हाँ, कानपुर 😎
उत्कर्ष ने कहा कि घर जाओ तो कानपुर होते हुए निकलो, मैंने कहा बिल्कुल और टपक गया मैं कानपुर. कोई दोस्त लोग मुझे कहीं बुलाते हैं तो मैं कहता हूँ कि मुझे मत बुलाया करो मैं सच्ची में आ जाऊंगा.. कुछ उनमें से कहते हैं मंटू भाई आप आ जाओगे इसलिए आपसे कहा भी जाता है।
मैं 21 फ़रवरी को मोतिहारी से निकला था
22 को दिल्ली (संडे बुक मार्केट)
23 को चांदनी चौक और नोएडा
24 और 25 को आगरा..
26, 27 को जयपुर
28 को दिल्ली, गाजियाबाद
01 मार्च को वृन्दावन..
02 मार्च को दिल्ली यूनिवर्सिटी, मुखर्जी नगर, गांधी विहार
03 मार्च को हुमायूं का किला, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह
04 मार्च को दिल्ली में होली..
05 मार्च को गुड़गांव में सेमीफाइनल
और आज 06 और 07 मार्च को कानपुर 🙎
08 मार्च को वापस मोतिहारी में Sanvi का जन्मदिन और फाइनल 😍
05 मार्च 2026 🌞













भईया से पूछा कि कौन सी किताब लूं, कोई सी भी लेलो, कहते हैं भाई इतना कनफ्यूजन नहीं चाहिए जीवन में, मैंने कहा भईया कोई तो विशलिस्ट में होगी, तो कहते हैं “आपसे मिलना विशलिस्ट में है.” 😐
मेरी आज शाम 05 मार्च की ही ट्रेन थी कानपुर की, भईया को बताया तो कहते हैं अरे रुकना था न आज, मैच देखते साथ में.. मैंने कहा भईया पहले कहना था न.. पर मैं देखता हूं, मैच देखने का लालच ऐसा आया कि कानपुर का कैंसिल करके भईया के साथ मैच देखना चुना और इंडिया को फाइनल में पहुंचा दिए 😎 कानपुर कल चले जाएंगे.. उसमें क्या है..


06 मार्च 2026 🫶


कौन बोला ?
तेरी आँखें
नैनों की मत सुनियो रे, नैना ठग लेंगे..
शुरू हो गया फ़िर?
मैं बंद किधर किया बे
ok.




हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो।”
ग़ालिब चच्चा

उत्कर्ष स्कूटी पर एकदम हद अजीब लग रहा था, इसको कार में देखे हैं या बाइक पर या पैदल.. स्कूटी.. छी.. पर ठीक है, लौंडा कड़ी धूप में स्टेशन आ गया लेने मुझे.. हीरा आदमी तो है ये.. पर मेरे गाने बिगाड़ने के मामले में तो सूअर ही रहेगा.











तुझे ख़राब क्या लगता है बे Mantuuuye ?
उत्कर्ष को बोले थे कि गाज़ियाबाद से तुम आराम करने जाते हो घर पर, तुम मुझे कानपुर घुमाते रहना..
उसका जवाब-


07 मार्च 2026 🌼







अब चलते हैं क्रिकेट खेलने.. आख़िरी बार लॉकडाउन में खेले होंगे.





इतने अंतराल के बाद भी बॉल, बैट पर आ रही थी.. ख़ैर, अच्छा तो खेलता ही हूँ मैं.. हाँ, इस पूरे ट्रिप पर कोई मुझे चेस खेलने वाला साथी न मिला, जयपुर वाले अंकल जी खेलते भी हैं तो इस बार वो व्यस्त थे बहुत.. गाज़ियाबाद में कैरम भी अच्छा खेला ही था.
…लूडो में मुझे ईशा ने हरा दिया मगर 🫣🫣 कोई न,
हीरो पहले विलेन से पीटता है, बाद में हीरो मारता है उसे. तो मौका आएगा..

अब चलते हैं कानपुर के सबसे बड़े मॉल Z square.


यहाँ पूरा टाइम फन सिटी में गया..
पहली बार बॉलिंग ट्राई किया और अच्छा एक्सपीरियंस रहा.



स्ट्राइक मतलब पहली शॉट लो और पहली बारी ही 10 के 10 pins आपने गिरा दिया तो उसे कहा जाता है स्ट्राइक और स्कोर मिलता है X जो कि बेस्ट स्कोर है, सबसे ज्यादा.. पहली बार में ही Mantuuuye ने स्ट्राइक किया है, मजाक चल रहा है क्या.. 😎
हालांकि ओवरऑल स्कोर के मामले में मैं उत्कर्ष से पिछड़ गया.. पर ठीक है, कानपुर में था तो उत्कर्ष को जीतने दिया, दिल्ली आए अबकी बार फ़िर बताते इसको वहां





फन सिटी में इतना मशगूल हुए कि ध्यान ही नहीं रहा कि दिल्ली से लेट आने वाली ट्रेन जल्दी आ रही है कानपुर और हमें घर जाके खाना खाकर, पैकिंग करके स्टेशन भागना है। 10:55 पर हम मॉल में ही थे, ट्रेन पहले 12:37 पर थी, उसे अब कम करते करते 12:05 के दिया था। और मेरा उत्कर्ष ड्राइवर कार को मुस्लिम लोगों के एरिया से ले लिया शॉटकट के चक्कर में, जहां इफ़्तारी के कारण जाम.. यू टर्न लेके वापस लंबे रस्ते से घर गए.. तब तक आंटी खाना तैयार करके रखी थीं.. खाते पीते आइसक्रीम हाथ में रखते सबसे आशीर्वाद लेते, बाय बाय बोलते 11:58 पर मैं प्लेटफार्म पर ख़ुद को पाया… नहीं तो मैं कार में ही अगले दिन की ट्रेन देखने लग गया था…लेकिन आज ही जाना ज़रूरी था.. सान्वी का कल जन्मदिन है..8 मार्च 🥰
बनारस वाला रवि भाई का मैसेज आया था कि सब जगह घूम रहे तो बनारस का भी फ़िर चक्कर काट जाओ.. मैंने रवि को पहचानने से मना कर दिया कि कौन हो तुम ?



08 मार्च 2026 🎊






..अब मोतिहारी पहुंच जाएंगे.











मैच देखना तो छूट ही गया, और T 20 फॉर्मेट का क्रिकेट के ओरिजनल फॉर्म से कोई लेना देना नहीं है.. सबको इंस्टेंट मजे चाहिए तो लो भई.. और जैसे कि दोस्त अनामिका कहती भी हैं कि T 20 का वर्ल्ड कप तो होना ही नहीं चाहिए़, लीग तक रखो इसे बस.. वही..
फ़िर भी, गुड़गांव में सेमीफाइनल देखा था और फाइनल मोतिहारी.. दोनों मैच इंडिया जीत गई… मैं लक्की हूँ इंडिया के लिए.. नहीं ? Ok.
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ख़त्म
भविष्य को लेकर जो घबराहट हमारे अंदर होती है—कि कल क्या होगा? कहाँ सोएंगे? क्या खाएंगे? वही घबराहट असल में हमें जीवंत बनाती है। मालूम क्या ? अनिश्चितता का डर तभी तक है जब तक आप बाहर निकल नहीं पड़ते।
जब आप किसी पहाड़ की चोटी पर या किसी नदी किनारे, किसी अनजान शहर के कैफ़े में अकेले बैठते हैं, तब आप ख़ुद से रूबरू होते हैं। भीड़ में हम ‘वो’ होते हैं जो दुनिया हमें देखना चाहती है, लेकिन अकेले सफर में हम ‘वो’ होते हैं जो हम असल में हैं। और घुमक्कड़ी केवल किसी दूसरे अंजान शहर में ही नहीं होती वो अपने घर के एक कमरे से दूसरे कमरे तक की भी हो सकती है. समझे ? नहीं ?
और सबसे ज़रूरी बात- भविष्य एक कोहरा है। कोहरे में चलने का तरीका यह नहीं कि आप सूरज निकलने का इंतज़ार करें, बल्कि यह है कि आप एक कदम बढ़ाएं। जैसे ही आप एक कदम बढ़ाते हैं, अगला रास्ता अपने आप दिखने लगता है। मुझे दिखा है। इसलिए मैं कह रहा हूं।
घुमक्कड़ी हमें सिखाता है कि ‘आज’ ही वह इकलौती चीज़ है जिस पर हमारा हक है।
तो बस.. ख़ुद को देखिए, परखिए, और वो कीजिए जो करने का मन है.. भले ये सहुलियत सबको नहीं हासिल पर उम्मीद पर क़ायम रहिए, ख़ुद को बनावटी लेयर में ढकने मत दीजिए एक ही तो जीवन है.
हो गया तेरा Mantuuuye ?
नहीं..
निकल चल ..निकल !
आखिरी बात तो कह लेने दे.. कहो.. हां 🫂
चहकते चेहरे, दोस्तों की बातों में अपनापन, छोटी बहनों की समझ, जीवन की संभावनाओं से लबालब भरे हुए शहर, पुराने घरों की आत्मीयता और अनजान रास्तों की धूल हमें वह सब सिखाती है जो कोई किताब नहीं सिखा सकती.. शायद शायद शायद !
Hmmmmmmmmmm…….
[Mantuuuye अब घर जाके पढ़ाई कर ले चुपचाप और कम से कम अगले 6 महीने तक ट्विटर को, गीत, संगीत, फ़िल्म, साहित्य, घुमक्कड़ी को भूल जा] ok. Let’s see.
🙂











































































































































































































































































































































































































