70वीं गणतंत्र दिवस-2019

इसबार बहुत कुछ पहली बार हुआ

-असम राइफल्स की पूरी महिला टुकड़ी ने मार्च किया।

-थल और नौसेना की टुकड़ी को महिला ऑफिसर ने लीड किया।

-टैंक T-90 का प्रदर्शन।

-बायो फ्यूल से प्लेन उड़ाए गएँ।

बैंड में ‘शंखनाद’ वाद्य यंत्र का इस्तेमाल।

इस साल हम गाँधी जी की 150वीं जयंती मना रहे हैं।जिन-जिन प्रान्तों में गाँधी जी ने जो भी योगदान किया, उसी की प्रस्तुति सांस्कृतिक झाँकियों में दिखाई गई।

दोस्त जब विदेश मंत्रालय में हो….

सुबह के 4 बजे ऐसे दिखता है इंडिया गेट, हाँ सुबह के चार बजे

हेलीकॉप्टर से बरसाया गया फूल मेरे हाथों में भी आया।

पहली बार ‘आज़ाद हिंद फ़ौज’ के सैनिक शामिल हुए परेड में, 4 सैनिक थे जिनकी उम्र 90 साल से ज़्यादा है।

केन्द्रीय विद्यालय, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

सिक्किम की झाँकी

महाराष्ट्र

अंडमान एंड निकोबार, सेलुलर जेल

असम

त्रिपुरा

पंजाब

तमिलनाडु

गुजरात

जम्मू और कश्मीर

कर्नाटक

उत्तराखंड

दिल्ली

उत्तरप्रदेश

पश्चिम बंगाल

ऊर्जा मंत्रालय

स्वच्छता मंत्रालय

🙂

रेलवे

कृषि मंत्रालय

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता-2019

मोटरसाइकिल पर करतब

मेरे नए दोस्त-महाराष्ट्र से विकास पाटिल जी हैं साथ में, इंडियन नेवी में चयनित हुए हैं हाल ही में 🙂

लोगों के हाथ देश के प्रधानमंत्री के हाथों के क़रीब जाते हुए

घर चलो रे…भूख लगी है !

कुछ न भुलाए जाने वाले लम्हें

मुझे ध्यान नहीं रहा और मैं बैग लेकर चला गया, बैग अंदर लेकर नहीं जा सकते। चाय की दो दुकान पर न चाहते हुए चाय पीनी पड़ी ताकि पैसे देते वक़्त बैग रख सकूँ उनकी दुकान पर। लेकिन मना कर दिया, प्रशासन ने उन्हें मना कर रखा था। तो 2 km दूर पेट्रॉल पंप के ऑयल बॉक्स में बैग को छुपाया।

-21 तोपों की सलामी, पहली आवाज़ आते ही मैं अनहोनी समझ के डर गया और पहली पाँच आवाज़ तक कांपता रहा जिसे केवल मैं महसूस कर सकता था।

भारतीय वायु सेना के 3 SU-30 MKI विमान त्रिशूल आकार में आगे बढ़ते हुए।

AN-32 aircraft flying in ‘vic’ formation.

-Five MiG-29 upgrade air superiority fighters.

900km/h की रफ़्तार से आकाश को चीरते हुए वर्टिकल चार्ली के साथ सुखोई-30 MKI विमान आते हुए।

भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा गुब्बारों का छोड़ा जाना।

एक 12 साल की दुबली-पतली लड़की जिसका नाम था ‘गुँजन’, खाना न खा पाने और भीड़ की वज़ह से पहले चक्कर आया उसे फ़िर बेहोश होने लगी, अपनी दीदी से बिछड़ गई थी।मैंने और एक मैम ने गुँजन को होश में लाया, उसके पैर के तलवे रगड़े, 2 घण्टे बाद गुँजन की हालत में सुधार हुआ। 2 घण्टे बाद उन मैम का हाल भी ख़राब, फ़िर गुँजन और मैं मिल के उन्हें संभाला। इसके बाद मेरा ही नम्बर था, हाहाहा… पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, मेरे साथ हो ही नहीं सकता ऐसा कुछ 😎

🙂

आख़िरी विदा-2018 और आगमन-2019 :)

जो वादे कर लिये जाते और पूरे नहीं होते तो दिल किसका दुखता है, वादा करने वाले/वादा के लिए इंतज़ार में बैठने वाले का या वादा नहीं निभाने वाले का?

ख़ैर, मैंने वादा किया था गुजरात मिलेंगे हम, वर्ल्ड बुक फेयर 【5-13 जनवरी 2019】से पहले।

गुजरते साल और नए साल पर पहले हिमाचल के एक पहाड़ी गाँव जाना तय हुआ था, पर केंसिल हो गया क्योंकि मुझे जाना था रण ऑफ कच्छ 🙂

कोचिंग वालों का एक महीने पहले ही अगले एक महीने का टाइम टेबल आ जाता है【दृष्टि-the vision, इनका मैनेजमेंट वाक़ई काबिलेतारीफ़ है】टाइम टेबल से पता चला गया कि 31 dec और 1 jan को ऑफ रहेगा, 2 दिन मैं छुट्टी लेता और रण ऑफ कच्छ जाता। 30 dec को भी कोचिंग ऑफ करना पड़ा दिल्ली प्रशासन का आर्डर आ गया था। नए साल की भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है सरकार के लिए तो उन जगहों पर छुट्टी घोषित की गई इस बार जो भीड़ भाड़ वाले इलाके हैं दिल्ली में। सही हुआ, 2 दिन की छुट्टी जो मैं ले रहा था अब एक दिन(2 jan) की ही होगी।वो भी तकनीक इतनी आगे है कि मैं दूर होते हुए भी क्लास में ही प्रेजेंट रहूँगा 🙂

तो शुरू करें सफ़र… चलो…

🙂

पुरानी दिल्ली स्टेशन के लिए रिक्सा लिया। पता नहीं मुझे क्यों रिक्सा पर चढ़ना पसंद नहीं पर मजबूरी में चढ़ना पड़ता है कभी कभी। आख़िरी में जितना भी किराया बैठता है उसमें मैं 10₹ जोड़ के देता हूँ।

ये तस्वीर ले रहा था तो सिक्योरिटी गार्ड(परिमल जी,बागपत से) कहते हैं रेल नहीं देखी पहले ? मैं कहता हूँ ब्लॉग जानते हैं आप ?वो कहते हैं नहीं मैं कहता हूँ मैं भी पहली बार देख रहा हूँ रेल, दोनों हँसते हैं और फ़िर वो कहते हैं क्या करते हो ? मैंने कहा घूम घूम के फ़ोटलेता हूँ,पढ़ भी लेता हूँ 🙂

छुक छुक छुक छुक रेलगाड़ी

स्टेशन पर जाते ही मेरे कदम इस ओर बढ़ने लगते हैं,यक़ीन मानो इस बात का

टोमैटो सूप और नया भारत 🙂

गुड़गाँव से बाहर निकलते ही ऐसा नज़ारा आम हो गया। एक ‘दोस्त’ ने बताया कि पूरे रेलवे ट्रैक के किनारे ऐसा दिखना ही है इस मौसम में, ये बात मुझे बाद में ध्यान आया।

अलवर और जयपुर के बीच

स्टेशन का नाम-चिरई

भोजपुरी में पक्षी को चिरई कहा जाता है।

लोग बाग धूप सेंक रहे हैं,पीछे कोई ज़हर उगल रहा है।

भुज रेलवे स्टेशन पर उतर कर सूरज से आँख मिलाते हुए।

🙂

चाय के कप हाथों में

स्वेता दी, जिनकी सूझ बूझ से मुझे 31 dec को ही रण ऑफ कच्छ जाने का मौका मिला और अहमदाबाद घूमने के लिए 1 दिन एक्सट्रा।

लो सफ़र शुरू हो गया।

छोटू मैग्नेटिक फील्ड

🙂

ये गोविन्द भाई, 50₹ में किराए पर दूरबीन देते हैं आप जितनी बार मना करेंगे उतनी बार 10-10₹ कम करते करते 10₹ में दूरबीन दे देंगे।

भुट्टा नहीं व्हाइट रण देखो

देवाराम जी 🙂

ये अपने दादा और पिता जी से गाना-बजाना सीखा है, जैस तस्वीर में इनका पोता है, वो भी सीख जाएगा।

मिलिए, ताज़ अली से(मुश्किल से नाम बताया अपना) मैंने इन जनाब की फ़ोटो लेनी चाही तो मुँह छूपा लिया जैसे कि इनके पिता जी ने मुझे भेजा हो कि देख आओ मेरा बेटा चाय बेच रहा है या मोबाइल में घुसा हुआ है

ब्लैक हिल पर अपनी हाज़िरी लगवाते हुए

…वाक़ई, जैसा सोचा होगा वैसे फ़ोटो आयी नहीं है।

रब जी से मिलिए, 10₹ में साफ़ा के लिए रंगीन कपड़ों का भंडार है इनके पास। सभी जन फ़ोटो खिंचाने के लिए ही लेते हैं फ़िर वापस कर देते हैं।

ख़फा है कोई दुनिया से…

असदुल्लाह भाई से मिलिए, मैंने पूछा इनसे ठंड में लोग सोडा पीते है ? ख़ाली बैठे थे, ज़वाब देते हैं “तभी तो बैठा हूँ यहाँ” मैं आगे निकल गया फ़ोटो लेने के लिए

गन्ने का जूस,

*इन भईया का नाम पूछना ही भूल गया।

दिल्ली चलोगे ?

काँधे तक आया है मेरे ये

माइक हाथ में लिये ‘तुम तो ठहरे परदेशी’ मदन जी गा रहे हैं, दाद देने वाले दोनों उस्तादों का नाम अल्ताफ़ और अज़ताब है।

ये माइक शानदार लगी। इसी में स्पीकर है, चार्ज हो जाती है, पेन ड्राइव लग जाता है। बस ऑन करके गाना गाइए और आस पास वालों को सुनाइए।

मदन जी मेरे पूछे सवाल पर कहते हैं “हाँ,500 ₹ का है, दिल्ली में मिल जाएगा।”

स्वीट कॉर्न

दूरबीन वाले एक और गोविंद जी से मिलिए-एक दिलचस्प वाकया बताऊँ, मैंने 3 दूरबीन वाले लड़कों से उनके नाम पूछे, तीनों ने ही अपना नाम ‘गोविंद’ बताया। जब स्वीट कॉर्न खा रहा था तब ये गोविंद भी दूर दिखा। इशारे से मैंने इसे दूरबीन ऊपर उठाने को कहा और पास बुलाके पूछा अपना असली नाम बताओ। “फ़ारूख़” तब समझ आया कि ड्राइवर भईया कच्छ को मिनी पाकिस्तान क्यों कह रहे थे कार में। फ़ारूख़ कहता है पैसे दो फ़ोटो लिये हो। मैंने कहा पढ़ते हो? फ़ारूख़ कहता है हाँ,सातवीं में,मैंने कहा 7 का पहाड़ा सुनाओ, और फ़ारूख़ का झूठ पकड़ा गया। फ़ारूख़ सलमान ख़ान का फैन निकला, इसे “हैंगओवर” गाना पसंद है। मुझसे कहता है भाई कार शेयर करके आये हो कार तक जल्दी पहुँच जाना नहीं तो वो छोड़ के भाग जायेंगे आपको।मैं कहता हूँ “अभी छोटे हो पढ़ाई करो और दुनिया पर विश्वास भी

विजय भईया(ड्राइवर) वहाँ के सभी दुकान पर जाके ख़ुद ही काम करते हैं। कॉफ़ी मस्त बनाई थी इन्होंने।

आख़िरी डूबते सूरज को देखने के लिए व्हाइट रण जाते है।

नमक के रेगिस्तान में पानी और एक प्यासा भी।

रण उत्सव

सूरज कितना अकड़ रहा है या कोई और ?

2018 दुखदायी था या 2019 होने वाला है इनके लिए?

अहमदाबाद, साबरमती नदी

अज़मेर के बाद ये शहर सही लगा।

अमर भईया, नेपाल के लुम्बिनी से है। इंडिया के लगभग सभी शहरों में रह के काम किया है इन्होंने।

अगली बार बिहार जाना हुआ तो इनके पहाड़ी गाँव जाना तय है 🙂

चंपारण

गाँधी जी की कर्मभूमि है चंपारण(मोतिहारी)

तोते के इस जोड़े का ठिकाना देखिए

संजना,रोशनी,पूजाराम 🙂

आश्रम के बच्चे छुट्टियाँ मना रहे हैं।

नाम कुछ भी हो, मज़ा आ गया खाके इसे।

दुकानदार अंकल से मैं जाते ही बोला, समोसा-कचौरी है। वो गुजराती में बोलते हैं और मुझे लिस्ट की तरफ़ इशारा करते हैं, मैं उन्हें बिहार की तरफ़ इशारा करता हूँ। तब जाके वो अपनी मर्जी से ये आर्डर किया मेरे लिए।

कांकरिया लेक,अहमदाबाद

Zorbing Balll–पहली बार देखा, जाना….

….और कर भी लिया

भावनगर के किसी स्कूल के नेकदिल बच्चे 🙂

मेला ख़त्म

अब्दुल्ला भाई से मिलिए,अहमदाबाद से हैं।देवबंद यूनिवर्सिटी में अपनी धार्मिक क़िताबों को अँग्रेजी में अनुवाद करते हैं और आगे ग्रेजुएशन करना कहते हैं।अहमदाबाद में NGO भी चलाते हैं साथ में बिजनेस भी करते हैं dealing with all type of scrap. 🙂

शुक्रिया 🙂

ट्वीटर की दोस्त हैं ‘महुआ’ कहती हैं-
यादों से तारीख़ बनती है न
याद बनाइये,तारीख और दिन
यादगार बन जायेगा…:)

सफ़र शानदार रहा, दुनिया पर विश्वास करने की मेरी ख़ूबी/कमी के और क़रीब पहुँच गया। कुछ ऐसे लोग मिले जो जीवन भर मेरा हाथ न छोड़ेंगे 🙂

तो अब वर्ल्ड बुक फेयर में मिलते हैं।

शायद, उसके लिए ब्लॉग न लिख पाऊं 🙂

…सर चढ़ के बोलता है उर्दू जबां का जादू

5th Jashn`e`Rekhta

Celebrating Urdu-2018

14-15-16 दिसंबर, 2018

मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, नई दिल्ली

जैसा कि मैंने वादा किया था साहित्य आजतक-2018 में कि हम जश्न रेख़्ता में मिलेंगे।

मैं रविवार को फ़्री रहता हूँ तो सोचा था 16 दिसंबर को जश्न रेख़्ता में जाऊँगा। 16 दिसंबर को ही बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन का प्री का एग्जाम होना था जिसकी वज़ह से कोचिंग वालों ने 15 दिसंबर को ऑफ कर दिया और मुझे दो दिन जाने का मौका मिला जश्न रेख़्ता में 🙂

प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन से बाहर निकला तो एक मैडम मिली, उन्होंने ने बाएँ बाँह पर ख़ूबसूरत तिरंगा लगाया और बोलती हैं “हम दिव्यांगों के मदद के लिए फॉउंडेशन चलाते हैं आप कुछ डोनेट कीजिए” मैंने पर्स से 20₹ निकाला तो कहती हैं कि मिनिमम 100₹ डोनेशन अमाउंट है। मैंने कहा “मैं अभी पढ़ता हूँ, कमाता नहीं हूँ” तब उन्होंने अपना मिनिमम डोनेशन अमाउंट को 20₹ कर दिया 🙂

पहला सेशन जावेद अख़्तर-शबाना आज़मी जी का।

जावेद साहब कहते हैं कि मुश्किल ज़बान में लिखना सबसे आसान है और आसान ज़बान में लिखना सबसे मुश्किल।

कम्युनिस्ट झुकाव वाले लेखक, कवि बॉलीवुड में क्यूँ गए इसका जवाब इस सेशन में मिला।

कुछ याद आया..

ये मैं सीख के आया हूँ, बनाऊंगा 🙂

…बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ

चच्चा, हर ख़्वाहिश पर दम निकल रहा है

कदम बढ़ा ले, हदों को मिटा ले…

आमिर भाई से मिलिए, आप कुछ भी हिंदी-अंग्रेज़ी में लिख के दीजिए ये उसे शानदार उर्दू में लिख देते हैं हाथों हाथ। मैंने कुछ लिखवाया नहीं, हाँ तारिफ़ की इनकी हुनर की और बीच में टोकते हुए इन्हें कहा कि कैमरे की ओर देखिए भाई।

मैं ज़रा छुप के इनकी तस्वीर ले रहा था, इन्होंने पकड़ लिया मुझे और फ़िर अमृता साहिर का पोस्टर जो मेरे पास था, उसपर लिखी शायरी दूर से पढ़ने लगीं, मैं भी ख़ुद को पोस्टर के साथ इनके क़रीब पाया।

#MirchiSayema 🙂

चाय को ज़ेहन में दास्तानगोई के साथ उतारते हुए

गायत्री अशोकन(मलयालम प्लेबैक सिंगर)

दिल-ए-नादां ग़ज़ल को बहुतों ने गाया है पर सुरैया जैसा किसी ने नहीं। पर यही ग़ज़ल अब गायत्री जी की आवाज़ में भी सुनेंगे।

गायत्री जी कहती हैं कि केरल में लोग उर्दू नहीं जानते पर वो ग़ज़ल सुनते हैं।

गौर करने वाली बात ये है कि गायत्री जी को हिंदी नहीं आती पर ग़ज़ल गाते हुए ऐसा कभी न लगा कि हिंदी के किसी शब्द का ग़लत उच्चारण किया हो।

वारसी ब्रदर्स, इनके गले में ख़ुदा बैठे हुए हैं !

मुशायरा, साहित्य आजतक से ये अच्छा रहा जबकि इसमें इन्दौरी साहब नहीं थे। मलका नसीम जी तो राजस्थान की हैं, ये उसी दिन पता चला।

दानिश भाई, 3rd अटेम्प्ट में जियोग्राफी लेकर सिविल सर्विसेज का इंटरव्यू दिया है और इसबार सेलेक्शन तय है। मुझसे कहते हैं कोचिंग के भरोसे मत बैठना।

इनकी मिसेज उर्दू में जामिया मिलिया से PhD कर रही हैं।इत्तेफ़ाक़ से मुशायरे में मेरे पास बैठी थी। जिन लफ़्ज़ों के मानी मुझे नहीं आता उनसे पूछता और वो बताती,शायरी एक्सप्लेन करतीं।

वो मुझे उर्दू पढ़ना-लिखना सिखाएँगी 🙂

16 दिसंबर के लिए तैयार,सूरज सा चमके हम 🙂

इस दिन भी पहले सेशन में जावेद अख़्तर साहब मिल गए, शायरी पढ़ते हुए।

का बुझे ?

इसे गौर से निहारिए

🙂

ग़ालिब के चक्कर में मोमिन को न भूल जाना

परछाई है किसी रब के बंदे की

चलो माना मेरी ही है

कुमार विश्वास साहब को बोलना था बदनाम शायर पर, इन्होंने मौजूदा छोटे-बड़े निज़ाम को बढ़िया से लपेटा।

ये सेशन अटेंड नहीं करना था पर……

मेजर ध्यानचंद स्टेडियम,

कार्य प्रगति पर है भाई,असुविधा के लिए इन्हें खेद भी है।

ये जो कहते हैं कि सहारे है मेरे

मेरे भटक जाने का सबब पूछो इनसे

विशाल भारद्वाज साहब

फ़ैज़ के दीवाने,अमृतेश भाई

जश्न रेख़्ता-2018 का हासिल

रूमी साब, किचन तक आ गये

अगली मंज़िल 🙂

आशीष भईया और रूबी दी 🙂

उर्दू के दीवाने

👍

तो ऐसा रहा जश्न रेख़्ता-2018।

और भी बहुत कुछ है,हुआ-जो मेरे आँखों में है 🙂

डॉ संजीव सराफ़ को जानते हैं आप ?

आख़िरी बात जनवरी में विश्व पुस्तक मेला【प्रगति मैदान, 5-13 जनवरी, 2019】 लगने वाला है हर साल की तरह, हम वहाँ मिलेंगे, अगली कहानी के लिए।

उससे भी पहले इस गुजरते साल और आने वाले साल पर गुजरात में मिलेंगे।

🙂