18-19 दिसंबर 2023 🙂
जरूरी काम से एक दिन के लिए पटना आना पड़ा। आ गया। पहले से प्लान किए बिना कहीं जाना/पहुँचना ज्यादातर बारी सुखद होता है। ऐसा इसलिए कि फिर हमारा शातिर दिमाग पहले से कुछ भी सोच के नहीं रखता है, जब जैसा कुछ सामने आया रियेक्ट करते जाते हैं, सबकुछ ठीक-ठीक होता जाता है…
18 दिसंबर 2023 🙂


एक तो मैं बहुत जल्दी पहुँच गया एयरपोर्ट। चावल बना के दोपहर का खाना खा के भी आराम से एयरपोर्ट पहुँच सकता था मगर ये बातें एयरपोर्ट पर 2 घण्टे फालतू (?) का जब बैठे होते हैं तब क्लिक करती है।

भूख लग गयी थी। कुछ तो कुछ तो पनीर कुलचा जैसा ख़ुद को खिलाया मैंने जो कि खाने से ज्यादा देखने में अच्छा लग रहा था।
जल्दी पहुँच के मेडल मिलने वाला था मुझे 😐
क्या ही करता पूरा टर्मिनल-3 रौंद दिया पैरों तले… अच्छा लगता है, सुंदर सुंदर लोग दिखते हैं हँसते हुए भी और विदेश जाने वालों के घर वालों को रोते हुए भी दूर से देखना अलग जोन में ले जाता है मन को।



ख़ूब गाने सुने और वो गाने जो मैं 5-7 साल पहले सुनता था। सुना हुआ कोई गाना लम्बे अंतराल बाद आँख बंद करके सुना जाए तो बहुत कुछ पीछे का ध्यान आता है।








इंडिया के 3-4 एयरपोर्ट पर जाने का मौका मिला पर मुझे पटना के अलावे और कहीं भी रनवे के क़रीब ट्रैक्टर देखने को नहीं मिला 😀




पटना में दिल्ली से ज्यादा बहुत कुछ है। एक तो ठंड ज्यादा है साथ ही धुँआ के साथ साथ धूल का कॉकटेल, दिल्ली में कम से कम धूल तो कम है। (पटना में मेट्रो बनने की वज़ह से ज्यादा है धूल)
दूसरा, यहाँ दिल्ली से ज्यादा अपनापन है, इसलिए नहीं कि मैं बिहार से हूँ बल्कि यहाँ ऑटो वाले दिल्ली के ऑटो वाले से कम परेशान करते हैं।
एप्प बेस्ड व्हीकल सर्विस वालों का समझ नहीं आता। जब भी पटना आना होता इन्हें बुक करता हूँ तो जितना किराया एप्प पर बताया जाता है उससे ज्यादा की ड्राइवर लोग डिमांड करते हैं। अगर आप कम ज्यादा करके चलने को तैयार होते हैं तो कहेंगे राइड कैंसिल कर दीजिए हमलोग ऑफलाइन से चलेंगे। ये सही है इनलोगों का। कल जो बाइक वाले भईया थे उनको कहा कि भईया किसी बिहार वाले के साथ ये सब ठीक है करना मगर कोई दूसरे स्टेट का बच्चा/बच्ची आये सब तो इन सबसे बचना, दया करना उन लोगों पर जो अपने स्टेट में जाके बिहार के बारे में बताने वाले हैं।
पर एक बात पर मुझे ख़ुद हँसी आई, भईया बाइक चला रहे थे तो उन्हें ठंड ज्यादा लग रही थी। पहुँचने के बाद मैंने ऑफर किया कि चलिए चाय पीते हैं तो चाय के लिए फटाक से मना करके कहते हैं गुटखा के लिए पैसे दे दीजिए। हम बोले- भईया टाटा खत्म bye bye…
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19 दिसंबर 2023 🙂





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अब गांधी मैदान होते हुए एयरपोर्ट चलते हैं-












मधुबनी पेंटिंग्स 😍




















देखिए चीजें कैसे जुड़ती चली जाती हैं। ______ भईया ने मुझे गांधी मैदान से एयरपोर्ट पहुँचाया। पटना के ट्रैफिक की वज़ह से हमारे पास टाइम ही टाइम था। मैंने कल रात की बाइक सर्विस वाली बात भईया को बताया कि कैसा अनुभव रहा मेरा। बात होते होते पढ़ाई तक आयी और पता लगा कि भईया भी सिविल सर्विसेज के लिए लगे हुए हैं। बाइक राइडिंग हॉबी भी है तो शाम को 3 घण्टे बाइक सर्विस से जुड़ गए हैं। मेरे लिए दुआ करेंगे और रिजल्ट के बाद फाइनल लिस्ट में मेरा नाम खोजेंगे। आगे कहते हैं कि पटना आऊँ और कहीं आने जाने की दिक्कत हो तो इन्हें कॉल करके बुला लूँ।

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लौट के बुद्धू दिल्ली को आए 😢



एक 2020 का दिसंबर महीना था जिसमें BPSC का प्री देने नवादा गए थे (पोस्ट लिंक) और अब ये वही 2023 का दिसंबर महीना है। बीते 3 साल में बाहर से नहीं तो कम से कम आंतरिक तौर पर मेरी ही मनमाफ़िक मुझमें बदलाव हो गए हैं। बदलाव का ज़्यादातर हिस्सा तो इसी दिसंबर महीने में घटित हुआ है।
चीजें जब हमारी नियंत्रण में होती हैं तब उससे बने अवसर को भुनाने का भरपूर फायदा उठाने से चूकना नहीं चाहिए और ये भी कि चीजें हमारी नियंत्रण में होती नहीं हैं, हम ही उस लायक हो जाते हैं कि चीजें हमारी नियंत्रण में आने लगती है।
मैं दम्भ नहीं भरूँगा कि बहुत जगह घूम लिया हूँ, घूमा तो है पर अभी बहुत कुछ बाकी है …और और और सितारों के आगे जहाँ और भी है..
इन 2 दिनों में एक कविता लिखी, एयरपोर्ट पर बैठे-बैठे एक कहानी की रूपरेखा (एक ख़ूब बोलने वाला लड़का और एक बेहद चुप रहने वाली लड़की की कहानी जो एयरपोर्ट पर मिलते हैं) तय हुई, उस कहानी को जनवरी में लिखेंगे, अलग-अलग बैकग्राउंड के बहुत सारे लोगों को देखा, जिस काम के लिए आना था पटना वो काम बढ़िया से हो गया। अब दिसंबर के बाकी बचे दिन पहले से भी ज्यादा पढ़ने में बीते… ऐसी कृपा बरसे मुझपर !
टिप्स- कम्फ़र्टेबल जूते आपके सफ़र और सुकून में चार चाँद लगा देते हैं। सफ़र के दौरान लंबे समय तक अगर जूते पहनने हैं तो हमेशा अच्छे जूते लेकर चलें हाथ में

इब्नबतूता लिखते हैं- “यात्रा हमें स्तब्ध (आश्चर्यचकित) कर देती है और फिर हमें एक कथाकार में बदल देती है।“
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