08 नवंबर 2020 🙂
हर इतवार को कहीं न कहीं घूमने निकल ही जाता हूँ तो इसबार राजघाट का सोचा था। IGNOU वाला काम भी हो जाता पर इतवार को कहाँ हो पाता।
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सुबह की बात पहले
आज सुबह उठकर दौड़ते हुए दूसरा दिन है। मेरा और रवि भाई का।






जॉय से मिलिए जो अपनी मालकिन के साथ घूमने आया था और बीमार है अभी 33 ग्राम




दौड़ने के बाद रवि भाई बोले कि चलो टेबल लेकर आते हैं नेहरू विहार से जहाँ ये पहले रहते थे उधर से, हम कहें चलो, उधर ही पोहे खायेंगे, जहाँ कोचिंग है अपनी, जिस ठेले के खाते थे जब इतवार के दिन करेंट अफेयर्स की क्लास करते जाते थे तब।
रास्ते में पैदल चलते मैंने ये कविता लिखी जिसकी शुरुआती पंक्तियाँ कभी पहले की लिखी हुई थी।



फ्लैट पर आ गए, नास्ता किए और ट्विटर पर तभी दीपक भईया की लिखावट में ये दिखा तो पूछ बैठा कि किसकी राइटिंग है तो भईया बोलते हैं उनकी ही हैं। मैंने फ़िर रिप्लाई में कहा कि बताइए जंतर-मंतर पर कहाँ आना होगा मिलने मुझे आपसे ? (पहले एक दफ़ा बात हुई थी तो हम जंतर-मंतर पर मिलने वाले थे)
कल जौन एलिया साहब की पुण्यतिथि थी।

फ़िर दीपक भईया से बात हो गई कि 2-3 बजे मिलते हैं 🙂



मेट्रो में केदारनाथ अग्रवाल जी की कविता संग्रह पढ़ते हुए, यही किताब भईया को भेंट करनी थी।

रवि ब्रो, Mantuuu, दीपक भईया, राहुल भईया 🙂
चाय पर बातें हुईं। वहाँ से भईया पूछे कि अब आगे कहाँ जाना है। तो मैं और रवि सोच के चले थे कि यार बंगला साहिब गुरुद्वारा न जाने कितनी बार सोचे मगर जाना एक बार भी नसीब न हुआ तो चलेंगे। तो भईया कहते हैं हम भी साथ चल सकते हैं ? मैंने कहा ये पूछने वाली बात है। और हम पैदल ही राहुल भईया के जीपीएस से चलने लगे बंगला साहिब गुरुद्वारा की तरफ़ 🙂










भूख न होने के बावजूद मैं लंगर खाने गया। कहीं के भी गुरुद्वारा में मैं लंगर खाए बिना नहीं लौटता। चाँदनी चौक वाले शीशगंज गुरुद्वारा में तो जब चाँदनी चौक जाता हूँ तब लंगर + चाय + टोस्ट याद से खाकर लौटता हूँ।

🙈🙈
ये तस्वीर तो दीपक भईया ने बिना बताए क्लिक करी जब मैं जूता पहन रहा था। पता नहीं क्या सोच रहा था कि ऐसी आँखें हो गईं हैं।
अप्रैल 2019 में जब अमृतसर जाना हुआ था तो यहाँ आकर वहाँ की याद ताजा हो गईं।
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और बाहर आकर लपककर कुल्हड़ वाली चाय 😂

फ़िर हमलोगों ने सोचा कि हिम्मत करके सेंट्रल पार्क में चलके बैठते हैं।

मैंने रवि को कहा कि रवि कबूतर उड़ाओ कि क्लिक करें तस्वीरें तब जाके नेकदिल रवि और दीपक भईया ने ये नोबेल काम मेरे लिए किए.. मेहरबानी 🙂



भईया ने मेरे लिए अपनी बहुत ही एक प्रिय किताब लेकर आए थे। मौत की किताब और बोले “तुम बहुत घूमते हो ना, बहुत एनर्जेटिक हो ना तो ये किताब पढ़ो फ़िर देखते हैं तुम्हें.”
मैंने केदारनाथ अग्रवाल जी एक कविता की एक किताब और दूसरी अपनी ही कविता संग्रह ले गया था। 🙈


और जैसा कि फ़ोन पर और ट्विटर पर इनकी लिखावट से मोहित हो मिलने चला गया, तय किया था कि इनसे कुछ सामने में ही अपनी डायरी में लिखाउंगा।

अब गाने की बात। भईया भी सोच के आए थे कि हमसे गाना सुनेंगे लाइव 😂
पर्स से ये निकाले वो। जबकि यहीं गाना मैंने उनकी फ़रमाइश पर पहले कभी रिकॉर्ड करके ट्विटर पर सुनाई थी तो मैंने कहा कोई और गाता हूँ.. तो किशोर दा का वो गाना ही गा दिया जो CP आते हुए गुनगुना रहा था। “रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार, हम ना करेंगे प्यार…”

फ़िर हमारी बातें हुईं देर तक। अपनी कहे उनकी सुने और समझे कि अनुभवों से अर्जित ज्ञान के क्या मायने होते हैं और मुझे अभी भी कितना कुछ सीखना बाकी है!
फ़िर सेंट्रल पार्क में रोज़ाना होने वाला शाम को फाउंटेन वाटर कार्यक्रम, जय हो गाने के साथ शुरू हो गया। मैंने भईया को बीच में ही रोकते हुए कहा कि उस तरफ़ चलते हैं ना जिधर से सुखविंदर सिंह और लोगों की हूटिंग की आवाज़ आ रही है।






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दीपक भईया ने मेरी डायरी में देखा कि जिन जिन लोगों से मैं मिला उन्होंने कुछ कुछ मेरे लिए लिख रखा है तब पहले तो भईया बोले कि वो इस क़ाबिल नहीं पर फ़िर उन्होंने ये लिखा 🙂

भईया सरकारी नौकरी कर रहे हैं। पढ़ने के शौक़ीन हैं पर हाथ खड़े कर दिएँ। गानों के, गुलज़ार साहब के दीवाने हैं और सबसे ख़ास बात कि जब ये अपनी कोई बात कह रहे थे तो बिल्कुल वैसे ही शब्दों को चुनकर बोल रहे थे जैसे कोई कहानी में किसी बात किसी याद किसी शख़्स को याद कर रहा होता है। बीच में एकबार जब ये गुलज़ार की बात और सिंगर मुकेश की बात बता रहे थे तो मैंने इन्हें रोक के पूछा कि आप लिखते है कि नहीं ? बोले लिखने बैठता हूँ फ़िर थोड़ी ही देर में लगता है ये क्या लिखा रहा हूँ मैं, इसके लिए नहीं बना मैं।
राहुल भईया, इनके मामा जी के लड़के हैं। कम बोलने वाले ज़्यादा सुनने वाले, SSC की तैयारी कर रहे हैं। मैथ्स से ग्रेजुएट हैं तो मेरे काम आने वाले हैं आगे।
दीपक भईया की कहानी किसी फ़िल्म से कम नहीं। और मैंने इन्हें कल कह भी दिया कि आपको लेकर मैं कहानी लिख दूँगा 😂
जीवन ने इनके टाँग पकड़ के तबियत से पीछे खींचा है पर ये जल्दी से हार मानने वालों में से नहीं हैं। आगे इनके ढेर सारा जीवन है जो इनकी आंखों में, इनके कहे में, इनकी सोच में देखा मैंने.. मुझ पागल, ख़ुद से भागते बच्चे की शुभकामनाएं हैं इनके साथ 🙂
अब मुद्दे की बात सुनिए। दीपक भईया से मिलते ही हाय-हेल्लो की औपचारिकता के बाद ही कहते हैं भईया कि “मैं बहुत आलसी हूँ यार, छुट्टी के दिन मैं कमरे से निकलता नहीं वो तो तुम हो वैसे, मिलना था तुमसे तो निकल आया और ये भी देखो कि जूते भी पहन के निकला हूँ।” मैं बस हँस रहा था और हँसने से उखड़ आई खाँसी पर कंट्रोल के लिए पानी बोतल तक हाथ लेके जा रहा था।
8 नवंबर 2016 किसको नहीं याद ? छठ पूजा के अगले ही दिन मैं उदयपुर-नाथद्वारा-हल्दीघाटी-चित्तौड़-अजमेर-जयपुर-सीकर-खाटू श्याम जी-दिल्ली-मेरठ-मुजफ्फरनगर-लखनऊ घूमने निकला था। दोस्तों के पापा से कैसे भी रो रो के 500₹ के बदले 100₹ लेकर टूर पूरा किया था। पर अब 8 नवंबर से ये और ख़ूबसूरत याद जुड़ गई।
पता है ? शुक्र ग्रह को बाइबिल में नरक का दर्ज़ा मिला हुआ है। हम मनुष्य के दिलों के अंदर अगर हम जैसे ही दिखने-सोचने वाले लोगों के लिए प्यार का एक कतरा भी न बचे तो हमारी पृथ्वी भी नरक हो जायेगी पर इसकी गुंजाइश फिलहाल बहुत ही कम है न के बराबर ही मानिए 🙂
…दीपक-राहुल भईया से मिलकर अच्छा लगा 🙂
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अब कहाँ मिलूँगा ????
देखिए अगले इतवार को, तबतक चैनल को लाइक, सब्सक्राइब, डिसलाइक, अनसब्सक्राइब, फॉलो, ब्लॉक, रिपोर्ट, म्यूट सब कर दीजिए। Mantuuu ये यूट्यूब नहीं है तेरा फ़ोटो ब्लॉग है।
अच्छा अच्छा अच्छा… 😂😂😂 🙈
❤ 🙂