…और अब कानपुर ❣️.

हाँ, कानपुर 😎

उत्कर्ष ने कहा कि घर जाओ तो कानपुर होते हुए निकलो, मैंने कहा बिल्कुल और टपक गया मैं कानपुर. कोई दोस्त लोग मुझे कहीं बुलाते हैं तो मैं कहता हूँ कि मुझे मत बुलाया करो मैं सच्ची में आ जाऊंगा.. कुछ उनमें से कहते हैं मंटू भाई आप आ जाओगे इसलिए आपसे कहा भी जाता है

मैं 21 फ़रवरी को मोतिहारी से निकला था

22 को दिल्ली (संडे बुक मार्केट)

23 को चांदनी चौक और नोएडा

24 और 25 को आगरा..

26, 27 को जयपुर

28 को दिल्ली, गाजियाबाद

01 मार्च को वृन्दावन..

02 मार्च को दिल्ली यूनिवर्सिटी, मुखर्जी नगर, गांधी विहार

03 मार्च को हुमायूं का किला, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह

04 मार्च को दिल्ली में होली..

05 मार्च को गुड़गांव में सेमीफाइनल

और आज 06 और 07 मार्च को कानपुर 🙎

08 मार्च को वापस मोतिहारी में Sanvi का जन्मदिन और फाइनल 😍


05 मार्च 2026 🌞

सुबह उठते ही ऐसा दृश्य दिख जाना, जीने के लिए बहुत सारा उम्मीद देता है, मालूम क्या ?
ये भाई साब, डरा दिए जब योगा कर रहा था.
सूरज चाचू जागे..
Hmmm..
बहनों को खाना बनाकर खिलाने का वादा पूरा किया गया.. पिछले 2 महीने से जो अकेले रहते हुए फ़िर से खाना बनाने लगा था, उसका फल मिला कि दाल रोटी सब्जी ऐसे बनी, कोई कमी न निकाली बहनों ने 😎
🫣

उत्कर्ष, उत्तराखंड वाला ट्रिप अक्टूबर 2021. 🌻
पता है ? आप एक साइकिल उठाओ और चलाते हुए इन पहाड़ियों के पार चलते जाओ तो कहां पहुंचोगे ? लेसोथो? नहीं बे.. मसूरी मसूरी 🥲
जंगली फूलों की जिजीविषा.

मिलेनियम सिटी सेंटर, गुड़गांव

भईया से पूछा कि कौन सी किताब लूं, कोई सी भी लेलो, कहते हैं भाई इतना कनफ्यूजन नहीं चाहिए जीवन में, मैंने कहा भईया कोई तो विशलिस्ट में होगी, तो कहते हैं “आपसे मिलना विशलिस्ट में है.” 😐

मेरी आज शाम 05 मार्च की ही ट्रेन थी कानपुर की, भईया को बताया तो कहते हैं अरे रुकना था न आज, मैच देखते साथ में.. मैंने कहा भईया पहले कहना था न.. पर मैं देखता हूं, मैच देखने का लालच ऐसा आया कि कानपुर का कैंसिल करके भईया के साथ मैच देखना चुना और इंडिया को फाइनल में पहुंचा दिए 😎 कानपुर कल चले जाएंगे.. उसमें क्या है..

फाइनल में जाने की ख़ुशी में


06 मार्च 2026 🫶

अगली बार यहाँ याद से जाऊंगा.
थक गया क्या Mantuuuye ?
कौन बोला ?
तेरी आँखें
नैनों की मत सुनियो रे, नैना ठग लेंगे..
शुरू हो गया फ़िर?
मैं बंद किधर किया बे
ok.

दिल्ली मेट्रो में पढ़ती-लिखतीं लड़कियां ❣️
Ye अच्छा लगा..
“रहिए अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई न हो,
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो।”

ग़ालिब चच्चा
कानपुर आ गए 🫶

उत्कर्ष स्कूटी पर एकदम हद अजीब लग रहा था, इसको कार में देखे हैं या बाइक पर या पैदल.. स्कूटी.. छी.. पर ठीक है, लौंडा कड़ी धूप में स्टेशन आ गया लेने मुझे.. हीरा आदमी तो है ये.. पर मेरे गाने बिगाड़ने के मामले में तो सूअर ही रहेगा.

सात्विक ब्रो, उत्कर्ष का कजिन.. मस्त लड़का है.. 10 मिनट में घुल मिल गया मेरे से.

🫠

अप्पे, पहली बार खाया, अच्छा लगा.
पनकी धाम 🙏
🫠
दीदी की पसंदीदा Waffles भी पहली बार खाया, ये भी अच्छा लगा.
तुझे ख़राब क्या लगता है बे Mantuuuye ?

उत्कर्ष को बोले थे कि गाज़ियाबाद से तुम आराम करने जाते हो घर पर, तुम मुझे कानपुर घुमाते रहना..

उसका जवाब-

बकचोदी, मंदिर मंदिर, महफ़िल, रात को Netflix 🫠
हाँ, तो Ground Zero देखी गई और Stolen..कपिल शर्मा के 1-2 एपिसोड भी.


07 मार्च 2026 🌼

महावतार नरसिम्हा, शानदार फ़िल्म है, पहली एनिमेशन फिल्म जिसे देखते हुए बोर नहीं हुआ.

बन मख्खन 😋
भाई भाई.. 🫂
उम्मीद उम्मीद उम्मीद…
बर्फ़ी फ़िल्म फ़िर से देखने का जी कर रहा.
चलिए मुझे पहचानिए इसमें, उत्कर्ष और ख़ुशी तो पहली बार में पहचान गए.

अब चलते हैं क्रिकेट खेलने.. आख़िरी बार लॉकडाउन में खेले होंगे.

ओ भाई, कहां उड़ा दी yaaarrrr 😅
शुक्रिया कानपुर 🫂

इतने अंतराल के बाद भी बॉल, बैट पर आ रही थी.. ख़ैर, अच्छा तो खेलता ही हूँ मैं.. हाँ, इस पूरे ट्रिप पर कोई मुझे चेस खेलने वाला साथी न मिला, जयपुर वाले अंकल जी खेलते भी हैं तो इस बार वो व्यस्त थे बहुत.. गाज़ियाबाद में कैरम भी अच्छा खेला ही था.

लूडो में मुझे ईशा ने हरा दिया मगर 🫣🫣 कोई न,

हीरो पहले विलेन से पीटता है, बाद में हीरो मारता है उसे. तो मौका आएगा..

शंकर संकट हरना…

अब चलते हैं कानपुर के सबसे बड़े मॉल Z square.

यहाँ पूरा टाइम फन सिटी में गया..

पहली बार बॉलिंग ट्राई किया और अच्छा एक्सपीरियंस रहा.

..और ये हुआ स्ट्राइक 😍
गए गए गए गए… 🎊

स्ट्राइक मतलब पहली शॉट लो और पहली बारी ही 10 के 10 pins आपने गिरा दिया तो उसे कहा जाता है स्ट्राइक और स्कोर मिलता है X जो कि बेस्ट स्कोर है, सबसे ज्यादा.. पहली बार में ही Mantuuuye ने स्ट्राइक किया है, मजाक चल रहा है क्या.. 😎

हालांकि ओवरऑल स्कोर के मामले में मैं उत्कर्ष से पिछड़ गया.. पर ठीक है, कानपुर में था तो उत्कर्ष को जीतने दिया, दिल्ली आए अबकी बार फ़िर बताते इसको वहां

इसमें भी मजे आए.
फुटबॉल भी..
❣️
प्रशांत भाई, ख़ुशी, सलोनी दी, सात्विक, उत्कर्ष, Mantuuu.

फन सिटी में इतना मशगूल हुए कि ध्यान ही नहीं रहा कि दिल्ली से लेट आने वाली ट्रेन जल्दी आ रही है कानपुर और हमें घर जाके खाना खाकर, पैकिंग करके स्टेशन भागना है। 10:55  पर हम मॉल में ही थे, ट्रेन पहले 12:37 पर थी, उसे अब कम करते करते 12:05 के दिया था। और मेरा उत्कर्ष ड्राइवर कार को मुस्लिम लोगों के एरिया से ले लिया शॉटकट के चक्कर में, जहां इफ़्तारी के कारण जाम.. यू टर्न लेके वापस लंबे रस्ते से घर गए.. तब तक आंटी खाना तैयार करके रखी थीं.. खाते पीते आइसक्रीम हाथ में रखते सबसे आशीर्वाद लेते, बाय बाय बोलते 11:58 पर मैं प्लेटफार्म पर ख़ुद को पाया… नहीं तो मैं कार में ही अगले दिन की ट्रेन देखने लग गया था…लेकिन आज ही जाना ज़रूरी था.. सान्वी का कल जन्मदिन है..8 मार्च 🥰

बनारस वाला रवि भाई का मैसेज आया था कि सब जगह घूम रहे तो बनारस का भी फ़िर चक्कर काट जाओ.. मैंने रवि को पहचानने से मना कर दिया कि कौन हो तुम ?

सीट लेके ये अमेंरीकन नट्स फ्लेवर icecream खाने में जो सुकून मिला है ना, क्या ही बताऊं.. फील कर लो बस…



08 मार्च 2026 🎊

Happy Birthday सान्वी 🌻 (भांजी) 3 साल की हो गई, शरारत में 10 साल के बच्ची जितनी.


💌. 🐢.


मिट्टी की है जो खुश्बू, तू कैसे भूलाएगा..
कभी लिखे थे 2019 में, 8 मार्च के दिन, 8 मार्च को लेकर, 8 मार्च को याद कर रहे हैं, फ़िर अगला 8 मार्च भी आयेगा.. पर जेंडर इक्वलिटी आने में अभी लगभग 248 साल लगेंगे.. मालूम?
मुजफ्फरपुर 🥲

..अब मोतिहारी पहुंच जाएंगे.

.. और जीने को क्या चाहिए.
🥰🥰
हम जीत गए…. *लगान वाले चच्चा*

मैच देखना तो छूट ही गया, और T 20 फॉर्मेट का क्रिकेट के ओरिजनल फॉर्म से कोई लेना देना नहीं है.. सबको इंस्टेंट मजे चाहिए तो लो भई.. और जैसे कि दोस्त अनामिका कहती भी हैं कि T 20 का वर्ल्ड कप तो होना ही नहीं चाहिए़, लीग तक रखो इसे बस.. वही..

फ़िर भी, गुड़गांव में सेमीफाइनल देखा था और फाइनल मोतिहारी.. दोनों मैच इंडिया जीत गई… मैं लक्की हूँ इंडिया के लिए.. नहीं ? Ok.

•••••••••••••••••••••••••••••••••••••



ख़त्म

भविष्य को लेकर जो घबराहट हमारे अंदर होती है—कि कल क्या होगा? कहाँ सोएंगे? क्या खाएंगे? वही घबराहट असल में हमें जीवंत बनाती है। मालूम क्या ? अनिश्चितता का डर तभी तक है जब तक आप बाहर निकल नहीं पड़ते।

जब आप किसी पहाड़ की चोटी पर या किसी नदी किनारे, किसी अनजान शहर के कैफ़े में अकेले बैठते हैं, तब आप ख़ुद से रूबरू होते हैं। भीड़ में हम ‘वो’ होते हैं जो दुनिया हमें देखना चाहती है, लेकिन अकेले सफर में हम ‘वो’ होते हैं जो हम असल में हैं। और घुमक्कड़ी केवल किसी दूसरे अंजान शहर में ही नहीं होती वो अपने घर के एक कमरे से दूसरे कमरे तक की भी हो सकती है. समझे ? नहीं ?

और सबसे ज़रूरी बात- भविष्य एक कोहरा है। कोहरे में चलने का तरीका यह नहीं कि आप सूरज निकलने का इंतज़ार करें, बल्कि यह है कि आप एक कदम बढ़ाएं। जैसे ही आप एक कदम बढ़ाते हैं, अगला रास्ता अपने आप दिखने लगता है। मुझे दिखा है। इसलिए मैं कह रहा हूं।

घुमक्कड़ी हमें सिखाता है कि ‘आज’ ही वह इकलौती चीज़ है जिस पर हमारा हक है।

तो बस.. ख़ुद को देखिए, परखिए, और वो कीजिए जो करने का मन है.. भले ये सहुलियत सबको नहीं हासिल पर उम्मीद पर क़ायम रहिए, ख़ुद को बनावटी लेयर में ढकने मत दीजिए एक ही तो जीवन है.

हो गया तेरा Mantuuuye ?

नहीं..

निकल  चल ..निकल !

आखिरी बात तो कह लेने दे.. कहो..     हां 🫂

चहकते चेहरे, दोस्तों की बातों में अपनापन, छोटी बहनों की समझ, जीवन की संभावनाओं से लबालब भरे हुए शहर, पुराने घरों की आत्मीयता और अनजान रास्तों की धूल हमें वह सब सिखाती है जो कोई किताब नहीं सिखा सकती..         शायद शायद शायद !

Hmmmmmmmmmm…….

[Mantuuuye अब घर जाके पढ़ाई कर ले चुपचाप और कम से कम अगले 6 महीने तक ट्विटर को, गीत, संगीत, फ़िल्म, साहित्य, घुमक्कड़ी को भूल जा] ok. Let’s see.



🙂

मेरी वाली दिल्ली और होली. 🫶

जोगी जोगी जोगी जोगी..

मैं रमता जोगी… 🎶🎶


02 मार्च 2026

प्लूटो

https://worldofplu.wordpress.com/ 💝

तो चला जाए नॉर्थ कैंपस, दिल्ली यूनिवर्सिटी 🌻

नमन भाई 🫂

छोटे भाई के जिगरी हैं, हरदोई जिले से हैं, अरुण कमल की कविताओं पर PhD कर रहे हैं।

और अब चलते हैं मुखर्जी नगर 🤺

🫣
अनुराग भाई, बेगूसराय, परम भाई, रोहतास. 68th BPSC के साथी लोग.

अनुराग भाई, 70th BPSC का इंटरव्यू इसी महीने देने वाले हैं, 71th का मेंस लिखने वाले हैं और इस बार फाइनल PDF में आने वाले हैं 🤞

परम भाई गाड़ी में तेल भराने के लिए रुक गए हैं हमसे कहते हैं मंटू भाई हिम्मत कीजिए एक बार और.. और दिल्ली आइए फ़िर..

और अब गांधी विहार 😍

निखिल भाई 🌼
होलिका दहन, यमुना विहार



03 मार्च 2026 🙂

गोकुलपुरी
स्नेहा का कॉलेज

भीमराव अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी

स्कूल जाती बच्चियां भारतीय समाज के आधे से ज़्यादा मर्दों के लिए सीधे हाथ से जड़ा गया तमाचा है.. मालूम क्या ?

सच है या कोई फिरकी ले रहा 😆
इंतज़ार का रंग 🌈

फ़िर से उड़ चला.
उज्ज्वल भाई, गांव से ही हैं। मैं इनका चाचा लगूंगा रिश्ते में.
हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह.
ग़ालिब अकेडमी.



04 मार्च 2026 💢

होली का दिन 🫟 🫟 🫟.

💝
माई पापा, 2024 होली.
पापा

2021 की गांधी विहार, दिल्ली की होली 😍
खांडवी
ढोकला
भांजी (सान्वी) नाराज़ है मेरे से…मुझे मंटू जी कहती हैं मामा नहीं… कह रही थी वीडियो कॉल पर- आप आए काहे नहीं मंटू जी, जाइए रोइए आप, हम गुच्छा हैं।
सोनी,स्नेहा
स्नेहा के दोस्त लोग..

विवेक (उन्नाव), हर्षित (बांदा) सत्यम (समस्तीपुर) Mantu (मोतिहारी) स्नेहा (मोतिहारी) आकाश (जालौन)

Mantuuu, पब्लिकली नाच भी सकता है, ये मैंने पहली बार जाना. 🫠
मुनिष आंटी 🫂
सोनी का काम

…और जब लगा कि

होली अब ख़त्म है तभी नीचे के भईया भाभी अपने लाव लश्कर के साथ धमक गए और फ़िर फ़िर फ़िर

देवेंद्र भईया, दिल्ली पुलिस में दारोगा हैं।

भईया-भाभी (मकान मालिक)

सोना, रुद्र, अनोखी 🙌



🫟.

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

होली शानदार रही..

घर न रहने का मलाल जाता रहा..

शाम होते होते दिलों दिमाग पर सुकून तारी हो गया.

दूर देश में बैठा हमराही और क़रीब आ गया मेरे…. शायद शायद शायद !

🙃.



दिल्ली • आगरा • जयपुर • वृन्दावन

22 फ़रवरी – 01 मार्च 2026 🙂

21 फ़रवरी 2026

अचानक दिल्ली कैसे ? घर के बचे हुए कामों में टाइल्स, पेंट और बिजली का काम बचा है। टाइल्स वाला काम ख़त्म होने को है और बिजली वाला काम अभी शुरू भी नहीं हुआ है। बिजली के सामान दिल्ली (चाँदनी चौक) पर सस्ते मिल जाते हैं अगर आप डुप्लीकेट के चक्कर में नहीं फंसे तो.. तो इसलिए कई कामों में से एक काम और सबसे मेन काम कि दिल्ली चलते हैं और वहां से बिजली वाला सामान लाया जाए।

20 को रात में चार्ट बना और टिकट कन्फर्म हो गया नहीं तो ये विजिट मार्च अप्रैल तक टलने वाली थी, ख़ैर ख़ैर ख़ैर…..

जब जब मैं मोतिहारी से दूर जाता हूँ, पापा के लिए सबसे मुश्किल काम ऐसे आसान करता हूँ जब से घर बनना शुरू हुआ है। जिन भी मजदूरों को जो रोज के पैसे देने होते हैं उन्हें ऐसे लिखते रहने की सहूलियत.. फ़िर जब मैं लौटता हूँ तो मेन डायरी में चढ़ा देता हूँ
मोतिहारी 😍

अचानक से पिछले 1 महीने से मोतिहारी शहर मुझे बहुत ज़्यादा ही प्यारा लगने लगा है। क्यों क्यों क्यों ? नहीं बता रहा 😅

AC बोगी में जो अपर बर्थ के सर के ऊपर स्टडी लाइट देते हैं, पढ़ने के अलावे फोटो क्लिक करने में लाइट का बेहतर प्रयोग करके शानदार क्लिक के लिए भी यूज हो सकते हैं। मालूम ?


22 फ़रवरी 2026 💥

आनंद विहार रेलवे स्टेशन
Mantu, Sneha, Soni (छोटी बहनें) 🫂

मोतिहारी में ही जब टिकट बुक किया था तो ध्यान रखा था कि संडे को दिन दिल्ली पहुंच के उस दिन संडे बुक मार्केट, दरियागंज जाएंगे .

तो चला जाए

दिल्ली मेट्रो yaaaarrrrrrr
वाणी गुप्ता 🫂

3 साल से हम दोनों ने ग़लत साबित किया कि “Ek ladka aur ek ladki kabhi dost nahi ho sakte.” हमें हिंदी साहित्य, बिहार, एक पूर्व प्रेमिका ने भी, ख़लील जिब्रान, कॉलेज लाइफ ने भी जोड़ा और अब से ? जो भी.. कुछ तो..

ये जो ज़िंदगी है इक रास्ता है, कहाँ जाएगी किसे ख़बर ?

B. Tech कंप्लीट की हैं, प्लेसमेंट हुआ हैं जर्मनी के किसी बड़ी नामी इलेक्ट्रिकल कंपनी में। कहतीं हैं जर्मनी जायेंगी तो मेरे लिए वहां से पेन लायेंगी 😍

संडे बुक मार्केट की बात कर लें ? Yaaarrr मज़ा नहीं आया मुझे, पता नहीं क्यों ? दिल्ली में 6 साल रहते हुए कभी मौका नहीं लगा आने का और जब यहां नहीं हूं तो अचानक फ़रवरी के किसी संडे को टपक गया हूँ। कुछ तो अलग चला मेरे मन में.. या तो शायद इतनी किताबें एक साथ देख के या फिर ये सुन के कि “50rs किलो ले जाओ“। किताबें यार, सपना होती हैं, हम कई दिनों से सोच के रखते हैं कि हां ये वाली पढ़नी है खरीदनी है, और जब ऐसे अचानक बहुत सारी किताबें ऐसे दिख जाए तो मन उचट जाता है।

ये बात मैंने बहनों और वाणी को भी बता दी, वो लोग कहने लगे कि तुम हमारी तौहीन कर रहे यहां साथ में लाके… ख़ैर जो भी

हमें कहीं बैठना था, बातें करनी थीं तो गांधी दर्शन म्यूजियम आ गए, यहां आर्ट एंड क्राफ़्ट की प्रदर्शनी लगी थी, जहां क़यामत से क़यामत तक फ़िल्म के गाने धीमी आवाज में बज रहे थे।

सुनील भईया, खजुराहो से हैं। इन्हें बताया गया कि अभी नवम्बर में मैं खजुराहो ही घूमने गया था तो ख़ुश हो गए और फ़िर जो इनका इंटरोवर्टपना जो गायब हुआ है ना.. hahaha
स्टोन आर्ट.
ख़ुद को बहुत रोकते हुए भी मैंने ये खरीद लीं। खानाबदोश, वाणी दिलाई।
ये सोनी की किताबें.. ये भी गौरव गुप्ता को उठा लाईं.
ये हमारी स्नेहा जी की. मैंने बुक मार्केट में ही कह दिया इसे कि भई तुझे अंग्रेजी इतनी कब से आने लगी। 😅


23 फ़रवरी 2026

आज बिजली वाले काम से पूरे दिन चाँदनी चौक की खाक छाननी है।

अब चला जाए एक बहुत ही ख़ास आदमी से मिलने नोएडा 🙂

वापसी


24 फ़रवरी 2026 🙂

आज कहां जाना है Mantuuu ?

Bol bol bol…bol ना बे ??

पास्ट।        प्रेजेंट।

आगरा में जितने लोग नहीं है उससे ज़्यादा पेठे की दुकान है।
उत्कर्ष भाई 🫂 कानपुर वाला दोस्त वही गाजियाबाद में पासपोर्ट विभाग में नौकरी, दृष्टि ias से साथ हैं हम। ये आदमी जाना कि आगरा जा रहे.. जुगाड में लग गया। और मैं चाहे जितने दिन रुकूं या जितना भी खाऊं इस होटल में, एक रुपया नहीं लगना।


25 फ़रवरी 2026 🫶

आज शिवानी नानी का जन्मदिन भी है। कजिन.
आगरा शहर तो सही है यार.. पुरानी, भीड़ से भरी मगर सुकूनदेह भी, पेठे की दुकानें 😍
पान पेठा

ताज़ महल 2 बार देख चुका हूँ, एक बार छोटे मामा जी के साथ 2017 में, दूसरी बार 2021 में अकेले.. तो अब तीसरी बार भी अकेले क्यूँ ही जाता, इसलिए नहीं गया 🙎

अक्टूबर 2021, जब UP PCS का प्री देने आया था, दिल्ली से.

हाँ बे, Mantuuuye.. यक़ीन कर !

दो पसलियों में कैद था दिल झूम के निकला
शोले की तरह निकला फ़लक चूम के निकला.

और और और

ज़िंदगी से डरते हो ?
ज़िंदगी तो तुम भी हो ज़िंदगी तो हम भी हैं
आदमी से डरते हो
आदमी तो तुम भी हो आदमी तो हम भी हैं
आदमी से डरते हो ?
आदमी ज़बाँ भी है आदमी बयाँ भी है
जो अभी नहीं आई उस घड़ी से डरते हो
उस घड़ी की आमद की आगही से डरते हो ~ नून मीम रशीद


26 फ़रवरी 2026 😎

अब चला जाए राजस्थान 🤞

मैं हूँ भले बिहार से पर मैं हूँ राजस्थान का.. हाँ.

स्कूलिंग अजमेर से हुई

कॉलेज (आधा B.Tech) जयपुर से और अब बाकी बचे आधा जीवन सोचा है राजस्थान आके बस जाऊं, देखते क्या होता आगे…

श्रीपाल भाई, 2018 के साहित्य आज तक से शुरू हुई दोस्ती यहां तक.. आने वाले समय में राजस्थान के किसी जिले के अधिकारी बन रहे हैं, नवंबर में शादी है यानी यानी मेरा जोधपुर घूमने का योग बन रहा है 😌
2018 😍
सर, हम साइंस की तरफ़ से हैं, साइंस की तरफ़ से
प्रबोध अंकल जी 🙏

जवाहर कला केंद्र, जयपुर 🥰
तरुण भईया 🙏
रश्मिका-विजय 💝
O’Romeo फ़िर से 😍

🥰


27 फ़रवरी 2026 💥

पहली बार ice tea पिए.
पूनम मैडम, Mantuuu, श्री पाल भाई
एक जैसे लोग
दीवाने लोग
उल्टी धार बहाने वाले लोग
सुंदर लोग
मुलायम लोग
किताबों में डूबने वाले लोग
प्रेम में पार लगने वाले लोग

Mantuuu जैसे लोग 🙂
कभी कभार चलता है बे Mantuuu!

पत्रिका गेट, जयपुर 😍


28 फ़रवरी 2026 🫶

.. वापस फ़िर दिल्ली

Good morning दिल्ली.
अजय भाई 🫂
अजय भाई और अमूल्या 💝

इन दोनों के लिए विशेष दुआएं 🙏

अजय भाई को जोश टॉक्स पर सुना जाए

https://youtu.be/T30_7b-feVM?si=tH2RwVYW-4BEoGKO


अब चला जाए गाज़ियाबाद उत्कर्ष के पास, जिसकी शादी में कानपुर आए थे।

उत्तराखंड वाले जितेंद्र भईया (जौनसार इलाका वाले) और भाभी जी को तहेदिल से शुक्रिया

01 मार्च 2026 🌈

श्री धाम वृन्दावन 🙏

उत्कर्ष और ख़ुशी, नवम्बर 2025 में शादी हुई है और हाल ही में इन्हें सरकारी फ्लैट एलॉट हुआ है।

नितिन भईया, उत्कर्ष, ख़ुशी, Mantuuu… चला जाए अब…

उसके पहले 2019 में भी श्री धाम वृन्दावन की होली देखने, महसूस करने का मौका मिला था, तो पहले ये देखिए

💕
श्री बिहारी जी की कृपा रही, VIP दर्शन 🫣

नहीं तो आप होली के वक़्त एक बार यहां आके देखिए.

सोनी 🫂
चिल्ला, चाट, लस्सी, पुड़ी सब्जी
कांजीवड़ा
निधि वन 🥰
Santuuu भाई, और मैं Mantuuu तो हम अच्छे दोस्त हो गए, 9th class में पढ़ते हैं, कुंज गलियन में मज़े करते हैं.

…वापसी अब

दिल्ली चला जाए



वाणी गुप्ता 🫂 दीवाने लोग, बुक मार्केट, दरियागंज

पूनम मैडम 🙌 एक जैसे लोग, गोपालपुरा, जयपुर

श्री पाल भाई, अजय भाई 🤝.. दिसंबर 2018 में किसी दिन अजय भाई श्री पाल भाई के रूम पर थे तब मैं भी श्री पाल भाई से मिलने आया था वहीं पर अजय भाई से जान पहचान हुई थी।

अमूल्या 🫶 हमराही लोग, मुखर्जी नगर, दिल्ली

नितिन 🎵 गाने सुनने के मामले में एक नंबर, गाज़ियाबाद

ख़ुशी 🫣 गाज़ियाबाद, वेब सीरीज और फ़िल्मों के मामले में मुझे टक्कर दे सकतीं हैं, शायद !

इस बार उत्कर्ष ने पिछली बार की तरह जब हम उत्तराखंड गए थे, मेरे पसंदीदा गानों के लिरिक्स नहीं बिगाड़े, शायद ख़ुशी और सोनी थीं इसलिए.. शायद क्या इसलिए ही नहीं बिगाड़े.. पर मुझे मालूम है इसके अंदर का कीड़ा.. ये आदमी फोन पर मुझ.. बिगाड़े हुए लिरिक्स सुनाएगा.


Mantuuuye.. 21 फ़रवरी से लेकर अब तक तू घूम ही रहा है.. कब थकेगा रे तू ?

थम जा.. जीवन अभी आगे भी बहुत है.    

Chupppppppppp!




पूर्व चलने के बटोही,            कवि: हरिवंश राय बच्चन


पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी,
हाल इसका जान पड़ता है न औरों की जबानी,
अनगिनत राही गए इस राह से, उनका पता क्या?
पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी,
यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,
खोल इसका अर्थ, पंथी, पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
यह बुरा है या कि अच्छा, व्यर्थ दिन इस पर बिताना,
जब असंभव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना,
तू इसे सत् मान, अपनी राह को अविरल बना ले,
मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,
खोल इसका अर्थ, पंथी, पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

🙂

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

Mantuuuye घर लौट जा.

Ok.

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

वाल्मीकिनगर, पश्चिमी चंपारण ✨

20, 21, 22, 23 जनवरी 2026 🙂

सबसे छोटी बुआ (ममता) का घर यही वाल्मीकिनगर में है फिर भी मैं गिन के तीसरी बार आया हूँ अबकी 😐

पहली बार दादी और नानी के साथ छोटा था तब, इतना छोटा कि कुछ ही बात याद रह गईं आज तलक। शायद 2000-2001 की बात होगी। माघ महीने में यहाँ प्रसिद्ध मेला लगता है, लोग गंडक नदी (त्रिवेणी) में स्नान करने आते हैं। तो मौनी अमावस्या,वसंत पंचमी और तेरस इन तीन दिन गंडक नदी में स्नान होता है। तो घर पर ऐसा था कि हर साल कोई न कोई इस अवसर पर वाल्मीकिनगर आता ही था।

दूसरी बार आया 2014 में, जब फुफा जी पैक्स का चुनाव लड़ रहे थे.. तब कुछ 5-7 दिन के लिए इसी ठंड के मौसम में ही आया था, जहाँ तक याद है।

तीसरी बार अब….

पहली बार की तीन बात जिन्हें नहीं भूल पाया
एक तो गंडक बैराज में जमा एक साथ इतना ज़्यादा पानी देखकर डर गया था कि इतना पानी जमा कैसे हो सकता है।
दूसरी बात, यहाँ के हाइड्रोपावर के अंदर घूमते हुए मशीन और पानी की आवाज
तीसरी बात गन्ने के खेत और नहर से खेतों तक पानी ले जाने के लिए बने नालियों के ऊपर चलते जाने का।

दूसरी बार की एक बात जो याद बन गई…यही रहते हुए ये कहानी (3 तारीख,1000 ₹ और पनीर की सब्जी) लिखी थी, ब्लॉग पर डाला और वहाँ से वो कहानी दैनिक भास्कर में छप भी गया था।


तीसरी बार की यादें नीचे हैं अब 🙂

गुड्डू (बुआ का इकलौता लड़का) तब से कह रहा है कि भईया आइए, जब से नीतीश सरकार ने वाल्मीकिनगर पर कुछ ज़्यादा ही ध्यान दिया। और इस जगह में वो पोटेंशियल है भी कि यह बिहार के टॉप टूरिस्ट प्वाइंट बन जाए और बन भी गया है अब…

ये जब 2018 में प्रतीक, गुड्डू भईया (हां, जिसकी शादी पहले होगी वो बड़ा कहलाएगा) और मैं, दिल्ली में साथ रहते थे।

मंटू (ब्लॉग लिख रहे हैं) अजय भाई (आगरा से हैं, CISF में अफ़सर हैं) गुड्डू (घर गृहस्थी में लग गया है) श्रीपाल भाई (जोधपुर से हैं, इस बार RPSC का इंटरव्यू दिए हैं) प्रतीक भाई (पटना में गर्दा मचा रहे हैं)
गुड्डू वही शेखर सुमन


अब घूमा जाए…

20 जनवरी 2026 🙂

पहले केवल मैं आने वाला था और वो भी नए साल पर ही। ठंड की वज़ह से नहीं आ पाया। फ़िर हुआ कि SI वाला एग्जाम देने बेतिया जाओगे तब चले जाना, तबतक सोनी-स्नेहा जी आ गईं दिल्ली से, तो हम तीनों का प्लान हुआ… आखिरी में, पापा, स्नेहा और मेरा तय हुआ।
भईया, क्रीम कलर का जो कैप है वो ही लाइए”
ममता बुआ और अयांश बाबू

मैं बड़ा पापा बन गया हूँ।

मेला ही घूम लिया जाए पहले…

जो नहीं किया करके देखना

सांस रोक के मर के देखना… 🎶🎶

विशाल भारद्वाज के गाने ♥️ (ओ रोमियो, आ रही है फ़रवरी में)



21 जनवरी 2026 🙂

जहां भी जाओ दौड़ते रहो 🙂‍↕️

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नरदेवी मंदिर, टाइगर रिजर्व, चला जाए

पापा मेरे 🫂
😍

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अब नेपाल चला जाए…

मंटू ड्राइवर.. ड्राइवर ऐसे ही तो लगते हैं सच में 😁

श्री गजेंद्र मोक्ष नारायण मंदिर की कहानी श्रीमद्भागवत पुराण के एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक प्रसंग पर आधारित है। यह मंदिर और इसकी कथा भक्त की पुकार और भगवान की शरणागति की शक्ति को दर्शाती है।


मुख्य रूप से यह मंदिर बिहार के सोनपुर (हरिहर क्षेत्र) और नेपाल के नवलपुर (गंडकी नदी के तट) में स्थित है, जिन्हें इस लीला का वास्तविक स्थल माना जाता है।


पौराणिक कथा: गज और ग्राह का युद्ध
प्राचीन काल में त्रिकुट पर्वत के घने जंगलों में हाथियों का राजा ‘गजेंद्र’ रहता था। वह अत्यंत बलशाली था और अपने परिवार के साथ सुखी जीवन जी रहा था।
संकट की शुरुआत: एक बार प्यास लगने पर गजेंद्र अपनी हथिनियों और बच्चों के साथ एक विशाल सरोवर (गंडकी नदी का क्षेत्र) में जल पीने गया। जैसे ही उसने पानी में पैर रखा, वहां रहने वाले एक शक्तिशाली ‘ग्राह’ (मगरमच्छ) ने उसका पैर पकड़ लिया।


हजार वर्षों का संघर्ष: गजेंद्र ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन जल के भीतर मगरमच्छ की शक्ति अधिक थी। यह संघर्ष वर्षों तक चला। धीरे-धीरे गजेंद्र का बल क्षीण होने लगा और उसके परिवार के सदस्य भी उसे असहाय छोड़कर चले गए।

भगवान की पुकार और मोक्ष
जब गजेंद्र पूरी तरह हार गया और उसे मृत्यु निकट दिखी, तब उसे अपने पूर्व जन्म की भक्ति याद आई। उसने एक कमल का फूल अपनी सूंड में उठाया और दुख भरी पुकार से भगवान नारायण की स्तुति की।
“हे गोविंद! हे नारायण! मेरी रक्षा करो।”
भक्त की पुकार सुनते ही भगवान विष्णु नंगे पैर, गरुड़ पर सवार होकर तुरंत वहां प्रकट हुए। उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर दिया और गजेंद्र को जीवनदान दिया। इसी कारण इस स्थान को ‘गजेंद्र मोक्ष’ कहा जाता है।

नेपाल में रजाई सस्ते और अच्छे मिल जाते हैं।

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अब शाम को वापस बैराज चलते हैं। गंडक बैराज ऐसी जगह है जहां आप दिन में कभी भी जा सकते हैं, दिन भर नदी किनारे बैठ के पढ़ सकते हैं, गाने सुन सकते हैं गा सकते हैं, सो सकते हैं, अपने नाना जी की बातों में न आकर, न ही डरते हुए शादी करने से एकदम मना कर सकते हैं 😐

तृतिया का चांद
💕


22 जनवरी 2026 🎊

4 मई 1959 🫡
मेरे भटक जाने का सबब इनसे पूछा जाए..
तिरहुत नहर, इस नहर से ही हमारे गांव के खेतों तक में पानी जाता है।


हाइड्रो पावर स्टेशन

बचपन की याद से जुड़ा यही वो पावर स्टेशन है, बुआ के घर के एकदम पीछे ही।

पंकज भईया, गुड्डू पहले ही फोन करके बात कर लिया था पंकज भईया से। नेकदिल आदमी हैं, घंटे भर टाइम देकर पूरे पावर स्टेशन के बारे में बताया और मेरे सारे सवालों के जवाब भी दिए। दरअसल फ्री थे, डैम के गेट में खराबी आई तो नदी से पानी गायब और हमलोग बोटिंग से महरूम रह गए तो सोचा गया पावर स्टेशन घूम आया जाए, उसी पावर स्टेशन को नदी का पानी नहीं मिला तो पंकज भईया फ्री थे। ….इसलिए दुनिया गोल के आस-पास है।
ऐसी दो यूनिट और हैं। ज़्यादातर बारी 1 या 2 यूनिट ही चलता है, पानी ज़्यादा होने पर ही तीसरा यूनिट शुरू किया जाता है।

हवाई अड्डा, ज्यादातर VIP लोगों और गाय भैंसों के लिए...



तो आप कब आ रहे हैं वाल्मीकिनगर ?

23 जनवरी 2026, वसंत पंचमी 🙂

कचरे वाला Mantuuu 😎
थम्प कुमारी पांडे, जानकी पांडे, खरसौन भंडारी अम्मा 🫂

मोतिहारी नहीं लौटना होता तो थम्प अम्मा के घर चाय पीना छोड़ने के बाद भी पी सकता था आज.. ख़ैर, अगली बार का उन्हें बोल आया हूँ कि चाय उधार रहा।

पानी बहुत ठंडा था बे…


लौरिया, नंदनगढ़


ख़त्म ख़त्म ख़त्म 😁

चलिए, वापसी कीजिए अब…

अब कहां मिलेंगे ? ? ?

सोचा है, ठंड कम हो जाए तो नाना जी और मैं, रामेश्वरम जाए, केवल मैं और नाना जी, नानी भी नहीं 😐।  देखते हैं….



सुंदर चंद ठाकुर की पंक्तियाँ हैं –

ताक़त कभी हक़ की बात नहीं करती
प्रेम की माँग नहीं करता भूखा आदमी

सूखा कंठ रक्त नहीं दो घूँट पानी माँगता है
विपदाओं को झेलने और ख़ुशियों को जीने की कोई उम्र नहीं होती

अत्याचारों को सहने का कोई तजुर्बा नहीं होता
हम मरते हुए भी जीते हैं और जीते हुए भी मरते हैं


…और सबसे बड़ी बात जो समझने की है वो ये है मंटू कि –

“….tumhe agar pataa hai tumhe kya chahiye, or tum sun rahe ho apne conscience ki

Toh tum sahi ho
Koi kuch b kahe” 🖤

🙂