20, 21, 22, 23 जनवरी 2026 🙂
सबसे छोटी बुआ (ममता) का घर यही वाल्मीकिनगर में है फिर भी मैं गिन के तीसरी बार आया हूँ अबकी 😐
पहली बार दादी और नानी के साथ छोटा था तब, इतना छोटा कि कुछ ही बात याद रह गईं आज तलक। शायद 2000-2001 की बात होगी। माघ महीने में यहाँ प्रसिद्ध मेला लगता है, लोग गंडक नदी (त्रिवेणी) में स्नान करने आते हैं। तो मौनी अमावस्या,वसंत पंचमी और तेरस इन तीन दिन गंडक नदी में स्नान होता है। तो घर पर ऐसा था कि हर साल कोई न कोई इस अवसर पर वाल्मीकिनगर आता ही था।
दूसरी बार आया 2014 में, जब फुफा जी पैक्स का चुनाव लड़ रहे थे.. तब कुछ 5-7 दिन के लिए इसी ठंड के मौसम में ही आया था, जहाँ तक याद है।
तीसरी बार अब….
पहली बार की तीन बात जिन्हें नहीं भूल पाया
एक तो गंडक बैराज में जमा एक साथ इतना ज़्यादा पानी देखकर डर गया था कि इतना पानी जमा कैसे हो सकता है।
दूसरी बात, यहाँ के हाइड्रोपावर के अंदर घूमते हुए मशीन और पानी की आवाज
तीसरी बात गन्ने के खेत और नहर से खेतों तक पानी ले जाने के लिए बने नालियों के ऊपर चलते जाने का।
दूसरी बार की एक बात जो याद बन गई…यही रहते हुए ये कहानी (3 तारीख,1000 ₹ और पनीर की सब्जी) लिखी थी, ब्लॉग पर डाला और वहाँ से वो कहानी दैनिक भास्कर में छप भी गया था।
तीसरी बार की यादें नीचे हैं अब 🙂
गुड्डू (बुआ का इकलौता लड़का) तब से कह रहा है कि भईया आइए, जब से नीतीश सरकार ने वाल्मीकिनगर पर कुछ ज़्यादा ही ध्यान दिया। और इस जगह में वो पोटेंशियल है भी कि यह बिहार के टॉप टूरिस्ट प्वाइंट बन जाए और बन भी गया है अब…
ये जब 2018 में प्रतीक, गुड्डू भईया (हां, जिसकी शादी पहले होगी वो बड़ा कहलाएगा) और मैं, दिल्ली में साथ रहते थे।


अब घूमा जाए…
20 जनवरी 2026 🙂






मैं बड़ा पापा बन गया हूँ।



जो नहीं किया करके देखना
सांस रोक के मर के देखना… 🎶🎶
विशाल भारद्वाज के गाने ♥️ (ओ रोमियो, आ रही है फ़रवरी में)

21 जनवरी 2026 🙂












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नरदेवी मंदिर, टाइगर रिजर्व, चला जाए









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अब नेपाल चला जाए…







श्री गजेंद्र मोक्ष नारायण मंदिर की कहानी श्रीमद्भागवत पुराण के एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक प्रसंग पर आधारित है। यह मंदिर और इसकी कथा भक्त की पुकार और भगवान की शरणागति की शक्ति को दर्शाती है।
मुख्य रूप से यह मंदिर बिहार के सोनपुर (हरिहर क्षेत्र) और नेपाल के नवलपुर (गंडकी नदी के तट) में स्थित है, जिन्हें इस लीला का वास्तविक स्थल माना जाता है।
पौराणिक कथा: गज और ग्राह का युद्ध
प्राचीन काल में त्रिकुट पर्वत के घने जंगलों में हाथियों का राजा ‘गजेंद्र’ रहता था। वह अत्यंत बलशाली था और अपने परिवार के साथ सुखी जीवन जी रहा था।
संकट की शुरुआत: एक बार प्यास लगने पर गजेंद्र अपनी हथिनियों और बच्चों के साथ एक विशाल सरोवर (गंडकी नदी का क्षेत्र) में जल पीने गया। जैसे ही उसने पानी में पैर रखा, वहां रहने वाले एक शक्तिशाली ‘ग्राह’ (मगरमच्छ) ने उसका पैर पकड़ लिया।
हजार वर्षों का संघर्ष: गजेंद्र ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन जल के भीतर मगरमच्छ की शक्ति अधिक थी। यह संघर्ष वर्षों तक चला। धीरे-धीरे गजेंद्र का बल क्षीण होने लगा और उसके परिवार के सदस्य भी उसे असहाय छोड़कर चले गए।
भगवान की पुकार और मोक्ष
जब गजेंद्र पूरी तरह हार गया और उसे मृत्यु निकट दिखी, तब उसे अपने पूर्व जन्म की भक्ति याद आई। उसने एक कमल का फूल अपनी सूंड में उठाया और दुख भरी पुकार से भगवान नारायण की स्तुति की।
“हे गोविंद! हे नारायण! मेरी रक्षा करो।”
भक्त की पुकार सुनते ही भगवान विष्णु नंगे पैर, गरुड़ पर सवार होकर तुरंत वहां प्रकट हुए। उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर दिया और गजेंद्र को जीवनदान दिया। इसी कारण इस स्थान को ‘गजेंद्र मोक्ष’ कहा जाता है।







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अब शाम को वापस बैराज चलते हैं। गंडक बैराज ऐसी जगह है जहां आप दिन में कभी भी जा सकते हैं, दिन भर नदी किनारे बैठ के पढ़ सकते हैं, गाने सुन सकते हैं गा सकते हैं, सो सकते हैं, अपने नाना जी की बातों में न आकर, न ही डरते हुए शादी करने से एकदम मना कर सकते हैं 😐







22 जनवरी 2026 🎊











































हाइड्रो पावर स्टेशन
बचपन की याद से जुड़ा यही वो पावर स्टेशन है, बुआ के घर के एकदम पीछे ही।










हवाई अड्डा, ज्यादातर VIP लोगों और गाय भैंसों के लिए...


तो आप कब आ रहे हैं वाल्मीकिनगर ?
23 जनवरी 2026, वसंत पंचमी 🙂









मोतिहारी नहीं लौटना होता तो थम्प अम्मा के घर चाय पीना छोड़ने के बाद भी पी सकता था आज.. ख़ैर, अगली बार का उन्हें बोल आया हूँ कि चाय उधार रहा।








लौरिया, नंदनगढ़










ख़त्म ख़त्म ख़त्म 😁

अब कहां मिलेंगे ? ? ?
सोचा है, ठंड कम हो जाए तो नाना जी और मैं, रामेश्वरम जाए, केवल मैं और नाना जी, नानी भी नहीं 😐। देखते हैं….
सुंदर चंद ठाकुर की पंक्तियाँ हैं –
ताक़त कभी हक़ की बात नहीं करती
प्रेम की माँग नहीं करता भूखा आदमी
सूखा कंठ रक्त नहीं दो घूँट पानी माँगता है
विपदाओं को झेलने और ख़ुशियों को जीने की कोई उम्र नहीं होती
अत्याचारों को सहने का कोई तजुर्बा नहीं होता
हम मरते हुए भी जीते हैं और जीते हुए भी मरते हैं
…और सबसे बड़ी बात जो समझने की है वो ये है मंटू कि –
“….tumhe agar pataa hai tumhe kya chahiye, or tum sun rahe ho apne conscience ki
Toh tum sahi ho
Koi kuch b kahe” 🖤
🙂