घर वाले वैष्णो माता जा रहे थे। मेरे से भी पूछा गया था कि चलोगे ? मैंने हमेशा से घर वालों के साथ कहीं घूमने जाने को मना ही किया है। मैंने मना कर दिया था। दो वज़ह से- एक तो प्लूटो की वज़ह से दूसरी पढ़ाई।
जाने के एक दिन पहले मेरे से फाइनल पूछा गया कि चलोगे कि मेरा टिकट कैंसिल कर दिया जाए ? तो मैंने मना कर दिया और मेरा टिकट कैंसिल हो गया।
अब अगले दिन मैं रेलवे स्टेशन सब जने से मिलने पहुँचा। तो यहाँ साजिश के तहत सब जनों ने इमोशनल ब्लैकमेल करके मुझे भी पकड़ के ले गएँ। मेरा टिकट कैंसिल नहीं कराया गया था और मुझे वापस रूम पर कपड़े लेने तक नहीं जाने दिया गया। एक जोड़ी कपड़े में मैं ले जाया गया।
घर वालों को प्लूटो से दिक्कत था तो उनको ये मौका भी मिला कि मन्टू को साथ ले चलेंगे और इसी बीच मेरा रूममेट प्लूटो को बाहर कहीं छोड़ आयेंगे। और ऐसा ही हुआ.. मैं आया वैष्णो और प्लूटो को बाहर छोड़ दिया गया।
नई दिल्ली से जम्मूतवी के लिए रात को 9 बजे से ट्रेन थी। अब पूरा दिन क्या किया जाए ? तो मैं सबको लेकर चला चाँदनी चौक घुमाने।

शीशगंज गुरुद्वारा, चाँदनी चौक 🙂



यश और हर्ष, मामा जी के लड़के..

नानी, माँ, दो मौसी, मामा-मामी, भाई-बहन यानी कुल जमा 14 लोग 🙂

माँ, नानी, मामी, शिवानी, सोनी, यश और उधर कोने में रूठा हुआ हर्ष
और अगली सुबह जम्मूतवी

घर वाले घर से ही कोविड टेस्ट कराया के ही आए थे। मेरा नहीं हुआ था तो स्टेशन पर पहले कोविड टेस्ट हुआ और नेगेटिव ही आया।


मामा जी


कटरा आकर होटल लिया गया। फ़िर यात्रा पर्ची और ज़रूरी सामान लेकर वैष्णो माता के दरबार चलने को तैयार हो गए।


2 बजे हमलोग पहाड़ पर चढ़ना शुरू किए। माँ, नानी और एक मौसी के लिए घोड़ा कर दिया गया बाकी के हम 11 जने पैदल चढ़ने लगे। आराम करते हुए, खाते-पीते हुए 12 किलोमीटर की दूरी को हम 5 घण्टे में तय किएँ।













7 बजे हमलोग पहुँच कर धर्मशाला में रुककर फ़िर दर्शन के लिए लाइन में लग गए। भीड़ कम ही था फ़िर भी दर्शन करने-करने में 3 घण्टे लग गएँ।
अब अगली सुबह इससे भी ऊपर भैरोंनाथ जी के दर्शन के लिए चले। यहाँ हमसब लिफ़्ट कर लिया।

माँ
















भैरोंनाथ जी के दर्शन के बाद अब दूसरे रास्ते से हमलोग उतर के अर्द्धकवांरी देवी पहुँचे जहाँ बहुत ही संकरे गुफे से जाते हुए माता जी का दर्शन करना होता है। यहाँ हमें 5 घण्टे लगे।
और यहाँ से अभी 7 किलोमीटर उतरना था। माँ, नानी, मौसी के लिए फ़िर से घोड़ा कर दिया गया। और हमलोग पैदल उतरने लगे। उतरने में हमें 30 मिनट भी नहीं लगे, दौड़ते हुए उतरे हम 😀



सोनी

स्नेहा



शिवानी, शैफाली
नीचे उतर के गुलशन कुमार के लंगर में खाना खाया गया और तब होटल में आया गया।
8 मार्च 2021 🙂
अब कटरा में दो दिन रुकना है।


घर वालों के साथ इसलिए मैं कहीं जाता नहीं था कि इनकी शॉपिंग 😭
9 मार्च 2021, अमृतसर 🙂



नानी ❤













पार्टीशन म्यूजियम, अमृतसर 🙂
पिछली बार जब 2019 में आया था तब म्यूजियम नहीं घूम पाया था।












❤



अब हरिद्वार चलते हैं..
10 मार्च 2021, हरिद्वार, कुम्भ मेला 🙂







ऋषिकेश, हरिद्वार से 23 किलोमीटर ही है तो तय हुआ कि पहले ऋषिकेश घूम आया जाए।







9 बजे तक हरिद्वार वापस लौट आए। और रात को ही स्नान का प्रोग्राम बना। अगले दिन महाशिवरात्रि की वज़ह से पहला शाही स्नान था। जूना अखाड़ों के लिए सुबह 8 बजे से हर की पौड़ी रिज़र्व था।







अब यहाँ से खतौली(मेरठ) मौसी के घर सबको रुकना है। वहाँ से सबकोई अपने-अपने घर और मैं दिल्ली 🙂
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घर वालों के साथ भी घूमना चाहिए। धैर्य की परीक्षा हो जाती है 😭
घर वालों से 1 साल का टाइम लिया है। उसके बाद शादी 💃
अब कहाँ मिलेंगे ? पता नहीं, पहले तो जाके प्लूटो को देखूँ कि कहाँ और किस हाल में है।
❤ 🙂