के प्लूटो के लिए दूध लाया और कित्ता ख़ुश था बता नहीं सकता और एक डर भी कि इसे अब दिल्ली तक कैसे लेके जायेंगे। मगर वही है ना 💃




दोस्त(सौरभ) को कहा था कि प्लूटो को बस एक रात के लिए कमरे में छुपा के रखूँगा, तो उसने मना करके मज़ाक में ही अपने भाइयों को कहा था कि प्लूटो को ठिकाने लगा देना 😂
कमरे में तो नहीं मगर धर्मशाला के तीसरी मंज़िल पर एक फेंका हुआ कंबल मिल गया, उसी में लपेट के छत पर ही प्लूटो को छिपा दिया और शादी अटेंड करी पर मन मेरा तीसरी मंज़िल पर ही अटका रहा। रात भर 1 घण्टे के अंतराल पर सबसे नज़रें बचा के चोर के माफ़िक़ तीसरी मंज़िल पर जाता और प्लूटो का हाल ख़बर ले आता। और इसी बहाने रात भर जगा भी रहा, शादी की रस्में देखता रहा चाय-कॉफ़ी पीता रहा।
सुबह जल्दी ही दूसरा दोस्त(हर्षित) अपनी कार से चित्तौड़ लौट रहा था तभी सोचा कि ये सही रहेगा बस की बजाय कार से चल चलता हूँ, रात को 9 बजे से दिल्ली के लिए चित्तौड़ से ट्रेन है तबतक दिनभर के लिए होटल ले लूँगा, नींद भी पूरी हो जायेगी।
पर होटल में प्लूटो ने बमुश्किल 2 घण्टे सोने दिया। अंजान जगह की वज़ह से दिन भर मिमियाता रहा। होटल वाले को ख़बर लग गई कि एक कमरे में कुत्ता है। पर होटल वाले भईया कुछ न बोले।


असली जंग अब शुरू होनी थी। जानबूझ कर होटल स्टेशन के बिल्कुल क़रीब में लिया ताकि रात को ट्रेन की टाइमिंग से जस्ट 5 मिनट पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंचूंगा।
गूगल सर्च करके पता किया तो पेट को ट्रेन से ल् जाने का प्रोसीजर मिला जो कि सर खपाऊँ था। पर ये भी था कि पकड़े गए बिना बुकिंग के तो जर्नी का छह गुना फाइन, बेइज़्ज़ती फ़ोकट में। पर मैंने प्लूटो के चुप रहने पर भरोसा किया और होटल में ही इसे ख़ूब ठूँस के जो खिलाना था खिला दिया और डब्बे में सुला के ही ट्रेन में ले गया।
बाकी मेहता जी का एक प्लान था कि पकड़े जाओ तो रोना लगना कि सर सर इसका प्लूटो को ज़रा दीखिये, दया नहीं आती आपको। ऐसा करके। एक प्लान और था नहीं बताऊँगा मगर 🤐
ट्रेन खुल गई। प्लूटो सोया रहा। TT आया टिकट चेक करके चला गया, प्लूटो सोया रहा। ख़ुश था कि 30% जंग जीत गएँ हैं।
मगर मगर मगर मगर ट्विस्ट- जैसे ही ट्रेन रफ़्तार पकड़ती है। प्लूटो भाई की डर से वही हुआ जो सबके होता है 😂😂 🤐
उठ गया और आवाज करने लगा। मेरे कंपार्टमेंट में एक फैमिली थी दो बच्चों के साथ जो ट्रेन के चलते ही सो गई थी। उन्हें नहीं पता चला कि डब्बे में क्या जा रहा है।
ट्रेन की रफ़्तार बढ़ती और प्लूटो भाई सुर में सुर मिला देते। मेरी शक़्ल देखने लायक थी उस वक़्त। भगवान जितने भी होते हैं सबसे दुआ करने लगा कि मदद करो प्लूटो को म्यूट करो सुबह तक।
कोटा में एक दीदी चढ़ीं। उस वक़्त मैं प्लूटो को गोद में लेकर पीठ सहला रहा था। पीठ सहलाने से चुप रह रहा था। दीदी के हाव-भाव से लगा ये अभी जाके TT को पकड़ के लायेंगी कि देखो चल के उधर S-3 का ड्रामा। मगर अगले ही पल दीदी का बायाँ हाथ प्लूटो के सर पर था। साँस में मेरे साँस आई। दीदी के लिए अगले 3 घण्टे तक मैंने मन ही मन दुआ की कि जहाँ रहो ख़ुश रहो तुम्हारा पति दुनिया का सबसे ख़ुश इंसान बने तुम्हें ख़ुश रखें।
अगली सुबह हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन 7 बजे।
स्टेशन से बाहर निकलते भी ये आवाज करे जा रहा था। क्योंकि प्लूटो को होना था फ़्रेश 😂
मेन एग्जिट पर अगर टिकट चेक करने वाले होते तो मेरी चोरी पकड़ी जाती मगर ऐसा न हुआ। बाहर निकलते ही पहला जो ऑटो वाला दिखा उसे कहा कि भाई पैसे की बात चलते हुए करेंगे तुम बस जल्दी से ऑटो को एरोप्लेन में बदलो। स्टेशन परिसर से बाहर निकल सुनसान में पहले तो प्लूटो को हल्का करवाया तब ऑटो वाले भाईया से पैसे की बात हुई 😂
और तब पहुँच गए जंग जीत कर ठिकाने 🤘


प्लूटो का छत वाला घर


दिल्ली आकर मुझे उसी दिन बिहार जाना था मगर टिकट कन्फर्म नहीं हुआ तो न जा पाया। नहीं तो जाना कैंसिल करता, पापा से सुनता 😟




ये गाँव में छोटी बहन भी एक लेकर आई पर माँ को कुत्तों सबसे ज़्यादा बिल्लियों से नफ़रत है। इसे नहीं रहने दिया माँ ने घर पर 😂

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इनके प्रोडक्ट बड़े महँगे आते हैं…










आज इसके लिए अपनी पुरानी ऊनी टोपी से सूट बना दिया इसका, मस्त लग रहा है एकदम साहब 😍
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ये थी प्लूटो की 30 नवंबर 2020 से 15 दिसंबर 2020 तक की कहानी… आगे देखिए क्या कुछ है…
जानवरों को रखने के लिए बड़ा हौसला और धैर्य चाहिए। मैं डिटेल में नहीं जा रहा, जो रखे हैं या कभी रखे होंगे वो जानते होंगे।
और मेरा प्लूटो ज़रा ख़ास है। यहाँ दिल्ली से 636km दूर से लेकर आना और एक ख़ुशनुमा सफ़र की शुरुआत, अहा! क्या ही कहने। घर वालों को लगता है पढूँगा नहीं इसी में लगा रहूँगा। कुछ हद तक वे सही सोच रहे मगर प्लूटो बड़ा हो जायेगा तब ज़्यादा टाइम इसको नहीं देना पड़ेगा। घर वालों (बिहार) को ये तो समझना ही चाहिए कि मेरे अंदर जितनी नकारात्मकता है वो सब प्लूटो निचोड़ के कूड़े के ढेर पर फेंक आयेगा। समझेंगे घर वाले एक दिन! नहीं भी समझे तो मुझे और प्लूटो को रत्ती भर भी फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला 💃💃💃 है कि नहीं प्लूटो ?
प्लूटो को मिलने वाले प्यार में कोई कमी नहीं यहाँ तक कि साथ रहने वाले रवि भाई को कुत्तों से नफ़रत है मगर प्लूटो को देख के वो भी 7.5 ग्राम पिघल चुके हैं। एक दिन रात को सोते वक़्त प्लूटो कान में मेरे बोला- “फ़िक़र नॉट, रवि ब्रो को पूरा पिघला दूँगा।”
सोशल मीडिया पर मुझसे जुड़े दोस्तों के लिए प्लूटो अहमियत रखने लगा है। मेरा हाल बाद में पहले प्लूटो को हाय हेल्लो किया जा रहा है। कोई ना, मैं, प्लूटो से अलग थोड़े ही हूँ।
प्लूटो के हाव-भाव, चाल-चलन की बात तो हुई ही नहीं, चाल चलन 😂😂 वो फ़िर कभी 🙂

शुक्रिया प्लूटो ❤ 🙂