कानपुर. 22 नवम्बर 2025









‘ राजा जी के दिलवा टूट जाई ‘ गाने पर रवि का डांस 😘






…उत्कर्ष अब शायद ही लिख पाएगा निष्कर्ष 🫢


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उत्कर्ष, रवि, पंकज और मेरी दोस्ती की शुरुआत- कोचिंग (2018) के दूसरे दिन मैं, रवि-पंकज के बगल वाली सीट पर बैठा। रवि-पंकज एक दूसरे को इलाहाबाद से ही जानते थे। इनसे परिचय हुआ और 1-2 दिन साथ बैठे.. फ़िर एक दिन मैं इनसे अलग होकर उत्कर्ष के साथ बैठा। उत्कर्ष की राइटिंग बहुत ही सुंदर है, मैंने तारीफ़ करी। फ़िर हम साथ बैठने लगे। एक दिन फ़िर रवि और पंकज की दोस्ती उत्कर्ष से करवाई। और सिलसिला जारी है तब से..
शुरू में रवि-पंकज नेहरू विहार में साथ रहते थे। उत्कर्ष गाजियाबाद से आता था, मैं अकेला वजीराबाद। लॉकडाउन के बाद रवि पंकज और मैं गांधी विहार में साथ रहने लगे। पंकज 1 महीना साथ रहा वो भी केवल प्लूटो को मुझसे दूर करने के लिए. प्लूटो प्लूटो प्लूटो ( https://worldofplu.wordpress.com ) याद है न ? प्लूटो को भगाने के लिए पंकज आज तक प्लूटो को पसंद करने वालों से गालियां खाता है. बददुआएं पाता है. हाँ, मेरे घर वालों की नज़र में पंकज हीरा लड़का हो गया एकदम.


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बुंदेलखंड
23,24,25,26 नवम्बर 2025.

शादी के अगले दिन सुबह-सुबह खजुराहो (छतरपुर जिला) निकलना था मगर उत्कर्ष रोकते-रोकते 2 बजा दिया.
ख़ैर, खजुराहो से पहले महोबा जिले में पंकज के दूर की बुआ के यहां रुक गए.




24 नवम्बर 2025-
महोबा जिला.



बेहद सामाजिक प्राणी है, उत्तरप्रदेश के जालौन से हैं. मध्यप्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में इनकी रिश्तेदारी है या दोस्त रहते हैं, बाकी के आधे जिलों में ये रिश्तेदारी खोज निकालने की शर्तिया जिम्मेदारी लेते हैं।





खजुराहो ✨

– पश्चिमी मंदिर समूह



मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है
इसका निर्माण 1025 ईस्वी से 1050 ईस्वी के बीच हुआ माना जाता है।
इसे चंदेल राजवंश के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक राजा विद्याधर ने बनवाया था।
यह नागर शैली की मंदिर वास्तुकला का शिखर माना जाता है।
यह खजुराहो के सभी मंदिरों में सबसे ऊँचा है, जिसकी मुख्य शिखर की ऊँचाई लगभग 31 मीटर (102 फीट) है।












- जैन मंदिर समूह








श्रमदान का तात्पर्य मुख्य रूप से ‘श्रमदान हथकरघा’ पहल से है। यह एक सामाजिक और व्यावसायिक प्रकल्प है जो खजुराहो में जैन मंदिर परिसर के पास स्थित है।
यह पहल आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से महाकवि पंडित भूरामल सामाजिक सहकार न्यास के तत्वावधान में संचालित की जाती है।
श्रमदान का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन करना, विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और जेलों के बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना है। यह संस्थान युवाओं और ज़रूरतमंद लोगों को हथकरघा से कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षार्थियों को निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा के साथ मानदेय भी दिया जाता है।
यहाँ से कुछ लीजिए या नहीं पर इसे अंदर से देखिए ज़रूर 🙂
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बागेश्वर धाम 🙏


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25-26 नवम्बर 2025-
आज छतरपुर जिले (मध्यप्रदेश) से झांसी जिले (उत्तरप्रदेश) में जाना है।


झांसी के इस गरौठा तहसील के एक मंदिर से सुबह-सुबह मिथिला के सीताराम गाने बज रहे थे। पहले सोचा कि मंदिर के पुजारी मिथिला से होंगे। मगर जब शाम को ओरछा पहुंचा तब समझ आया कि आज तो विवाह पंचमी है और सुबह मंदिर में इसलिए मिथिला के गाने बज रहे थे।









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झांसी


स्वरूप: मूर्ति स्त्री वेश में है, लेकिन परंपरा के अनुसार उनके दोनों हाथों में गदा (Hanuman’s Mace) धारण की हुई है।


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झांसी का किला




यह छलांग लगभग 30-40 फीट की ऊँचाई से थी।

































अब चलते हैं ओरछा (जिला-निवाड़ी, मध्यप्रदेश)
संयोग देखिए, आज विवाह पंचमी है और यहां के राजा राम मंदिर में भव्य विवाह समारोह का आयोजन होता है।


































राजाराम मंदिर, ओरछा धाम




भगवान राम के राजा बनने की कहानी
यह सबसे प्रमुख और सबसे प्रसिद्ध कथा है, जो 16वीं शताब्दी में ओरछा के बुंदेला शासक महाराजा मधुकर शाह और उनकी रानी गणेश कुँवरी से जुड़ी है।
महाराजा मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे, जबकि उनकी रानी गणेश कुँवरी राम भक्त थीं।
एक बार महाराजा ने रानी से वृंदावन साथ चलने के लिए कहा, लेकिन रानी ने मना कर दिया क्योंकि वह भगवान राम की भक्ति में लीन थीं।
क्रोध में आकर महाराजा ने रानी को यह चुनौती दी “अगर तुम इतनी बड़ी राम भक्त हो, तो अपने राम को ओरछा में लाकर दिखाओ।”
रानी ने यह चुनौती स्वीकार की और अयोध्या चली गईं। उन्होंने कई महीनों तक सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की। जब भगवान राम के दर्शन नहीं हुए, तो निराश होकर रानी नदी में कूद गईं।
तब, भगवान राम ने बाल स्वरूप में रानी की गोद में दर्शन दिए।
जब रानी ने उनसे ओरछा चलने का आग्रह किया, तो भगवान राम ने तीन शर्तें रखीं:
पहली शर्त: मैं यहाँ से जाकर जिस जगह बैठ जाऊंगा, वहाँ से फिर नहीं उठूंगा।
दूसरी शर्त: ओरछा में मेरे राजा के रूप में विराजमान होने के बाद, किसी और की सत्ता नहीं रहेगी, और राज्य पर केवल राम का ही राज होगा।
तीसरी शर्त: मैं बाल रूप में पैदल साधु-संतों के साथ ओरछा चलूँगा।
रानी ने शर्तें मान लीं और भगवान राम की बाल रूप प्रतिमा लेकर ओरछा आईं। इस बीच महाराजा मधुकर शाह ने रानी के लिए पहले से ही भव्य चतुर्भुज मंदिर का निर्माण शुरू करवा दिया था।
ओरछा पहुँचने पर, रानी ने प्रतिमा को चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करने से पहले, उसे अपने महल के रसोईघर में (या विश्राम स्थल पर) रख दिया।
जब बाद में रानी ने प्रतिमा को चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करने का प्रयास किया, तो शर्त के अनुसार, प्रतिमा को अपनी जगह से नहीं हटाया जा सका (चूँकि उनकी पहली शर्त थी कि वह जहाँ बैठ जाएंगे, वहाँ से नहीं उठेंगे)।
तब से, रानी का वह महल ही राम राजा मंदिर बन गया और राम की प्रतिमा वहीं पर राजा के रूप में स्थापित हो गई। चतुर्भुज मंदिर आज भी खाली है, जिसका उपयोग अन्य धार्मिक कार्यों के लिए होता है।
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गार्ड ऑफ ऑनर (सशस्त्र सलामी): यह दुनिया का एकमात्र मंदिर है जहाँ भगवान राम को एक राजा के रूप में पूजा जाता है और उन्हें प्रतिदिन मध्य प्रदेश पुलिस के सशस्त्र जवान द्वारा सूर्योदय और सूर्यास्त पर गार्ड ऑफ ऑनर (सशस्त्र सलामी) दिया जाता है।
आज भी ओरछा के राजा: ऐसी मान्यता है कि ओरछा राज्य पर आज भी भगवान राम का ही शासन है। महाराजा मधुकर शाह ने स्वयं उन्हें अपना राज्य सौंप दिया था, इसलिए राम को यहाँ “राजा राम सरकार” कहा जाता है।
अयोध्या से संबंध: कुछ कथाओं के अनुसार, अयोध्या और ओरछा का संबंध करीब 600 वर्ष पुराना है। भगवान राम ओरछा में राजा के रूप में दिन में विराजते हैं और माना जाता है कि वह रात्रि विश्राम के लिए अयोध्या जाते हैं।







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26 नवम्बर 2025
ओरछा, झांसी से अब चला जाए बुंदेलखंड रीजन के मध्यप्रदेश के दतिया जिले..





इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यह एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थापित है। ‘गुप्तेश्वर’ नाम का अर्थ ही है “छिपे हुए ईश्वर” या “गुप्त देवता”, जो गुफा में स्थित होने के कारण सार्थक है।
यहाँ स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू (यानी स्वयं प्रकट हुआ) माना जाता है.
कहते हैं कि समय के साथ शिवलिंग की ऊँचाई बढ़ती जा रही है.

सोनागिर, जैन तीर्थ स्थल, दतिया
यह माना जाता है कि इस स्थान से लगभग आठ करोड़ जैन मुनियों ने मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त किया था, जिनमें से नंगानंद मुनि सबसे प्रमुख थे। इसलिए यह सिद्ध क्षेत्र कहलाता है। यह ‘स्वर्ण पर्वत’ (Golden Peak) के नाम से भी जाना जाता है और जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थान है।




























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27 नवम्बर 2025
वापसी की जाए अब..
बनारस ✨












यह मंदिर किसी विशिष्ट देवी-देवता की मूर्ति या पूजा के लिए नहीं है।
यह मुख्य रूप से योग और ध्यान (मेडिटेशन) के लिए समर्पित है। इसे विश्व का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र कहा जाता है।
इसका निर्माण विहंगम योग संत समाज द्वारा किया गया है और यह उनके संस्थापक सद्गुरु श्री सदाफल देव जी महाराज द्वारा लिखित आध्यात्मिक ग्रंथ ‘स्वर्वेद’ को समर्पित है।
सारनाथ







इसकी स्थापना 1920 में प्रसिद्ध कला इतिहासकार और विद्वान राय कृष्णदास ने की थी। बाद में यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का हिस्सा बन गया।
गांव के ही अर्जुन भाई MA में एडमिशन लिये हैं, उनसे भी मिलना हो गया।




























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28 नवम्बर 2025
पटना 💕





















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29 नवम्बर 2025
मोतिहारी 🌄




एक और शादी…. मां के मामाजी की लड़की की शादी






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हासिल

अगली बार किसी समन्दर किनारे मिलते हैं, ज़्यादा मुमकिन हो कि पुरी (ओडिशा) के किनारे से पहली बार समन्दर को देखा जाए… देखते हैं, चलते हैं….क्या तय होता है.. क्या रखा है आगे..
गली बॉय फ़िल्म का एक गीत है- ट्रेन सॉन्ग… सुने हैं ? सुनिए 🙂
हैदर अली जाफ़री कहते हैं—
आए ठहरे और रवाना हो गए
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है. 🙃
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