🌥️ 2025 🌤️

2024 के आखिर में 69th BPSC का फाइनल रिजल्ट आया और फिर इस बार भी PDF में नाम नहीं था. हां, 68th के बजाय अबकी और कम नंबर से रह गया.

2025 की शुरुआत शांत रही थी, भीतर से शांत। न कोई मलाल न कोई ख़ुशी..न किसी के बंधन में रहा, न किसी को बंदिश में रखा। घर पर रहते हुए, घर का खाना खाते हुए, गांव-खेत घूमते हुए, कम बोलते हुए, ज्यादा सुनते हुए, आग सेंकते हुए, किताब पढ़ते हुए, थोड़ा कम मोबाइल चलाते हुए.. प्री के रिजल्ट के इंतज़ार में… 2025 की शुरुआत.

जनवरी

दिल्ली से दाना-पानी उठ गया था। किताबें लौटते-लौटते ठिकाने पर आ गईं।
70th मेंस की तैयारी
भांजा- गर्वित, भांजी- सान्वी
देश मेरे.. 🇮🇳

70th BPSC प्री हो गया.


फ़रवरी


मार्च

पवन भैया की शादी (मेरे से छोटे भाई-बहनों की शादी हो रही, पर कोई ना ये तो शास्त्रों में लिखा है कि जिसकी शादी पहले होगी वो बड़ा कहलाएगा)
जितना परेशान रवि मुंबई रहते हुए गर्वित को किया था, उसने सूद समेत वसूल लिया।
होली
रवि को कार चलाना सीखा देते हैं.


अप्रैल

सबकुछ करने आना चाहिए, भई
पटना, मेंस देने

गाम घर का भोज


मई

2nd फ्लोर
मेंस ख़त्म, अब मोतिहारी में घर का काम शुरू
नानी 🤩
लगभग हर संडे को दोनों आ जाते थे, घर बनवाने में मदद करने


जून

नाना-नानी, दूसरी मंजिल के ढलाई के समय


जुलाई

3rd फ्लोर
गर्वित का जन्मदिन, 5 साल का हो गया।


अगस्त


सितंबर

सिवान, 71th प्री देने
दुर्गापूजा


अक्टूबर

कांतारा


नवम्बर

गढ़ी माई, नेपाल
कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान


😍
उत्कर्ष की शादी, कानपुर
बनारस
खजुराहो
झांसी
ओरछा
दतिया
पटना
…वापस मजदूरी शुरू



दिसंबर

जो काम भईया करेगा वही ये छुटकी भी करेगी.
तेरे इश्क़ में
धुरंधर

हाहाहा

सैफ़ की बहन की शादी

गुगू, टुगु- पड़ोसी हैं, दिनभर में 50 बारी खिड़की पर आकर, हर आने-जाने वाले को अंकल-अंकल करते रहेंगे, कहेंगे कुछ नहीं।

इनकी मां नहीं रही, ठंड की वज़ह से. मोहल्ले के छोटे बच्चों ने एकदम सलीके से इनका ध्यान रखा है।
मई से शुरू हुआ काम अभी 2026 के भी मई तक जाएगा 😐

70th BPSC का मेंस भी नहीं हुआ और 71th प्री भी नहीं। कमी अपनी साइड ही रही होगी. कमी दूर करेंगे और ये उम्मीद कि सबकुछ अपनी जगह पर ठीक हो जाएगा..हो जाना चाहिए।

पूजा उपाध्याय (‘तीन रोज़ इश्क़‘ वाली) मैम लिखती भी हैं कि जल, वायु, अग्नि, आकाश, और पृथ्वी के अलावा, हम इंतज़ार के भी बने हैं।

दिलीप भैया (ट्विटर वाले) कहे भी थे 68th रिजल्ट के बाद-

कहते हैं कि समय से पहले और वक्त से ज्यादा किसी को नहीं मिलता। सच कहते होंगे। पर मुझे लगता है कि उन लोगो ने आदम ज़ात की दृढ़ शक्ति का नाम नही सुना होगा। ये मंत्र रट लो बस:”आज नहीं तो कल होगा, कल नहीं तो परसों, ये भी नहीं वो भी नहीं, जो मैंने चाहा है हू-ब-हू वही होगा।” पूर्ण वीराम।

2025 बीत गया, 2026 आ रहा है.. अगले 5 साल में हम लोग कहाँ होंगे ? हमारा जीवन किस रस्ते को चलेगा ? कौन जानता है ? कोई तो है जो जानता है.. कोई तो है।

“दो बारिशों के बीच” कविता संग्रह से राजेंद्र धोड़पकर की एक कविता है –

बीते हुए दिन

बहुत अच्छे दिन थे दिन जो बीत गए
बीते हुए दिन कौंधते हैं स्मृतियों में
प्रिय गंध की तरह, सड़कों पर बदहवास
भटकते हुए अँधेरे में, जो फेफड़ों में
झरता जाता है कोयले की धूल की तरह
बीते हुए दिन बहुत अच्छे दिन थे
छूटी हुई जगहों में बिताए हुए दिन
जगहें अच्छी थीं कितनी जो छूट गईं
लगातार असुरक्षा, अपमान और उदासी
रही होगी उन जगहों और दिनों में भी
यह सोचा जा सकता है
पर जैसे-जैसे दिन बीते हुए दिन होते जाते हैं
उनसे जुड़े हुए दुःखों की स्मृतियाँ घुल जाती हैं
धीमे-धीमे हवा में
अच्छे लगेंगे ये दिन भी जब ये भी बीते हुए दिन
हो जाएँगे
क्या मज़े की बात है कि अच्छे दिन होने के लिए
ज़रूरी है कि दिन
बीते हुए दिन हो जाएँ।


अब 2026 में कहाँ मिलेंगे ? मिलेंगे..मिलेंगे…. कहीं तो मिलेंगे 🙂

उत्कर्ष की शादी और बुंदेलखंड.

कानपुर. 22 नवम्बर 2025

‘ राजा जी के दिलवा टूट जाई ‘ गाने पर रवि का डांस 😘

श्रृष्टिउत्कर्ष

…उत्कर्ष अब शायद ही लिख पाएगा निष्कर्ष 🫢

सरकार को एक कानून बनाना चाहिए कि शादियों में किताबें दी जाएं और ली जाएं.. केवल और केवल किताबें.

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उत्कर्ष, रवि, पंकज और मेरी दोस्ती की शुरुआत- कोचिंग (2018) के दूसरे दिन मैं, रवि-पंकज के बगल वाली सीट पर बैठा। रवि-पंकज एक दूसरे को इलाहाबाद से ही जानते थे। इनसे परिचय हुआ और 1-2 दिन साथ बैठे.. फ़िर एक दिन मैं इनसे अलग होकर उत्कर्ष के साथ बैठा। उत्कर्ष की राइटिंग बहुत ही सुंदर है, मैंने तारीफ़ करी। फ़िर हम साथ बैठने लगे। एक दिन फ़िर रवि और पंकज की दोस्ती उत्कर्ष से करवाई। और सिलसिला जारी है तब से..

शुरू में रवि-पंकज नेहरू विहार में साथ रहते थे। उत्कर्ष गाजियाबाद से आता था, मैं अकेला वजीराबाद। लॉकडाउन के बाद रवि पंकज और मैं गांधी विहार में साथ रहने लगे। पंकज 1 महीना साथ रहा वो भी केवल प्लूटो को मुझसे दूर करने के लिए. प्लूटो प्लूटो प्लूटो ( https://worldofplu.wordpress.com ) याद है न ?  प्लूटो को भगाने के लिए पंकज आज तक प्लूटो को पसंद करने वालों से गालियां खाता है. बददुआएं पाता है. हाँ, मेरे घर वालों की नज़र में पंकज हीरा लड़का हो गया एकदम.

2018 😍

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बुंदेलखंड

23,24,25,26 नवम्बर 2025.

शादी के अगले दिन सुबह-सुबह खजुराहो (छतरपुर जिला) निकलना था मगर उत्कर्ष रोकते-रोकते 2 बजा दिया.

ख़ैर, खजुराहो से पहले महोबा जिले में पंकज के दूर की बुआ के यहां रुक गए.

महोबा से पहले, यही बेतवा नदी यमुना से मिल जाती है।

24 नवम्बर 2025-

महोबा जिला.

पंकज, नहीं नहीं श्री श्री 1008 पंकज जी महाराज कोंच जालौन वाले 🙏

बेहद सामाजिक प्राणी है, उत्तरप्रदेश के जालौन से हैं. मध्यप्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में इनकी रिश्तेदारी है या दोस्त रहते हैं, बाकी के आधे जिलों में ये रिश्तेदारी खोज निकालने की शर्तिया जिम्मेदारी लेते हैं।

खजुराहो ✨

– पश्चिमी मंदिर समूह

यह खजुराहो के उन कुछ मंदिरों में से एक है जहाँ आज भी पूजा होती है और भक्त नियमित रूप से दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसके गर्भगृह में स्थापित लगभग 2.5 मीटर (लगभग 8 फीट) ऊँचा विशाल शिवलिंग है। यह खजुराहो के मंदिरों में सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा शिवलिंग है।

कंदारिया महादेव मंदिर

मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है
इसका निर्माण 1025 ईस्वी से 1050 ईस्वी के बीच हुआ माना जाता है।
इसे चंदेल राजवंश के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक राजा विद्याधर ने बनवाया था।
यह नागर शैली की मंदिर वास्तुकला का शिखर माना जाता है।
यह खजुराहो के सभी मंदिरों में सबसे ऊँचा है, जिसकी मुख्य शिखर की ऊँचाई लगभग 31 मीटर (102 फीट) है।

  • जैन मंदिर समूह

श्रमदान का तात्पर्य मुख्य रूप से ‘श्रमदान हथकरघा’ पहल से है। यह एक सामाजिक और व्यावसायिक प्रकल्प है जो खजुराहो में जैन मंदिर परिसर के पास स्थित है।

यह पहल आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से महाकवि पंडित भूरामल सामाजिक सहकार न्यास के तत्वावधान में संचालित की जाती है।

श्रमदान का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन करना, विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और जेलों के बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना है। यह संस्थान युवाओं और ज़रूरतमंद लोगों को हथकरघा से कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षार्थियों को निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा के साथ मानदेय भी दिया जाता है।

यहाँ से कुछ लीजिए या नहीं पर इसे अंदर से देखिए ज़रूर 🙂

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बागेश्वर धाम 🙏

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25-26 नवम्बर 2025-

आज छतरपुर जिले (मध्यप्रदेश) से झांसी जिले (उत्तरप्रदेश) में जाना है।

देश का क़ाबिल युवा, सुबह-सुबह रिल्स देखकर आर्कटिक के ग्लेशियर को पिघलने से बचाने का काम करते हुए। इनका ये योगदान देखकर अंटार्कटिका के पेंगुइन सब ख़ून के आंसू रोएंगी।

झांसी के इस गरौठा तहसील के एक मंदिर से सुबह-सुबह मिथिला के सीताराम गाने बज रहे थे। पहले सोचा कि मंदिर के पुजारी मिथिला से होंगे। मगर जब शाम को ओरछा पहुंचा तब समझ आया कि आज तो विवाह पंचमी है और सुबह मंदिर में इसलिए मिथिला के गाने बज रहे थे।

पूछने पर कि गैस पर खाना नहीं बनता है क्या ? बुंदेली भाषा में आया जवाब शायद यही था कि ठंड में लकड़ी पर ही बनाते हैं.

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झांसी

श्री सखी के हनुमानजी महाराज 🙏

यह मंदिर इसलिए अद्वितीय है क्योंकि यहाँ भगवान हनुमान स्त्री (सखी) वेश में विराजमान हैं। उन्हें सखी (राम और सीता की सहेली या सेवक) के रूप में पूजा जाता है।
स्वरूप: मूर्ति स्त्री वेश में है, लेकिन परंपरा के अनुसार उनके दोनों हाथों में गदा (Hanuman’s Mace) धारण की हुई है।

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झांसी का किला

यह वह जगह मानी जाती है जहाँ से रानी लक्ष्मीबाई ने 1858 में अंग्रेजों से घिर जाने के बाद, अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बाँधकर, अपने घोड़े बादल के साथ किले की दीवार से नीचे छलांग लगाई थी।
यह छलांग लगभग 30-40 फीट की ऊँचाई से थी।

अब चलते हैं ओरछा (जिला-निवाड़ी, मध्यप्रदेश)

संयोग देखिए, आज विवाह पंचमी है और यहां के राजा राम मंदिर में भव्य विवाह समारोह का आयोजन होता है।

राजाराम मंदिर, ओरछा धाम

चतुर्भुज मंदिर
ओरछा का राजाराम मंदिर दुनिया का शायद एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है, न कि केवल देवता के रूप में। यह मंदिर मूल रूप से एक महल था।


भगवान राम के राजा बनने की कहानी

यह सबसे प्रमुख और सबसे प्रसिद्ध कथा है, जो 16वीं शताब्दी में ओरछा के बुंदेला शासक महाराजा मधुकर शाह और उनकी रानी गणेश कुँवरी से जुड़ी है।



महाराजा मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे, जबकि उनकी रानी गणेश कुँवरी राम भक्त थीं।
एक बार महाराजा ने रानी से वृंदावन साथ चलने के लिए कहा, लेकिन रानी ने मना कर दिया क्योंकि वह भगवान राम की भक्ति में लीन थीं।
क्रोध में आकर महाराजा ने रानी को यह चुनौती दी “अगर तुम इतनी बड़ी राम भक्त हो, तो अपने राम को ओरछा में लाकर दिखाओ।”


रानी ने यह चुनौती स्वीकार की और अयोध्या चली गईं। उन्होंने कई महीनों तक सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की। जब भगवान राम के दर्शन नहीं हुए, तो निराश होकर रानी नदी में कूद गईं।
तब, भगवान राम ने बाल स्वरूप में रानी की गोद में दर्शन दिए।
जब रानी ने उनसे ओरछा चलने का आग्रह किया, तो भगवान राम ने तीन शर्तें रखीं:

    पहली शर्त: मैं यहाँ से जाकर जिस जगह बैठ जाऊंगा, वहाँ से फिर नहीं उठूंगा।

    दूसरी शर्त: ओरछा में मेरे राजा के रूप में विराजमान होने के बाद, किसी और की सत्ता नहीं रहेगी, और राज्य पर केवल राम का ही राज होगा।

    तीसरी शर्त: मैं बाल रूप में पैदल साधु-संतों के साथ ओरछा चलूँगा।


रानी ने शर्तें मान लीं और भगवान राम की बाल रूप प्रतिमा लेकर ओरछा आईं। इस बीच महाराजा मधुकर शाह ने रानी के लिए पहले से ही भव्य चतुर्भुज मंदिर का निर्माण शुरू करवा दिया था।
  ओरछा पहुँचने पर, रानी ने प्रतिमा को चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करने से पहले, उसे अपने महल के रसोईघर में (या विश्राम स्थल पर) रख दिया।
जब बाद में रानी ने प्रतिमा को चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करने का प्रयास किया, तो शर्त के अनुसार, प्रतिमा को अपनी जगह से नहीं हटाया जा सका (चूँकि उनकी पहली शर्त थी कि वह जहाँ बैठ जाएंगे, वहाँ से नहीं उठेंगे)।
तब से, रानी का वह महल ही राम राजा मंदिर बन गया और राम की प्रतिमा वहीं पर राजा के रूप में स्थापित हो गई। चतुर्भुज मंदिर आज भी खाली है, जिसका उपयोग अन्य धार्मिक कार्यों के लिए होता है।




गार्ड ऑफ ऑनर (सशस्त्र सलामी): यह दुनिया का एकमात्र मंदिर है जहाँ भगवान राम को एक राजा के रूप में पूजा जाता है और उन्हें प्रतिदिन मध्य प्रदेश पुलिस के सशस्त्र जवान द्वारा सूर्योदय और सूर्यास्त पर गार्ड ऑफ ऑनर (सशस्त्र सलामी) दिया जाता है।

आज भी ओरछा के राजा: ऐसी मान्यता है कि ओरछा राज्य पर आज भी भगवान राम का ही शासन है। महाराजा मधुकर शाह ने स्वयं उन्हें अपना राज्य सौंप दिया था, इसलिए राम को यहाँ “राजा राम सरकार” कहा जाता है।



अयोध्या से संबंध: कुछ कथाओं के अनुसार, अयोध्या और ओरछा का संबंध करीब 600 वर्ष पुराना है। भगवान राम ओरछा में राजा के रूप में दिन में विराजते हैं और माना जाता है कि वह रात्रि विश्राम के लिए अयोध्या जाते हैं।

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26 नवम्बर 2025

ओरछा, झांसी से अब चला जाए बुंदेलखंड रीजन के मध्यप्रदेश के दतिया जिले..

दतियाग्वालियर हाइवे के बगल में स्थित बड़ौनी तहसील
गुप्तेश्वर महादेव जी 🙏, बड़ौनी

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यह एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थापित है। ‘गुप्तेश्वर’ नाम का अर्थ ही है “छिपे हुए ईश्वर” या “गुप्त देवता”, जो गुफा में स्थित होने के कारण सार्थक है।
यहाँ स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू (यानी स्वयं प्रकट हुआ) माना जाता है.

कहते हैं कि समय के साथ शिवलिंग की ऊँचाई बढ़ती जा रही है.

सोनागिर, जैन तीर्थ स्थल, दतिया

यह माना जाता है कि इस स्थान से लगभग आठ करोड़ जैन मुनियों ने मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त किया था, जिनमें से नंगानंद मुनि सबसे प्रमुख थे। इसलिए यह सिद्ध क्षेत्र कहलाता है। यह ‘स्वर्ण पर्वत’ (Golden Peak) के नाम से भी जाना जाता है और जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थान है।

गुड़+इलायची+दूध पियो, चाय में तो डायबिटीज रखा है..
इंटीरियर

माँ पीताम्बरा के दर्शन कुछ प्रतिबंधों के साथ होते हैं। माँ के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से ही होते हैं, जो यह दर्शाता है कि देवी की शक्ति को आसानी से नहीं देखा जा सकता।

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27 नवम्बर 2025

वापसी की जाए अब..

बनारस ✨

आज भाई का जन्मदिन भी है.

यह मंदिर किसी विशिष्ट देवी-देवता की मूर्ति या पूजा के लिए नहीं है।

यह मुख्य रूप से योग और ध्यान (मेडिटेशन) के लिए समर्पित है। इसे विश्व का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र कहा जाता है।

इसका निर्माण विहंगम योग संत समाज द्वारा किया गया है और यह उनके संस्थापक सद्गुरु श्री सदाफल देव जी महाराज द्वारा लिखित आध्यात्मिक ग्रंथ ‘स्वर्वेद’ को समर्पित है।

सारनाथ

भारत कला भवन, वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के परिसर में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संग्रहालय है। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय संग्रहालयों में से एक है, जो भारतीय कला और पुरातत्व के व्यापक संग्रह के लिए जाना जाता है।

इसकी स्थापना 1920 में प्रसिद्ध कला इतिहासकार और विद्वान राय कृष्णदास ने की थी। बाद में यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का हिस्सा बन गया।

गांव के ही अर्जुन भाई MA में एडमिशन लिये हैं, उनसे भी मिलना हो गया।

नॉर्मल दिनों में भी इतनी भीड़ है तो किसी विशेष आयोजन के लिए आई भीड़ का अंदाजा लगा लीजिए, साथ ही रिल्स वाले प्रजाति तो कांस्टेंट हैं ही रोज.
चप्पल नहीं पहननी थी mantuye

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28 नवम्बर 2025

पटना 💕

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29 नवम्बर 2025

मोतिहारी 🌄

केसरिया बौद्ध स्तूप

एक और शादी…. मां के मामाजी की लड़की की शादी

प्रिया-अखिलेश

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हासिल

मां के लिए बनारस से साड़ी, भांजी के लिए छतरी, ओरछा किले के नींबू, ईशा फाउंडेशन का पंचरूखी रुद्राक्ष और किताब, खजुराहो के हस्तनिर्मित तौलिया, पीताम्बर शक्तिपीठ का कलावा और और और….. और भी बहुत कुछ !

अगली बार किसी समन्दर किनारे मिलते हैं, ज़्यादा मुमकिन हो कि पुरी (ओडिशा) के किनारे से पहली बार समन्दर को देखा जाए…    देखते हैं, चलते हैं….क्या तय होता है.. क्या रखा है आगे..

गली बॉय फ़िल्म का एक गीत है- ट्रेन सॉन्ग… सुने हैं ? सुनिए 🙂

हैदर अली जाफ़री कहते हैं—

आए ठहरे और रवाना हो गए
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है.          🙃

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बनारस 💫

पहली बार बनारस आने का मौका मिला था 2015 में, जब छोटे भाई का एडमिशन BHU में होना था। हालांकि कॉलेज होस्टल न मिलने की वज़ह से मैंने कहा था कि भाई मत पढ़ इसमें। भाई ने एडमिशन वापस ले लिया और आज तक इस टॉपिक पर बात होती है तो कहता है कि मेरी वज़ह से वो BHU में नहीं आ पाया। अब मैं कहता हूँ कि भाई BHU में आ गया रहता तो मोतिहारी के महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी का अपने बैच का टॉपर कैसे बनता ? और राष्ट्रपति को क़रीब से देखने को मौका मिलता ?

मन्टू कहानी कम से कम बता फ़ोटो शेयर कर ज्यादा से ज्यादा.. ok ok.

20, 21, 22, 23, 24 जनवरी 2024 🙂

20 जनवरी 2024-

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21 जनवरी 2024

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22 जनवरी 2024


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23 जनवरी 2024

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24 जनवरी 2024

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ख़त्म

अपनी मन की सुनिए। मन कभी भी टेढ़े रास्ते पर नहीं ले जा सकता। आप दृढ़निश्चयी हैं तो मन की औकात ही नहीं कि कभी हमें उलझन में डाल दे। हाँ, वही मन जो हमारे बेहतरी के लिए प्रेरित करता है तो वही मन कभी हाथ भी खड़े कर देता हैं। पर यकीन मानिए कि संतुलन साधना सीख गए, किसी से पूछने की ज़रूरत नहीं कि संतुलन कैसे साधे, मन बख़ूबी जानता है, तो आप अपने मन की स्वच्छंदता भी ख़ुशी-खुशी स्वीकारेंगे। एक्सेप्टेंस/स्वीकार्यता बहुत ही बड़ी चीज है। मन को कभी-कभी हाथ खड़े करने भी दीजिए, बहकने दीजिए उसे, बहक के जब वापस लौटेगा तब उसे उस आयाम का आभास होगा जिधर जाने के लिए नियति ने तय किया है। समझे आप ? मैं भी समझ रहा हूँ अभी ये सब। नियम में मत बंधिए। अपवाद कभी भी नियम नहीं होता है।

प्रकृति और अपने स्व के ख़िलाफ़ जाकर कुछ भी करना हमें हमारे प्रारब्ध के मार्ग में ऐसी मुश्किलें खड़ी करता है जिसके लिए हमारे जन्म चक्र से मुक्ति का मार्ग और दूर होने लगता है, समझ नहीं आ रहा है ? लोड मत लीजिए वो कीजिए जो आपका मन चाहता है, फिर समझ जाएँगे, अभी भी नहीं समझ आ रहा ?

😉

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उस व्यक्ति के पास सबकुछ आ जाता है जो ये जानता है कि इंतज़ार कैसे किया जाता है ~ लियो टॉलस्टॉय

❣️

और

है कौन विघ्न ऐसा जग में,
टिक सके आदमी के मग में?
ख़म ठोंक ठेलता है जब नर
पर्वत के जाते पांव उखड़,
मानव जब जोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है। ~ दिनकर 🙏

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फरवरी में 10-18 फरवरी तक प्रगति मैदान में वर्ल्ड बुक फेयर लग रहा है। वहाँ मिलना होगा अब। बहुत सी किताबों तक मेरी पहुँच होगी तो कईं ख़ास लोगों से मिलना भी होगा, और महीना भी तो फरवरी का है भई 😉


2024 की शुरुआत..

01 जनवरी से 12 जनवरी तक 🙂

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1 जनवरी 2024 ❣️

साल की शुरुआत ही शिकायत से हुई। रात को पटाखे बजने की आवाज़ से नींद खुली और उठ के सोचा कि दिल्ली वालों कब सुधरोगे…रात में पुलिस वैन भी आई तब सुधरे हैं दिल्ली वाले, वो भी केवल 10 मिनट के लिए, 10 मिनट बाद पुलिस गयी और इनके पटाखे फिर आसमान में फूल खिलाने लगें..

1 जनवरी को दिल्ली में धूप थी। हम तीनों भाई बहनों का छत पर पिकनिक मना, गाँव होते तो घर के पीछे खेतों में खाना बनता। पर ठीक है, इस बार दिल्ली में नए साल की शुरुआत…

सबसे छोटी बहन स्नेहवा, (स्नेहा कुमारी) ख़ूब बोलती है और ख़ूब खाती है।
आज ही पटना निकलना है, निकल रहे, 5 घण्टे बाद पटना रहेंगे।
लाइटिंग अच्छी हो तो फ़ोटो अच्छी आती है या चेहरे पर चमक होती है तो आप ऑटोमैटिक वहाँ पहुँच जाते हैं जहाँ लाइटिंग अच्छी होती है ? बताइए ? समझे ?
एयरपोर्ट पर फैमली वीडियो कॉल, दिनभर का सबसे ज़रूरी काम, आदित्य राज, छोटा भाई

पटना के ऊपर
पटना के नीचे 😐
प्रतीक भाई के कमरे पर पहुँचने के बाद देखा कि प्रतीक भाई अपना रूम मेरे लिए बढ़िया से सही करके वे ख़ुद पास वाले कमरे में शिफ्ट होने वाले हैं अगले 10 दिन। रवि को ये फोटो भेज के ये सब बताया, रवि का पहला रिप्लाई आता है- भाई तू प्रतीक भाई से इत्ता कर्ज ले रहा है चुका पाएगा कभी। मैंने कहा कि भाई ये ख़ुशी ख़ुशी कर्ज दे रहे हैं, मैं ले नहीं रहा और क्या पता मेरे बहाने प्रतीक भाई को कोई पिछला बकाया चुक रहा हो।

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2 जनवरी 2024 🙏

प्रतीक भाई एक बेहतरीन फ़िल्म डायरेक्टर बनेंगे… शायद !
पटना में ऐसा दिखना बहुत ही रेयर है, मेरे हिसाब से

कल से मेरा 69th BPSC का मेंस है और मैं डंकी देखने आया हूँ वो भी मैंने रिक्वेस्ट किया कि चलते हैं भाई, मौका मिल रहा।

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3 जनवरी 2024 💕

आज से युद्ध शुरू है 69th BPSC मेंस का

आज का पहला पेपर हिंदी क्वालीफाइंग है।

चारों पेपर के दिन प्रतीक भाई व्यस्त रहने के बावजूद मेरे रूम पर पहुँचने से पहले खाना बना के तैयार रहते थे।

कोई है, जिसके लिए मैंने घर बनना चुना है, शायद शायद शायद ही कुछ

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4 जनवरी 2024 🍁

आज से असली युद्ध शुरू है, आज GS 1 का पेपर है और मेरा जन्मदिन भी 🕺

जन्मदिन ख़त्म, सेलफोन का DND- do not disturb वाला फीचर एकदम से वरदान साबित हुआ मेरे लिए, आज के दिन के लिए 🤣 😐

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5 जनवरी 2024 🤟

आज GS 2 का पेपर

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6 जनवरी 2024 😌

मेरा मेंस कल ही ख़त्म हो गया क्योंकि आज essay का पेपर है और इसमें तो मुझे लगता कि दिनभर बैठा के लिखवाया जाए तो मैं मना नहीं करूँगा (मन्टू, ई ज्यादा हो गया) ok.ok

मेंस खत्म अब 9 जनवरी को 68th BPSC का इंटरव्यू

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7 जनवरी 2024 😎

आज खान सर के कोचिंग में मॉक इंटरव्यू है। मैं दिल्ली से सोचते आ रहा हूँ कि खान सर को देखते ही मेरे हँसी निकल जायेगी, भगवान-अल्लाह का शुक्र है कि बोर्ड मेंबर में खान सर नहीं थे 😐

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8 जनवरी 2024 🎶🎶

आज पूरे दिन गाने सुने फिर गानों से बोर होके फिर गाने सुने, समझ गए ना आप ? समझिए

आज खान सर का कॉल आया कि इंटरव्यू के लिए मेरी तैयारी ठीक है। आदेश आया कि सेलेक्शन के बाद मिठाई लेके मिलूं सर से, (हंसी पर कंट्रोल करना पड़ेगा सर को देखते हुए)

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9 जनवरी 2024 💌

आज इंटरव्यू है और अपुन तैयार है पहाड़ चढ़ने को

पापा, नवीन जी और संदीप भईया मोतिहारी से आ गएँ।

इंटरव्यू अच्छा गया, चेहरे की चमक बता रही है, कहने की ज़रूरत नहीं है। *aham* *aham*

अब अब, मुझे घर बुलाता है 😍

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10 जनवरी 2024 🌼

माई 😍

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11 जनवरी 2024 💥

माई पापा, 12th फेल मूवी देखते हुए
सबसे छोटी मौसी के घर

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12 जनवरी 2024 🤗

श्रीपाल भाई, जोधपुर 🤗
😍

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【ये 2024 का केवल ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है दोस्त !】

पाश लिखते हैं-

धूप की तरह धरती पर खिल जाना

और फिर आलिंगन में सिमट जाना

बारूद की तरह भड़क उठना

और चारों दिशाओं में गूंज जाना –

जीने का यही सलीका होता है

मैं कहता हूँ गुनगुनाते हुए- हम देखेंगे, लाज़िम है कि हम भी देखेंगे…

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