देहरादून, उत्तराखंड

14-17 अक्टूबर 2021 🙂

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टाइगर वाटर फॉल्स

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सहस्त्र धारा, देहरादून 🙂

पहाड़ी लोग कित्ते प्यारे होते हैं। पहाड़ के जैसे स्थिर। धीरे-धीरे बोलते हैं, पूरी बात समझाते हैं। खाने के पहले और बाद में गरम पानी से हाथ धुलाते हैं। जौनसारी जनजाति का रिजर्व्ड इलाका है।

अब समझा कि जो अफ़्फोर्ड कर सकते हैं उन्हें किसी बीमारी से उबरने के लिए पहाड़ों में रहने क्यों भेजा जाता है। एक तो यहाँ के आसमान बाकी जगहों से बहुत ज्यादा नीला है। झरने के गिरने की आवाज़ सीधे दिल के पार जाती है। उगता-डूबता सूरज जैसे पहली दफ़ा देखी हो …और और रात में चांद

जो लोग पहाड़ों में रहते हैं वो जन्म से ही पर्वतारोही होते हैं। हम प्लेन में रहने वालों के लिए पहाड़ ज़रिया है सब उलझनों को छोड़ केवल जीवन की ओर देखने की। चकराता हिल स्टेशन सनसेट पॉइंट पर वही जीवन है। मेरी न मानो आके देखना।

ज्यादातर बारी, वक़्त के साथ जुड़ाव बंधन बन जाता है मगर पहाड़ों ने कभी भी नदियों को नहीं रोका। नदियों ने पहाड़ों से ये सच कभी नहीं छुपाया कि उन्हें समंदर में मिल जाना है। नदियों और पहाड़ों का लगाव सच से जुड़ी हैं, उतनी ही जितनी की किसी के अंदर की घुमक्कड़ी।

बात उत्तराखंड में 7000 फ़ीट की ऊँचाई पर उस गाँव (कनबुआ, चकराता) के एक घर में रुकना जो लकड़ी से बना हो, मुझे जाना ही था।


उत्कर्ष ब्रो.. मेरे लगभग सभी पसंदीदा गानों के लिरिक्स बिगाड़ने के अलावा बाकी सभी मामलों में हीरा है। मनोज भाई से पहली बार मिलना हुआ और ये तो आरा (बिहार) से ही है, क्या ही कहना।

माँ कहती हैं अब तीन दिन घूम लिये हो अब दिल्ली जाके मन लगाकर पढ़ो। साथ में कहती हैं पानी में ख़ूब भीगे हो सिर में करू तेल (सरसों का तेल) लगा लेना। छोटी बहनें शिकायती लहज़े में कहती हैं अकेले-अकेले ही घूमो। जब पहाड़ पर था और वहाँ से पापा को वीडियो कॉल किया तो पापा कहते हैं अरे यहाँ तो तुम चमक रहे हो, शर्ट की ऊपर वाली बटन लगाओ, स्क्रीन शॉट लूँ, लड़की वालों को भेजना है।

…उसी पहाड़ पर- “हमारा कास्ट प्रॉब्लम न होता तो कर लेते (शादी) आपसे ही 😌”


खलील जिब्रान ने कहा था “ज़िन्दगी का मक़सद ज़िन्दगी के भेदों तक पहुँचना है और दीवानगी इसका एकमात्र रास्ता है।” मुझे अपनी दीवानगी पर गर्व है। हम सभी को अपनी-अपनी दीवानगी पर गर्व होनी चाहिए।

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