बिहार :)

11-14 मार्च 2019

छोटी बहन की सगाई 🙂

क्लास के बाद फ़िर उत्कर्ष भाई के साथ बाइक पर बैठकर आनंद विहार रेलवे स्टेशन तक का सफर। जब ऋषिकेश जा रहा था तब बारिश हो रही थी पर इस बार बारिश जैसा कुछ नहीं था और आनंद विहार पहुँचते-पहुँचते पॉल्युशन की वज़ह से मेरी आँखों में जलन होने लगी। अब तक पढ़ता आया था उस दिन अनुभव किया कि सच में पॉल्युशन कितना ख़तरनाक हो सकता है।

दिल्ली जेल में लहराता तिरंगा 💓

23:47 ट्रेन खुल गई।

‘बिहार साइड ट्रेन खुल गई’ ही कहते हैं, राजस्थान रहते हुए ये बात दोस्तों से कहता तो वो हँसते थे कि ट्रेन कहाँ से खुल गई ? बीच से, आगे या पीछे से। वो सही करवाते कि ट्रेन खुलती नहीं रवाना होती है।

पर ट्रेन खुलती ही है 😂

सफ़र में क़िताबें, क़िताबों का सफ़र, अंदर का सफ़र, बाहर का सफ़र 🙂

रात को पढ़ते-पढ़ते भूख लगी तो उत्कर्ष भाई ने जो अँगूर दी थी उससे भूख मिटाई।

ये भी समझ आया कि रात को जब सब सो रहे हों तो अपने बैग से भी सामान नहीं निकालना चाहिए।एक आंटी उठ गई थी और उन्हें लगा था कि मैं चोर हूँ, फ़िर जब उन्होंने देखा कि चोर अँगूर थोड़े ही निकालेगा तब फ़िर सो गयीं। हाहाहा

10 मार्च की सुबह 🙂

सीतापुर से पहले

…और दीवानगी एकमात्र रास्ता है।

सिग्नल न मिलने पर ट्रेन सीतापुर के पहले रुक गई थी, यहाँ तक ट्रेन अपने समय से 30 मिनट पहले थी।लोगबाग ‘रेलवे’ की खामियों पर बात न करके एक और ‘एयर स्ट्राइक’ करवाने पर तुले थे।

10 मार्च 2019 यानी रविवार यानी क्रिकेट यानी कि सबकुछ

सीतापुर रेलवे स्टेशन

ये बच्चे जो प्लेटफॉर्म पर दिख रहे हैं, हिसाब लगा रहे हैं कि किसे कितना मिला रोने के बदले में। ट्रेन के एक-एक डब्बे को आपस में बांट लेते हैं और आपके क़रीब पैर पकड़ के ऐसे रोएँगे जैसे सबसे दुखियारे यही है। मैंने अँगूर और संतरा दिया इन्हें और चलती ट्रेन की खिड़की से अँगूर के लिए लड़ते देखा इन्हें।

सआदत हसन मंटो।बाबुषा कोहली की सलामी क़ुबूल करो।

घाघरा नदी

कश्ती

गंडक नदी, ये नदी उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा रेखा भी है। नेपाल से आती है गंगा में मिल जाती है।

10 के 2, 10 के 2, 10 के 2, 10 के 2 😂

शिखर, विमल, पान बाहर, फलाना-ढिमकाना

वाल्मीकिनगर, बिहार

नरकटियागंज की चाय 😍

आ गया मेरा मोतिहारी, आ गया।

11 मार्च की सुबह 🙂

मोतिहारी से गाँव जाते हुए

लड्डू 😍

माँ और चाय

12 मार्च की सुबह 🙂

छोटी बहन【सोनी】 के हाथ का बनाया हुआ।

ये भी

ये कागज़ का हँस भी।

ये फ़ोटो फ्रेम भी जिसमें मैं ही मैं हूँ 🙈

मेरा सबसे पसंदीदा खाना- दही और भुजा 😍

छोटी बहन को देने के लिए इत्ता सारा चॉकलेट 😰

मेरा हीरो 【छोटे मामा जी का बड़ा लड़का】

तैयारियां

इत्तेफ़ाक़ से बड़ी दीदी की 【12 मार्च 2007】शादी की सालगिरह भी उस दिन था और इसी दिन बड़ी दीदी भूटान से बिहार आ रही थी और हमसब सरप्राइज पार्टी के लिए भरे बैठें थे 😂

13 मार्च की सुबह 🙂

सीटी बजाए, नखड़े दिखाए, 😉

राक्षस लोगों के लिए भी इंतज़ाम था, राक्षस लोग 😂

छोटा भाई-रवि

सबसे छोटी बहन-स्नेहा

बड़ा भईया-मन्टू, अच्छा मैं ही हूँ क्या 😂 🙈

छोटी बहन को दिया जाने वाला सामान-बर्तन, कपड़े,सनेस, दुआएँ

18,000 ₹ आशीर्वाद में मिला।

बहुत सही बहुत सही 😐

दोनों समधी होली खेलते हुए।

हम गाना गाके 1400₹ कमा लिये 🙈

चलो भाई वापस दिल्ली-

14 मार्च की सुबह

मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर भी लहराता तिरंगा मिल गया।

गोरखपुर की चाय

15 मार्च की सुबह, हापुड़ की चाय

दिल्ली 😍

ये मिठाई का डब्बा जिस ख़ास दोस्त के लिए लेकर घर से चला था उससे मिल नहीं पाया और डब्बा आ गया दिल्ली, ठीक ही हुआ

दिल्ली की चाय, 15 मार्च

ख़त्म 🙂

ग़ैर ज़रूरी बातें-

~ भागम-दौड़ी में घरवालों से बात करने का मौका तक न मिला। माँ से भी बात करने का मौका नहीं मिला।

~ घरवालों के चेहरे पर ख़ुशी का अंबार देख, सब्बू【जिस छोटी बहन की सगाई थी】के लिए दुआएँ, उसे सारी ख़ुशनसीबी हासिल हो 🙂

~ कोचिंग में ‘इकोनॉमिक्स’ ख़त्म। होली बाद ‘मॉडर्न हिस्ट्री’ शुरू होगा।

…पर वो तो होली बाद ना,

इसबार की होली मथुरा में

Naaaaaaccchhhhhhooooo !

ऋषिकेश ~ हिमालय का प्रवेश द्वार

3-4 मार्च 2019 🙂

अभिषेक भाई से बात हुई तो उन्होंने शिवरात्रि पर ऋषिकेश जाने का प्लान बताया, मैंने पूछ लिया साथ चलूँ आपके ? कहते हैं बिल्कुल भाई। और जाने के दिन【2 मार्च】 की सुबह कहते हैं, क्लासेज है भाई नहीं चल सकता। मैंने कहा- ठीक है मत जा, मैं अकेले ही जा रहा हूँ। रात का बस में टिकट बुक कराया, शाम को मेरी क्लास ख़त्म हुई और उत्कर्ष भाई के साथ हल्की बारिश में भीगते हुए गाज़ियाबाद पहुँच गया जहाँ से 12 बजे बस जाने वाली थी ऋषिकेश।

उत्कर्ष ने और सुप्रिया मैम ने मना किया कि अभी मत जाओ, पहाड़ों में बारिश हो रही है। मैंने कहा था-मैं तो जाऊँगा 😂

डॉ मुख़र्जी नगर से गाज़ियाबाद जाते हुए, उत्कर्ष भाई की तबियत ठीक नहीं थी, बारिश में गीले होने के डर से तेज़ भगा के 1 घण्टे में गाज़ियाबाद पहुँचना था तो पहुँचा दिया 30 मिनट में।

2 मार्च की दिल्ली में शादियाँ ख़ूब थी, बारिश भी ख़ूब। शादी वाले दिन बारिश, सारा मज़ा किरकिरा।ये घोड़ी वाले भाईसाहब ट्रैफिक में फँस गए थे और पहुँचना इन्हें बहुत ही जल्दी था, समझ रहे हैं ना 😂

गाज़ियाबाद में खंभों पर जो नगर निगम द्वारा चित्रकारी हुई है वो शानदार है। शानदार तो ये ‘खस्ता-कचौरी’ वाला भी है।

बस आ गई, हम बैठ गए, संतरा छिल लिये, रहमान साहब के गाने चला लिये, क़िताब निकाल ली और खिड़की से भीगती सड़क को देख रहे हैं और मन में ये दुविधा भी कि ऋषिकेश में सच में मौसम ज़्यादा ख़राब हुआ तो…तो…तो…..तो

3 बजे सुबह बस रुकी रुड़की के किसी ढ़ाबे पर, दिन जैसा माहौल होता है ऐसे ढ़ाबों पर। 10-12 बसें रुकी रहती हैं और ज़्यादातर को चाय ही चाहिए होती है।

😍

सुबह 7 बजे के क़रीब बस वालों ने ‘नेपाली तिराहे’ पर रोक के ऋषिकेश जाने वालों को नीचे उतार फेंका। बस देहरादून तक जाने वाली है। बस से उतरते ही ये नज़ारा जैसे मेरे इंतज़ार में हो सूरज 😂

_/\_

पैदल चलने में मेरी बराबरी अब तक तो कोई नहीं कर पाया है, एक वज़ह यह भी है कि मैं किसी को भी अपने साथ लेकर कहीं जाना नहीं चाहता।

नेपाली तिराहे से ऋषिकेश की दूरी 12 किलोमीटर है और मैं चार ऑटो वालों से पार पाके कि “भाई, मैं पैदल ही जाऊँगा ऋषिकेश, आपको कोई दिक्कत?” चलने लगा पैदल और अंतर देखने लगा- दिल्ली में, मोतिहारी में, ऋषिकेश में, मैदानी और पहाड़ी इलाकों में, लोगों में, लोगों की मुस्कान में 🙂

फ़ोटो लेते हुए, गाने सुनते हुए और ऋषिकेश की पहाड़ियों को देखते हुए 45 मिनट में 4 किलोमीटर तय कर आया। तब लगा कि नहीं अब ऑटो में बैठ जाना चाहिए। और जब रुक के ऑटो का इंतजार करने लगा तब एक ऑटो नहीं सड़क पर। दूध के लिए जा रहे एक भईया मिले बाइक से, उन्हें रोका और कहा आगे कहीं पटक देना मुझे। 😂

नदी पहाड़ सूरज

आटे की गोली मछलियों के वास्ते

पहाड़ को बोल भाई कि smile please

राम झूला 😍

राम झूला से लक्ष्मण झूले के बीच का 1 किलोमीटर का फ़ासला लाज़वाब है। कितना कुछ ख़ामोशी से विद्यमान है उस रास्ते पर। जंगल, पुराने घर【सबका नाम कोई न कोई ‘आश्रम’ है। इन घरों की बालकॉनी या छत से हमेशा गंगा नदी का दर्शन और पहाड़ों की चुप्पी।

इस रास्ते से चलते हुए सोचा कि काश अपना घर हो यहाँ, काश !

जूट की रस्सी का चप्पल

डॉगसी 😍

भरत दास जी, इनकी फ़ोटो इन्हें दिखाई तो कहते हैं उम्र हो चली है, मैंने कहा मेरी भी 😂

रसभरी और चाचा जी का गुस्सा 😍

लक्ष्मण झूला

गूगल मैप के सहारे भटकते-भटकते ही सही होटल तक पहुँचा। डॉरमेट्री लिया जिसमें एक ही रूम में 4 बेड, चार्ज मामूली सा और ठाठ बाठ 5 स्टार तो नहीं 3 स्टार होटल के जैसे 😂

चलती-फिरती चाय दुकान 😍

इस बाइक से पूछा गया होगा कि ऐसा यूज़ करने से पहले,मुझे लगता है नहीं पूछा गया होगा 😂

गंगा किनारे से लक्ष्मण झूला

जब मैं राम झूले के वहाँ था तो एक भईया ने मुझे अलग-अलग एंगल से फ़ोटो क्लिक करते देख, मुझे अपने पास बुलाया और कहा कि

”लक्ष्मण झूले के पास ‘उत्तरा आर्ट गैलरी’ है वहाँ जाना और तो और आज त्रिभुवन जी का आज जन्मदिन भी है तो जाना वहाँ”

मैं पहुँच गया-

एक दिन लेट आया मैं नहीं तो एक्सहिबिशन क् गवाह मैं भी होता पर कोई नी

त्रिभुवन सिंह चौहान जी _/\_

‘स’ मैम, जर्मनी की हैं। ऋषिकेश में 5 सालों से योगा टीचर हैं।

इसकी ज़रूरत थी सख़्त,

त्रिभुवन जी की लड़की रिपिन,चाय वही लेकर आई और कहती है मुझसे ”अंकल चाय लीजिए” 😂

4th में पढ़ती है और हमेशा मुस्कुराती रहती है और माँ से हमेशा डाँट सुनती है कि रोड देख के क्रॉस क्यों नहीं करती,मर जाएगी एक दिन। रिपिन इन ‘डाँट’ के लिए बहरी हो गई है।

सिक्के, सदियों पुराने सिक्के

【लूटने का मन हो गया एक बार तो इस दुकान को🙈】

शाम हुई, अब आरती के लिए प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट चला जाए

शक्ति शक्ति शक्ति शक्तिमान 😂

कोई मेको जलेबी और चाय में ज़हर डाल के देदे तो मेरे कोई असर ही नहीं होगा 😂

रात का राम झूला

रात का लक्ष्मण झूला

जिसको ढूँढे बहर-बहर वो बैठा है भीतर छुपके

तेरे अंदर एक समंदर क्यों ढूँढे तुबके-तुबके

मिलेंगे, मिलेंगे, तोहे पिया मिलेंगे

4 मार्च-सुबह सवेरे की घुम्मकड़ी

ये दोस्ती….

कितना प्यारा है ये 😍

पवन भाई, मध्यप्रदेश के ओरछा जिले से हैं, 9th में पढ़ते हैं और बड़े भईया की मदद करते हैं बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी कला की दुकान में।

अरे रुको भाई, बीच पुल के बीच में खड़ा होके फ़ोटो ले रहा हूँ, रुको! 😂🙈

Adam from Netherlands.

रोहित रावत

शुक्रिया और अलविदा ऋषिकेश 🙂

हरद्वार

खतौली, मुज़फ़्फ़रनगर

अपनी हाथ की चाय 😍

हासिल 🙂

पूरा देख/पढ़ लिया ?

आप धैर्यवान हैं, आपका भविष्य उज्जवल है _/\_

…अब बिहार मिलेंगे 🙂

ऑल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसाइटी

AIFACS ~ अखिल भारतीय ललित कला और शिल्प सोसायटी

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The Andrei Stenin International Press Photo Contest Exhibition-2019

22 फरवरी-28 फरवरी 2019 🙂

और…

A exhibition by Gauri Shanker Soni.

23 फरवरी-28 फरवरी 2019 🙂

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मामा जी SSC की तैयारी कर रहे थे, उन्होंने कहा The Indian Express नहीं The Hindu अख़बार पढ़ना चाहिए,मैंने कहा था ठीक है the hindu मंगा लेंगे।पिछले दिनों मामा जी की कोचिंग पूरी हो गई, वो गाँव चले गए तो मैंने वापस से The Indian Express लगवा लिया।

और अगले ही दिन ये ख़बर मुझे इस अख़बार में-

…फ़िर सोचना क्या था, प्रतीक भाई को बोले और वो तो जैसे तैयार ही बैठे हो। मैं उन्हें कहूँ कि चलोगे मेरे साथ नरक, तो एक बार तो मना नहीं ही करेंगे। हाँ, घर वाले उनके कहेंगे कि अबे वो मन्टू पागल तुझे नरक में लेके जा रहा है तब कुछ और फ़ैसला ले सकते हैं हमारे प्रतीक भाई!

…तो झोला उठा के हमलोग पहुँच गए केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन और पता नहीं इस दुकान तक कैसे पहुँच गए, पहुँच गए तो पहुँच गए। पहली बार सच में अनुभव हुआ कि चाय में चुम्बकत्व का गुण भी पाया जाता है। 😂

केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 से बाहर निकलिए तो गिन के आप 17 कदम चलेंगे और ख़ुद को पाएँगे ”अखिल भारतीय ललित कला और शिल्प सोसायटी” यानी AIFACS के अंदर।

और कुछ ऐसा मिलेगा पढ़ने को, समझने को, आत्मसात करने को 🙂

…इतना सन्नाटा क्यों है भाई !

‘बांग्लादेश’

सहारे हम कहाँ ढूँढे, कौन है जिसे ज़रूरत है हमारी ?

‘बांग्लादेश’

मुझे घर की तलाश ज़रूर है,मगर ये भी पता है कि कोई घर नहीं है।

‘यमन’

इस तरह सच मानिए

डर की स्थिति में मैंने सिर्फ़ ‘हाँ’ कहा

और कुछ नहीं, सच मानिए।

‘केन्या’

मनुष्य जब सिर्फ़ वही होता है जो वो दिखाई देता है तो वह लगभग कुछ नहीं होता है।

‘केन्या’

सेलफ़ोन को छोड़ के बाकी सबकुक उस दिन मैंने खो दिया जो मेरा था।

‘केन्या’

उनके साथ जुड़कर तुम्हें पता चल जाएगा कि वह क्या दूरी है जो तुम्हें उनसे अलग करती है।

‘ईरान’

मेरा अपना चाँद जिसे मैं बल्ब की तरह जब चाहे जला बुझा सकूँ। रात जितने बड़े कमरे और ख़ामोशी के सूरज से इस्तीफ़ा माँग लूँ।

‘ईरान’

ज़िन्दगी ट्रेन है, बहुत देर तक नाउम्मीदी के प्लेटफार्म पर नहीं रुकती।

‘ईरान’

यह एक निरंतर चलने वाला सपना है।

‘भारत’ 【अजय कुमार, ये तस्वीर तीसरे स्थान पर आई है】

जीवन का मृत्यु की तरफ़ जाना ही बीतना है समय का।

‘भारत’ 【अमित मौलिक, ये तस्वीर भी तीसरे स्थान पर आई है】

किस तरह गुत्थमगुत्था हो गयीं थीं साँसे

फ़िर लहरें

फ़िर आग

फ़िर लपटें

फ़िर उसकी चिंगारियाँ

फ़िर धुआँ-धुआँ…

‘इराक़’

“गीता पढ़ने की बजाय हम फुटबॉल खेलकर स्वर्ग के नज़दीक पहुँच सकते हैं” किसने कहा ?

विवेकानंद ने कभी कहा था अपने शिष्य को-जिनके पास उड़ने के लिए पँख है उन्हें पैरों की क्या ज़रूरत।

‘रूस’

यह उन दिनों की बात है जब ऐसा लगता कि श्रम की ताक़तों को आसानी से हराया नहीं जा सकता।

‘केन्या’

कुछ ही लोग【लड़कियाँ】 शून्य तक पहुँचते हैं क्योंकि यहाँ तक की यात्रा लम्बी है।

‘केन्या’

हाँ, मैं कुछ होने की कोशिश करूँगा, कोशिश न करने का सीधा मतलब है अहंकारी होना।

‘फ्रांस’

पूरी रोशनी में हम छाया तक नहीं।

औरतों तुम रोया नहीं करो

तुम इतना गाया करो

कि रोना आए ही नहीं कभी ~ विष्णु नागर

‘फ़्रांस’ 【अपने नडाल भईया हैं 😂🙈】

केवल घाव ही अपनी भाषा में बात करता है।

‘अफ़्रीका का कोई देश’

…चींटियों का अनुशासन तुमने ख़ूब देखे होंगे

‘इटली’

कुछ वास्तुविद कहते हैं पुरानी इमारतों की अब मरम्मत नहीं हो सकती। सच ही कहते होंगे।

‘इटली’

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना,नज़रें मिलाना, नज़रें चुराना

‘इटली’

कुछ चीजें इस तरह अपनी बन जाती हैं कि हम उन्हें भूल जाते हैं।

‘इटली’

जहाँ सभी विलाप कर रहे हो, वहाँ रुदन कोई नहीं सुनता।

‘साउथ अफ़्रीका’

मनुष्य की त्रासदी तब और बढ़ जाती है जब वह हिम्मत हार जाता है।

‘साउथ अफ़्रीका’

पर्वत के पास है एक भारी विचार जो उसे हिलने नहीं देता।

‘साउथ अफ़्रीका’

जो चले गए हैं दूर

इंतज़ार है उनकी वापसी का

‘रूस’

…मगर सुबह की उम्मीद की सबसे बड़ी वज़ह रात है।

‘रूस’

हर खिलौने को टूटने का अधिकार है।

‘रूस’

तुम उदास हो क्योंकि उन्होंने तुम्हें छोड़ दिया और तुम गिरे नहीं हो।

‘रूस’

___________

‘तुर्की’

दिल ढूँढता है….

‘बेलारूस’

Cranberry 😍

रूस’

साँझ उतरेगी अकेली झील पर…

‘ईरान’

बिना बताए किसी को भी, एक पतंग मैंने भी उड़ाई थी आसमां पर कभी बचपन में

अंधा व्यक्ति अपने कंधे पर सितारा रखता है।

मुक्तिबोध ने अपनी एक कविता में लिखा था कि इस दुनिया में लोग चलते दिखाई दे रहे हैं, किंतु कोई कहीं नहीं जा रहा है।

 

“मैं एक मनुष्य हूँ तो फ़िर कैसे जा सकता हूँ मनुष्यता के ख़िलाफ़”

 

जिन बच्चों को कोई हाथ पकड़कर नहीं चलाता वे बच्चे जानते हैं कि वे बच्चे हैं।

जहाँ जीवन की न्यूनतम ज़रूरतें

बहुत ही न्यूनतम हो

इस तरह कितने दिन जीवित रहेगा

यह परिवार ~ निशांत

जब तक हम यह सोचते हैं कि हमारा कोई मोल है, हम अपने साथ ग़लत करते हैं।

हर चीज निस्सार है लेकिन बाद में, हर चीज की पीड़ा सह लेने के बाद।

”ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है, हम में से कोई ज़िन्दा नहीं रहेगा, फ़ूल कहता है, चींटी कहती है, जिनके घर हमसे बड़े हैं।”

अक़्सर हमें अपने होने का भय दर्पण तक पहुँचा देता है।

‘कारवाँ’ को हेल्लो कहिए

फूल अगर बेमौसम खिलने लगें तो उन्हें मत उगने दो।

 

पुराना वक़्त

बरगद के पेड़ की

थकी शाखाओं से

जड़ों की ओर लटका हुआ है।

किधर ?

इधर 🙂

मज़ा आ गया भीडू 😂😂😂

तुम पर किसी का कोई कर्ज़ नहीं है, अगर तुम सूरज को उसकी रोशनी वापिस कर सकते हो।

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अब गौरी शंकर सोनी जी की दुनिया से रूबरू होते हैं-

…मेरी आवाज़ सुनो !

इसे देख ख़लील जिब्रान याद आये

इस तस्वीर को मैंने अपने मनी प्लांट को दिखाई और कहा-सीख इससे कुछ

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…कुछ और

बस अब हो गया 😂😂😂

ग़ैरज़रूरी बात-

~ कहीं पढ़ा था कि इंसान को इतना दरियादिल होना चाहिए कि उसके तमाम दोस्त अपने कुत्तों को उस इंसान के सहारे छोड़कर टहलने जा सकें।

~ मेरे अंदर के ‘मैं’ और बाहर के ‘मैं’ में सुलह हो गई तो शिवरात्रि पर ऋषिकेश मिलेंगे।

~ कभी-कभी सोचता हूँ मुझे दुबारा कुछ नहीं चाहिए, माँ भी नहीं।

ख़ैर 🙂

【तस्वीर के लिए इस्तमाल की गई ज़्यादातर पँक्तियाँ स्पेनिश कवि अंतोनियो पोर्चीया की हैं】

दिल्ली पुलिस फाउंडेशन डे एक्सहिबिशन-2019

इंडिया गेट लॉन्स, 16-20 फ़रवरी 2019 🙂

17 फ़रवरी को FM गोल्ड को सुनते हुए इस एक्सहिबिशन के बारे में सुना और भूल गया। 19 फ़रवरी को कोचिंग में रोहित भाई कहते हैं “मुगल गार्डन चलते हैं ना भाई, खुला है इनदिनों?” मैंने फटाक से कहा कल लास्ट डेट है दिल्ली पुलिस के एक्सहिबिशन का, वहाँ चलते हैं। कह तो दिया उन्होंने चलने को पर अगले दिन उनके विदेश मंत्रालय में ज़रूरी काम आ गया और उन्होंने मना कर दिया। और प्रतीक भाई के अलावे सभी दोस्तों को ज़रूरी काम आ गया 😂

तो शुरू करें 🙂

इधर इच जाना था

उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 2 के बाहर का नज़ारा पटना के बेल्ली रोड जैसा है।

…चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय

🙂

उद्योग भवन से जनपथ पैदल जाने में विदेश मंत्रालय मेरा रास्ता रोके खड़ा था और बोला मुझे कि रोहित भाई इसके अंदर ही है कॉल कर लो, कहीं साथ चल चले आज। मैंने कॉल किया तो कहते हैं रोहित भाई- “मंत्रालय” घूमोगे ?” मैंने कहा ये पूछने की बात है। तो पास बना और पहुँच गए हम विदेश मंत्रालय के अंदर

😍

🙏

रोहित और प्रतीक भाई के साथ मैं भी।

😍

पहली बार राजपथ पर घूमना नसीब हुआ 🙂

क़ाबिल और नेकदिल इंसान

SI सुधीर जी 🙂

🙂

100 नंबर हेल्पलाइन कैसे काम करता है….

…एक्सप्लेन किया SI मदन साही जी ने और पूछा हमसे कि क्या करते हो। हमने कहा कि आपके अंडर में आने की तैयारी 🙂

🙂

अब चलते हैं मॉडल पुलिस स्टेशन-

सुधीर जी के पास हम फ़िर पहुँच गए, पहचान गए हमें, कहते हैं- आइए-आइए 🙂

भूले-भटके बच्चों के लिए जेल में व्यवस्था

मैं तस्वीर लेने में मशगूल था तब उषा रानी मैम ने कहा कि “आप यहाँ बैठिए, आपको पूरा प्रॉसिजर समझाते हैं FIR का” मैंने कहा- “बिल्कुल, चाय-वाय मँगाइये 😂”

फ़िर जो मेरे मन के जिज्ञासा निकलने लगे हैं और उषा रानी मैम और सुधीर जी के समाधान 🙂

ग़लती भी हो गई एक, 5 मिनट के लिए बंद कर दिया मुझे लॉक अप में 😦

मॉडल जेल में हैं हम, मुस्कुराइए 🙂

मंजीत भईया, इन्हें थोड़ा सा मुस्कुराना चाहिए था पर वर्दी में थे जो मैंने भी मन में आई बात मन में ही रहने दी।

लक्ष्मण भाई से मिलिए, उत्तर प्रदेश के हाथरस से हैं। इंडिया गेट को कैद करते वक़्त ये एक फ्रेम में आ गए थे और पास आके कहते हैं “मेरी तस्वीर कैसी आयी है ?” फ़िर मैंने इनके साथ में तस्वीर ली और दिखाया इन्हें, मुस्कुराने लगे, मैं भी

इंडिया गेट देखिए, रौशनी देखिए और मन हो तो फ़लक पर उभरे चाँद को भी देखिए 🙂

मीठा पान, चॉकलेट के साथ 😍

वादा कीजिए, इण्डिया गेट पर आपका जाना होगा तो इनसे आप ज़रूर मिलोगे। इनका नाम पूछना न भूलना, मैं भूल गया था 🙈

चेहरा पढ़िए, जगह का नाम याद कीजिए

आप को यक़ीन होगा ? इंडिया गेट पर बाइस्कोपवाला। प्रतीक भाई का थोड़ा कम ही मन था, मैंने कहा मैं तो देखे बिना यहाँ से हिलने वाला भी नहीं 😂

😍

🙂

🙏

😂😂😂

प्रतीक भाई, सभी दोस्त/दोस्तीनों को ज़रूरी काम पड़ गया था तब ये सहारा बने मेरे 🙂

हासिल 🙂

…शुक्रिया 🙂

…फ़िर मिलेंगे 🙂

काम की बात-

गाँव【बिहार】 में रहते हुए या अज़मेर【राजस्थान】 रहते हुए मैंने-आप सब ने भी देखा होगा कि आम लोग जितना किसी क्रिमिनल से नहीं डरती उससे ज़्यादा पुलिस से डरती है। गाँव में पुलिस आ जाती थी तब उस दिन पूरा गाँव डरे-सहमे नज़रों से पुलिस की ही बात होती, बुरे अनुभव बाँटे जाते।

देश भर में पुलिस सुधार को लेकर उठती माँगों में ये सबसे ऊपर है कि कैसे जनता के मन से पुलिस का डर निकले।

दिल्ली पुलिस की ये पहल उल्लेखनीय और सराहनीय है 🙂

…और सबसे ज़्यादा काम की बात-

मार्च में गाँव जाना हो रहा है, बस 2 दिन की ख़ातिर, तो अब वहाँ मिलेंगे 🙂