22 फ़रवरी – 01 मार्च 2026 🙂
21 फ़रवरी 2026
अचानक दिल्ली कैसे ? घर के बचे हुए कामों में टाइल्स, पेंट और बिजली का काम बचा है। टाइल्स वाला काम ख़त्म होने को है और बिजली वाला काम अभी शुरू भी नहीं हुआ है। बिजली के सामान दिल्ली (चाँदनी चौक) पर सस्ते मिल जाते हैं अगर आप डुप्लीकेट के चक्कर में नहीं फंसे तो.. तो इसलिए कई कामों में से एक काम और सबसे मेन काम कि दिल्ली चलते हैं और वहां से बिजली वाला सामान लाया जाए।
20 को रात में चार्ट बना और टिकट कन्फर्म हो गया नहीं तो ये विजिट मार्च अप्रैल तक टलने वाली थी, ख़ैर ख़ैर ख़ैर…..



अचानक से पिछले 1 महीने से मोतिहारी शहर मुझे बहुत ज़्यादा ही प्यारा लगने लगा है। क्यों क्यों क्यों ? नहीं बता रहा 😅


22 फ़रवरी 2026 💥




मोतिहारी में ही जब टिकट बुक किया था तो ध्यान रखा था कि संडे को दिन दिल्ली पहुंच के उस दिन संडे बुक मार्केट, दरियागंज जाएंगे .
तो चला जाए







3 साल से हम दोनों ने ग़लत साबित किया कि “Ek ladka aur ek ladki kabhi dost nahi ho sakte.” हमें हिंदी साहित्य, बिहार, एक पूर्व प्रेमिका ने भी, ख़लील जिब्रान, कॉलेज लाइफ ने भी जोड़ा और अब से ? जो भी.. कुछ तो..
ये जो ज़िंदगी है इक रास्ता है, कहाँ जाएगी किसे ख़बर ?
B. Tech कंप्लीट की हैं, प्लेसमेंट हुआ हैं जर्मनी के किसी बड़ी नामी इलेक्ट्रिकल कंपनी में। कहतीं हैं जर्मनी जायेंगी तो मेरे लिए वहां से पेन लायेंगी 😍
संडे बुक मार्केट की बात कर लें ? Yaaarrr मज़ा नहीं आया मुझे, पता नहीं क्यों ? दिल्ली में 6 साल रहते हुए कभी मौका नहीं लगा आने का और जब यहां नहीं हूं तो अचानक फ़रवरी के किसी संडे को टपक गया हूँ। कुछ तो अलग चला मेरे मन में.. या तो शायद इतनी किताबें एक साथ देख के या फिर ये सुन के कि “50rs किलो ले जाओ“। किताबें यार, सपना होती हैं, हम कई दिनों से सोच के रखते हैं कि हां ये वाली पढ़नी है खरीदनी है, और जब ऐसे अचानक बहुत सारी किताबें ऐसे दिख जाए तो मन उचट जाता है।
ये बात मैंने बहनों और वाणी को भी बता दी, वो लोग कहने लगे कि तुम हमारी तौहीन कर रहे यहां साथ में लाके… ख़ैर जो भी




हमें कहीं बैठना था, बातें करनी थीं तो गांधी दर्शन म्यूजियम आ गए, यहां आर्ट एंड क्राफ़्ट की प्रदर्शनी लगी थी, जहां क़यामत से क़यामत तक फ़िल्म के गाने धीमी आवाज में बज रहे थे।








23 फ़रवरी 2026
आज बिजली वाले काम से पूरे दिन चाँदनी चौक की खाक छाननी है।








अब चला जाए एक बहुत ही ख़ास आदमी से मिलने नोएडा 🙂







24 फ़रवरी 2026 🙂
आज कहां जाना है Mantuuu ?
Bol bol bol…bol ना बे ??














25 फ़रवरी 2026 🫶
















ताज़ महल 2 बार देख चुका हूँ, एक बार छोटे मामा जी के साथ 2017 में, दूसरी बार 2021 में अकेले.. तो अब तीसरी बार भी अकेले क्यूँ ही जाता, इसलिए नहीं गया 🙎




हाँ बे, Mantuuuye.. यक़ीन कर !
दो पसलियों में कैद था दिल झूम के निकला
शोले की तरह निकला फ़लक चूम के निकला.
और और और
ज़िंदगी से डरते हो ?
ज़िंदगी तो तुम भी हो ज़िंदगी तो हम भी हैं
आदमी से डरते हो
आदमी तो तुम भी हो आदमी तो हम भी हैं
आदमी से डरते हो ?
आदमी ज़बाँ भी है आदमी बयाँ भी है
जो अभी नहीं आई उस घड़ी से डरते हो
उस घड़ी की आमद की आगही से डरते हो ~ नून मीम रशीद
26 फ़रवरी 2026 😎
अब चला जाए राजस्थान 🤞
मैं हूँ भले बिहार से पर मैं हूँ राजस्थान का.. हाँ.
स्कूलिंग अजमेर से हुई
कॉलेज (आधा B.Tech) जयपुर से और अब बाकी बचे आधा जीवन सोचा है राजस्थान आके बस जाऊं, देखते क्या होता आगे…































🥰
27 फ़रवरी 2026 💥










दीवाने लोग
उल्टी धार बहाने वाले लोग
सुंदर लोग
मुलायम लोग
किताबों में डूबने वाले लोग
प्रेम में पार लगने वाले लोग
Mantuuu जैसे लोग 🙂




28 फ़रवरी 2026 🫶
.. वापस फ़िर दिल्ली









इन दोनों के लिए विशेष दुआएं 🙏
अजय भाई को जोश टॉक्स पर सुना जाए
https://youtu.be/T30_7b-feVM?si=tH2RwVYW-4BEoGKO
अब चला जाए गाज़ियाबाद उत्कर्ष के पास, जिसकी शादी में कानपुर आए थे।


01 मार्च 2026 🌈
श्री धाम वृन्दावन 🙏
उत्कर्ष और ख़ुशी, नवम्बर 2025 में शादी हुई है और हाल ही में इन्हें सरकारी फ्लैट एलॉट हुआ है।




उसके पहले 2019 में भी श्री धाम वृन्दावन की होली देखने, महसूस करने का मौका मिला था, तो पहले ये देखिए










नहीं तो आप होली के वक़्त एक बार यहां आके देखिए.

















…वापसी अब
दिल्ली चला जाए…






वाणी गुप्ता 🫂 दीवाने लोग, बुक मार्केट, दरियागंज
पूनम मैडम 🙌 एक जैसे लोग, गोपालपुरा, जयपुर
श्री पाल भाई, अजय भाई 🤝.. दिसंबर 2018 में किसी दिन अजय भाई श्री पाल भाई के रूम पर थे तब मैं भी श्री पाल भाई से मिलने आया था वहीं पर अजय भाई से जान पहचान हुई थी।
अमूल्या 🫶 हमराही लोग, मुखर्जी नगर, दिल्ली
नितिन 🎵 गाने सुनने के मामले में एक नंबर, गाज़ियाबाद
ख़ुशी 🫣 गाज़ियाबाद, वेब सीरीज और फ़िल्मों के मामले में मुझे टक्कर दे सकतीं हैं, शायद !
इस बार उत्कर्ष ने पिछली बार की तरह जब हम उत्तराखंड गए थे, मेरे पसंदीदा गानों के लिरिक्स नहीं बिगाड़े, शायद ख़ुशी और सोनी थीं इसलिए.. शायद क्या इसलिए ही नहीं बिगाड़े.. पर मुझे मालूम है इसके अंदर का कीड़ा.. ये आदमी फोन पर मुझ.. बिगाड़े हुए लिरिक्स सुनाएगा.
Mantuuuye.. 21 फ़रवरी से लेकर अब तक तू घूम ही रहा है.. कब थकेगा रे तू ?
थम जा.. जीवन अभी आगे भी बहुत है.
Chupppppppppp!
पूर्व चलने के बटोही, कवि: हरिवंश राय बच्चन
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी,
हाल इसका जान पड़ता है न औरों की जबानी,
अनगिनत राही गए इस राह से, उनका पता क्या?
पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी,
यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,
खोल इसका अर्थ, पंथी, पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
यह बुरा है या कि अच्छा, व्यर्थ दिन इस पर बिताना,
जब असंभव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना,
तू इसे सत् मान, अपनी राह को अविरल बना ले,
मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,
खोल इसका अर्थ, पंथी, पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
🙂
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Mantuuuye घर लौट जा.
Ok.
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