26 अक्टूबर 2020 🙂
Tata memorial hospital, Mumbai से फ़रमान ज़ारी हुआ कि जाओ सर गंगाराम हॉस्पिटल और मौसा जी की जो रिपोर्ट इशू नहीं हुई है उसे निकाल के स्पीड पोस्ट करो मुम्बई।
मैं निकल गया साथ में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में जो मेम्बरशिप लेनी है उसका फॉर्म भर लिया और सोचा लौटते वक़्त लाइब्रेरी से होता आऊँगा। उस फॉर्म में एक जगह अटेस्टेड करवाना ज़रूरी है। तो गाँधी विहार में रहने वाले इकलौते डॉ तीन दिन के लिए दिल्ली से बाहर हैं तो सोचा वहीं चाँदनी चौक ही किसी डॉ के क्लिनिक जाके अटेस्टेड करवा लूँगा।
हॉस्पिटल से लौट के चाँदनी चौक आ गया और खोजने लगा डॉ आ क्लिनिक। दो चार जनों से पूछा तो सबने कहा बल्लीमारान चले जाओ, थोड़ा ही आगे है। मैं उधर गया तो पर डॉ का क्लिनिक ढूँढने नहीं। मुझे मियां ग़ालिब याद आ गएँ। मार्च 2019 में मैं और प्रतीक होली के लिए कुर्ता खरीदने चाँदनी चौक आए थे क्योंकि उस साल की होली वृंदावन धाम में खेलनी थी। शॉपिंग करते करते 6 बज गएँ और 6:15 पर हम हवेली पहुँचे तब तक किवाड़ बंद। 11 से 6 का टाइमिंग रहता है। तब बाहर से ही फ़ोटो खींच के लौट आए ये कहते हुए कि चाचा ग़ालिब को अभी नहीं मिलना होगा हमसे.. अगली बार देखते हैं 🙂

19 मार्च 2019 के दिन का चाँदनी चौक 🙂

ये बस यूँ ही बाहर से देखते हुए लौट आएं थे।

बल्लीमारान के गली क़ासिम जान में मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली है। ये साइन बोर्ड आज ग़ायब था। पूछने पर पता चला कि उस वक़्त कोई प्रोग्राम होने का था तो ये सब लगाया था।
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पहले चाँदनी चौक घूमते हुए हवेली चलते हैं-

इसमें लाल किला दिख रहा है ? बताओ, लाल किला मैं नहीं गया आजतक 😐






1860-1869 🙂 दिल्ली इन 9 सालों में ❤




















यहाँ के केअर टेकर विश्व मोहन जी(हापुड़ से हैं) कहते हैं कि हवेली के पड़ोसियों ने इस हवेली पर कब्ज़ा कर लिया था और यहाँ से ग़ालिब का नामोनिशान मिटा देना चाहते थे। पर सरकार ने पहल करी और उन पड़ोसियों को मुंहमांगी कीमत देकर इस हवेली को खरीदा और म्यूजियम बनाया इसे।

विश्व मोहन जी 🙂

अब चाय पीने चलते हैं वो भी स्पेशल चाय
बल्लीमारान के बारादरी की कुल्के चाय, कुल्हड़ नहीं कुल्के 🙂
चायपत्ती और पानी साथ उबाल के अलग रखते, दूध उबाल के अलग फ़िर तीनों को शक्कर के साथ थोड़ा थोड़ा बारी बारी से डाल के बनाते, ऊपर से दूध का छाली भी रखते हैं। शानदार एकदम, पहली बार पी ऐसी चाय




अजमल और अनीम, दोनों सगे भाई हैं और पता है? बिहार के किशनगंज से ही है। कुछ दिन पहले तक तो एक बंदा हमारे मोतिहारी का ही इनकी दुकान पर ही काम कर रहा था जो मोतिहारी से कॉलेज में पढ़ते हुए भाग के आया था।
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अब चावड़ी बाज़ार को पैदल खंगालते हुए चावड़ी बाज़ार स्टेशन से मेट्रो पकड़ के लौट जाएँगे 🙂

माँ के लिए चूड़ियां लेनी चाहिए थी 😦
पर ये रूम पर आने के बाद एक लड़की को जब ये तस्वीर भेजी तब वो बोली कि माँ के लिए चूड़ियां लिये की नहीं ?
अगली बार पक्का 🙂










🙌





😐







इनायत शेख़ भाई, The Alchemist मेट्रो में पढ़ते दिखे। मेरे जैसे कुछ जीव हैं जो मेट्रो का सफ़र किसी न किसी किताब को पढ़ते हुए ही करते हैं। दोस्ती हो गयी हमारी, इंस्टा पर जुड़ गए हम। कश्मीर से हैं, दिल्ली घूमने आएँ हैं इनायत भाई। अमृतसर से डॉ की पढ़ाई कर रहे हैं।

अंशु मैम(जयपुर) की किताब शब्दों का समन्दर 🙂

और रूम पर लौट के गरमा गरम जलेबी.. और जीने को क्या चाहिए 🙂
लाइब्रेरी के मेम्बरशिप का किसी और दिन.. किसी और दिन क्या 29 को ही। सर गंगाराम हॉस्पिटल वालों ने 29 अक्टूबर को बुलाया है रिपोर्ट के लिए, तो उस दिन देखते हैं, मेंबर बनता हूँ कि एक और पोस्ट लिख रहा होता हूँ यहां 🙈🙈🙈
“एडवेंचर और कुछ नहीं, बुरी तैयारियों का नतीज़ा है” अब समझ आ रहा है ये 🙂
❤ 🙂
















































































































































































































































































































































