🌥️ 2025 🌤️

2024 के आखिर में 69th BPSC का फाइनल रिजल्ट आया और फिर इस बार भी PDF में नाम नहीं था. हां, 68th के बजाय अबकी और कम नंबर से रह गया.

2025 की शुरुआत शांत रही थी, भीतर से शांत। न कोई मलाल न कोई ख़ुशी..न किसी के बंधन में रहा, न किसी को बंदिश में रखा। घर पर रहते हुए, घर का खाना खाते हुए, गांव-खेत घूमते हुए, कम बोलते हुए, ज्यादा सुनते हुए, आग सेंकते हुए, किताब पढ़ते हुए, थोड़ा कम मोबाइल चलाते हुए.. प्री के रिजल्ट के इंतज़ार में… 2025 की शुरुआत.

जनवरी

दिल्ली से दाना-पानी उठ गया था। किताबें लौटते-लौटते ठिकाने पर आ गईं।
70th मेंस की तैयारी
भांजा- गर्वित, भांजी- सान्वी
देश मेरे.. 🇮🇳

70th BPSC प्री हो गया.


फ़रवरी


मार्च

पवन भैया की शादी (मेरे से छोटे भाई-बहनों की शादी हो रही, पर कोई ना ये तो शास्त्रों में लिखा है कि जिसकी शादी पहले होगी वो बड़ा कहलाएगा)
जितना परेशान रवि मुंबई रहते हुए गर्वित को किया था, उसने सूद समेत वसूल लिया।
होली
रवि को कार चलाना सीखा देते हैं.


अप्रैल

सबकुछ करने आना चाहिए, भई
पटना, मेंस देने

गाम घर का भोज


मई

2nd फ्लोर
मेंस ख़त्म, अब मोतिहारी में घर का काम शुरू
नानी 🤩
लगभग हर संडे को दोनों आ जाते थे, घर बनवाने में मदद करने


जून

नाना-नानी, दूसरी मंजिल के ढलाई के समय


जुलाई

3rd फ्लोर
गर्वित का जन्मदिन, 5 साल का हो गया।


अगस्त


सितंबर

सिवान, 71th प्री देने
दुर्गापूजा


अक्टूबर

कांतारा


नवम्बर

गढ़ी माई, नेपाल
कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान


😍
उत्कर्ष की शादी, कानपुर
बनारस
खजुराहो
झांसी
ओरछा
दतिया
पटना
…वापस मजदूरी शुरू



दिसंबर

जो काम भईया करेगा वही ये छुटकी भी करेगी.
तेरे इश्क़ में
धुरंधर

हाहाहा

सैफ़ की बहन की शादी

गुगू, टुगु- पड़ोसी हैं, दिनभर में 50 बारी खिड़की पर आकर, हर आने-जाने वाले को अंकल-अंकल करते रहेंगे, कहेंगे कुछ नहीं।

इनकी मां नहीं रही, ठंड की वज़ह से. मोहल्ले के छोटे बच्चों ने एकदम सलीके से इनका ध्यान रखा है।
मई से शुरू हुआ काम अभी 2026 के भी मई तक जाएगा 😐

70th BPSC का मेंस भी नहीं हुआ और 71th प्री भी नहीं। कमी अपनी साइड ही रही होगी. कमी दूर करेंगे और ये उम्मीद कि सबकुछ अपनी जगह पर ठीक हो जाएगा..हो जाना चाहिए।

पूजा उपाध्याय (‘तीन रोज़ इश्क़‘ वाली) मैम लिखती भी हैं कि जल, वायु, अग्नि, आकाश, और पृथ्वी के अलावा, हम इंतज़ार के भी बने हैं।

दिलीप भैया (ट्विटर वाले) कहे भी थे 68th रिजल्ट के बाद-

कहते हैं कि समय से पहले और वक्त से ज्यादा किसी को नहीं मिलता। सच कहते होंगे। पर मुझे लगता है कि उन लोगो ने आदम ज़ात की दृढ़ शक्ति का नाम नही सुना होगा। ये मंत्र रट लो बस:”आज नहीं तो कल होगा, कल नहीं तो परसों, ये भी नहीं वो भी नहीं, जो मैंने चाहा है हू-ब-हू वही होगा।” पूर्ण वीराम।

2025 बीत गया, 2026 आ रहा है.. अगले 5 साल में हम लोग कहाँ होंगे ? हमारा जीवन किस रस्ते को चलेगा ? कौन जानता है ? कोई तो है जो जानता है.. कोई तो है।

“दो बारिशों के बीच” कविता संग्रह से राजेंद्र धोड़पकर की एक कविता है –

बीते हुए दिन

बहुत अच्छे दिन थे दिन जो बीत गए
बीते हुए दिन कौंधते हैं स्मृतियों में
प्रिय गंध की तरह, सड़कों पर बदहवास
भटकते हुए अँधेरे में, जो फेफड़ों में
झरता जाता है कोयले की धूल की तरह
बीते हुए दिन बहुत अच्छे दिन थे
छूटी हुई जगहों में बिताए हुए दिन
जगहें अच्छी थीं कितनी जो छूट गईं
लगातार असुरक्षा, अपमान और उदासी
रही होगी उन जगहों और दिनों में भी
यह सोचा जा सकता है
पर जैसे-जैसे दिन बीते हुए दिन होते जाते हैं
उनसे जुड़े हुए दुःखों की स्मृतियाँ घुल जाती हैं
धीमे-धीमे हवा में
अच्छे लगेंगे ये दिन भी जब ये भी बीते हुए दिन
हो जाएँगे
क्या मज़े की बात है कि अच्छे दिन होने के लिए
ज़रूरी है कि दिन
बीते हुए दिन हो जाएँ।


अब 2026 में कहाँ मिलेंगे ? मिलेंगे..मिलेंगे…. कहीं तो मिलेंगे 🙂