मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली ~ पुरानी दिल्ली ❤

26 अक्टूबर 2020 🙂

Tata memorial hospital, Mumbai से फ़रमान ज़ारी हुआ कि जाओ सर गंगाराम हॉस्पिटल और मौसा जी की जो रिपोर्ट इशू नहीं हुई है उसे निकाल के स्पीड पोस्ट करो मुम्बई।

मैं निकल गया साथ में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में जो मेम्बरशिप लेनी है उसका फॉर्म भर लिया और सोचा लौटते वक़्त लाइब्रेरी से होता आऊँगा। उस फॉर्म में एक जगह अटेस्टेड करवाना ज़रूरी है। तो गाँधी विहार में रहने वाले इकलौते डॉ तीन दिन के लिए दिल्ली से बाहर हैं तो सोचा वहीं चाँदनी चौक ही किसी डॉ के क्लिनिक जाके अटेस्टेड करवा लूँगा।

हॉस्पिटल से लौट के चाँदनी चौक आ गया और खोजने लगा डॉ आ क्लिनिक। दो चार जनों से पूछा तो सबने कहा बल्लीमारान चले जाओ, थोड़ा ही आगे है। मैं उधर गया तो पर डॉ का क्लिनिक ढूँढने नहीं। मुझे मियां ग़ालिब याद आ गएँ। मार्च 2019 में मैं और प्रतीक होली के लिए कुर्ता खरीदने चाँदनी चौक आए थे क्योंकि उस साल की होली वृंदावन धाम में खेलनी थी। शॉपिंग करते करते 6 बज गएँ और 6:15 पर हम हवेली पहुँचे तब तक किवाड़ बंद। 11 से 6 का टाइमिंग रहता है। तब बाहर से ही फ़ोटो खींच के लौट आए ये कहते हुए कि चाचा ग़ालिब को अभी नहीं मिलना होगा हमसे.. अगली बार देखते हैं 🙂

19 मार्च 2019 के दिन का चाँदनी चौक 🙂

ये बस यूँ ही बाहर से देखते हुए लौट आएं थे।

बल्लीमारान के गली क़ासिम जान में मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली है। ये साइन बोर्ड आज ग़ायब था। पूछने पर पता चला कि उस वक़्त कोई प्रोग्राम होने का था तो ये सब लगाया था।

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पहले चाँदनी चौक घूमते हुए हवेली चलते हैं-

इसमें लाल किला दिख रहा है ? बताओ, लाल किला मैं नहीं गया आजतक 😐

1860-1869 🙂 दिल्ली इन 9 सालों में ❤

यहाँ के केअर टेकर विश्व मोहन जी(हापुड़ से हैं) कहते हैं कि हवेली के पड़ोसियों ने इस हवेली पर कब्ज़ा कर लिया था और यहाँ से ग़ालिब का नामोनिशान मिटा देना चाहते थे। पर सरकार ने पहल करी और उन पड़ोसियों को मुंहमांगी कीमत देकर इस हवेली को खरीदा और म्यूजियम बनाया इसे।

विश्व मोहन जी 🙂

अब चाय पीने चलते हैं वो भी स्पेशल चाय

बल्लीमारान के बारादरी की कुल्के चाय, कुल्हड़ नहीं कुल्के 🙂

चायपत्ती और पानी साथ उबाल के अलग रखते, दूध उबाल के अलग फ़िर तीनों को शक्कर के साथ थोड़ा थोड़ा बारी बारी से डाल के बनाते, ऊपर से दूध का छाली भी रखते हैं। शानदार एकदम, पहली बार पी ऐसी चाय

अजमल और अनीम, दोनों सगे भाई हैं और पता है? बिहार के किशनगंज से ही है। कुछ दिन पहले तक तो एक बंदा हमारे मोतिहारी का ही इनकी दुकान पर ही काम कर रहा था जो मोतिहारी से कॉलेज में पढ़ते हुए भाग के आया था।

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अब चावड़ी बाज़ार को पैदल खंगालते हुए चावड़ी बाज़ार स्टेशन से मेट्रो पकड़ के लौट जाएँगे 🙂

माँ के लिए चूड़ियां लेनी चाहिए थी 😦

पर ये रूम पर आने के बाद एक लड़की को जब ये तस्वीर भेजी तब वो बोली कि माँ के लिए चूड़ियां लिये की नहीं ?

अगली बार पक्का 🙂

🙌

😐

इनायत शेख़ भाई, The Alchemist मेट्रो में पढ़ते दिखे। मेरे जैसे कुछ जीव हैं जो मेट्रो का सफ़र किसी न किसी किताब को पढ़ते हुए ही करते हैं। दोस्ती हो गयी हमारी, इंस्टा पर जुड़ गए हम। कश्मीर से हैं, दिल्ली घूमने आएँ हैं इनायत भाई। अमृतसर से डॉ की पढ़ाई कर रहे हैं।

अंशु मैम(जयपुर) की किताब शब्दों का समन्दर 🙂

और रूम पर लौट के गरमा गरम जलेबी.. और जीने को क्या चाहिए 🙂

लाइब्रेरी के मेम्बरशिप का किसी और दिन.. किसी और दिन क्या 29 को ही। सर गंगाराम हॉस्पिटल वालों ने 29 अक्टूबर को बुलाया है रिपोर्ट के लिए, तो उस दिन देखते हैं, मेंबर बनता हूँ कि एक और पोस्ट लिख रहा होता हूँ यहां 🙈🙈🙈

“एडवेंचर और कुछ नहीं, बुरी तैयारियों का नतीज़ा है” अब समझ आ रहा है ये 🙂

❤ 🙂

जयपुर जैसा कुछ नहीं ❣

19-20-21-22 अक्टूबर 2020 🙂

19 अक्टूबर को नसीराबाद से जयपुर 14 बजे तक आ गया था।

राजमंदिर, इसे बंद देख 💔

शाहरुख भाई से मिलिए, आदमी के पास इनके जितना भी को कॉन्फिडेंस नहीं होना चाहिए। मेरे साथ वाले भईया को c स्कीम उतरना था, पहले तो 5-7 चक्कर लगा के कैसे भी उन भईया के ठिकाने पर पहुंचे फ़िर मैंने कहा कि शाहरुख भाई यहाँ से मैं राजा पार्क के लिए गूगल मैप लगा लेता हूँ कहते हैं नहीं, ज़रूरत ही नहीं है मुझे सब पता है जयपुर का, एक एक कोना पता है। मैं भी चुप हो गया। और फ़िर शाहरुख भाई ने जो भटकाया है ना जयपुर में, मतलब क्या बताऊँ, थोड़ी दूर और हम ग़लत चलते तो मेरा बिहार का मोतिहारी आ जाता।

भूखे बिहारी को चावल ही चाहिए बस।

अंकल जी चावल बना लिये थे+राजमा+आचार ❤

थोड़ा आराम किया और फ़िर सुनीता मैम से बातें हुईं तो हम आज ही मिलने को ‘टपरी’ पहुँच गएँ.. टपरी 💜

मुझे जो किताब देनी थी वो तो मैं लाया ही। मैम ने पूछती हैं कि पुष्यमित्र पढ़ा है ? मैं समझा कोई इतिहास का किरदार दिखे। मैंने कह दिया पढ़ लूँगा। दो किताबें थीं एक तो बिल्कुल पैक्ड ही। मैंने कह दिया वो पैक्ड वाली लेकर आइएगा 😂

जब किताब देखा तो ध्यान आया कि अरे ये तो बिहार के प्रभात ख़बर वाले पुष्यमित्र हैं जिनके वीकली आर्टिकल मैं ख़ूब चाव से पढ़ता था। फ़िर ज्ञान देने की बारी आई तो कहने लगा कि इनकी एक किताब चम्पारण सत्याग्रह पर आई हुई है, मुझे वो भी पढ़नी है अभी। मैं ये बता ही रहा था कि मैम ने अपने बैग से ये दूसरी किताब भी निकाल के सामने रख दीं। और मैंने फटाक से कह भी दिया कि अब मेरे को दोनों किताब चाहिए। हालाँकि, मैम दोनों किताब मुझे ही देने का सोच के आईं थीं।

मैम ने ही फ़िर मुझे बिरला मंदिर पर ड्रॉप कर दीं.. जहाँ से बिरला मंदिर की आरती में शामिल होते हुए मोतीडूंगरी(जो कि बन्द था) होते हुए राजा पार्क चला गया।

बिरला मंदिर

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20 अक्टूबर 2020 🙂

जल्दी उठ के पैदल भटकने निकल गया मैं आदतन 😎

मोतीडूंगरी 🙏

घर पर जाकर भी चाय.. Naachhhoooo!

मैंने फ़िर अंकल जी को तीसरी दफ़ा चेस में हराया 😎

हालाँकि, लवली पढ़ रहा होगा इसे तो हँस रहा होगा, पर कोई ना, अगली बार अजमेर आना हुआ तो लवली हारेगा मेरे से।

प्रबोध अंकल जी। उन्हीं की पहली कहानी संग्रह अन्तयास्त पढ़ रहा हूँ।

शाम की चाय

अब अंशु मैम से मिलने चलते हैं 💃

मैम को ये तस्वीर भेज के पूछा कि कोई एक चुनिए, मैम बोलीं कोई एक लेते आना। मैं ‘Man’ और अंकल जी की एक किताब लेकर गया। और इसे मन की बात जानने जैसा कुछ कहिए मैम ने तस्वीर देख के ‘Man’ को ही चुना था पर बताया नहीं था, मैं वहीं किताब लेकर गया 🙂

मैम ने अपनी दो किताब, मनीष मूंदड़ा जी की एक किताब और 3-4 मंथली मैगज़ीन जो इनके प्रकाशन समूह की तरफ़ से इशू होती है Simply Jaipur. 🙂

मैम से ही पूछ के एकदम पास ही के सेंट्रल पार्क घूमने चला गया जो कि बहुत बढ़िया है।

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21 अक्टूबर 2020 🙂

कल सेंट्रल पार्क अधूरा ही रह गया था तो आज सुबह वहीं जाने का सोचा, चला गया..

सोहन लाल राठौड़ जी नसीराबाद के ही निकले। सेंट्रल पार्क कभी जाना हुआ तो इनकी दुकान का ही जूस पीएं, धन्यवाद 🙂

आज अपने इंजीनियरिंग कॉलेज की तरफ़ जाना है..

पहले अक्षय पात्र/इस्कॉन टेम्पल 🙂

ये इसका ट्रैप था, फर्श पर पड़े रहो और कोई पैर रख दे तो काट लो। मैं बच गया था 😎

भक्त यश जी 🙂

अब चलते हैं, जगतपुरा, SKIT की तरफ़

पहले चाय ❤

हमारे वक़्त के रमेश भईया पहचान गए मुझे जो पहले हॉस्टल में थे अब लाइब्रेरी में आ चुके हैं।

मेरा रूम नंबर-120

चलते हैं वापस

जल महल 🙂

हवा महल 🙂

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22 अक्टूबर 2020 🙂

आज कहीं घूमने नहीं गया। आज दिल्ली लौट जाना है। फ्लाइट 11 बजे थी उस हिसाब से तैयारी में लगा था। Air India वालों का कॉल आया कि टाइमिंग 9:50 कर दी गई है, 9 बजे तक एयरपोर्ट कैसे भी पहुंचिए। 8:30 की बात है मैं नास्ता करने के लिए टेबल पर जा रहा था तब इनका फ़ोन आया था। खाली दूध पीते पीते ओला बाइक बुक की और 9 बजे तक एयरपोर्ट पर था।

वर्ल्ड ट्रेड पार्क 😍

बोर्डिंग पर टाइम देखा तो 9:50 नहीं 9:20 ही था। पूछा मैंने भईया से कि मैं टाइमली नहीं आ पाता तो ? कहते हैं पूरे पैसे रिफंड। जवाब सुनो इनके

आ गए दिल्ली

मौसम एकदम बोले तो क़ातिलाना

राजा पार्क से एयरपोर्ट आने में जितना टाइम लगा उससे कम में ही जयपुर से दिल्ली आ गया।

❤❤❤

जिस शहर भी घूमने जाता हूँ वहाँ के थिएटर में कोई फ़िल्म देखता ही हूँ पर इसबार मुमकिन न हो सका इसीलिए फ्लाइट से लौटते हुए इसे और यादगार बनाना चाहा और जो मलाल पटना से दिल्ली आते हुए रह गई थी उसे हटा लिया 🙂

8 अक्टूबर को दिल्ली से निकला था 22 को वापस पहुँच गया। मन एकदम चंगा है। करोना वायरस पर हँसी आ रही है। अब वायरस ये पढ़ ना ले!

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अब कहाँ मिलेंगे ? फ़िलहाल कुछ महीने कहीं नहीं 🙂

मुसाफिरी से भरे जीवन का कोई तो ठौर होता ही होगा, नहीं ?

❤❤❤ 🙂

❤ नसीराबाद ❤

17-18-19 अक्टूबर 2020 🙂

17 अक्टूबर को 19 बजे तक चित्तौड़गढ़ से नसीराबाद पहुँच गया। नितिन (स्कूल का दोस्त, 2005 का ही) आ गया था स्टेशन लेने। हालाँकि, अजमेर से उदयपुर जाते हुए रास्ते में ही नसीराबाद आता है पर उधर से लौटते वक़्त ही यहाँ रुकना था।

नितिन 🙂

पहले खाने की बात।

नितिन कहता है भाई कोटा हाईवे पर नया ढाबा(मन्नत) खुला है कुछ महीने पहले ही चल वहाँ ले चलता हूँ। इस ढाबे के मालिक ने अपने बेटे के जन्मदिन पर उसे गिफ़्ट किया है ये ढाबा 🙂

वाक़ई में ढाबे का इंटीरियर गज़ब एकदम बोले तो

सेव दूध मलाई की सब्जी, हाय ❤❤❤❤❤

राहुल को यहीं मिलने आना था तो उसके लिए हमने सब्जी बचा के रखी थी, वो तो लेट आया और सब्जी फेंकनी पड़ी होगी, मेरा दिल बैठ गया था 2 मिनट के लिए ढाबे से बाहर निकलकर 😐

राहुल आ गया और अगले दिन रविवार होने की वज़ह से राहुल ने प्लान बनाया कि कल सुबह क्रिकेट खेलते हैं, हालाँकि नितिन कहता रहा कि राहुल उठेगा ही नहीं सुबह देख लेना।

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18 अक्टूबर 2020 🙂

नितिन की हाथ की चाय, नितिन की आदत मेरे जैसी ही है, ख़ुद की हाथ से चाय बनाकर पीना.. तभी ज़्यादा फील आती है, मानो इस बात को, हाँ मानो

राहुल उठ गया था और हमसे पहले मिशन ग्राउंड पहुँच गया था। अच्छा, राहुल के बारे में नहीं बताया न अभी ? आगे बताता हूँ इनके बारे में, सुकून से पढ़ना जब राहुल महिमा गाऊँगा मैं तब, ठीक ? हाँ ठीक 🙂

ये मेरे लिए मक्का मदीना काशी सबकुछ

ट्यूशन के लिए 1 घण्टा पहले निकल कर यहाँ आता और चंपक, नंदन, क्रिकेट सम्राट, विजडम पढ़ता। साहित्य से जुड़ाव यहीं हुआ(7th क्लास)

चलो क्रिकेट खेल लिये, हालाँकि, मैच नहीं खेल पाए ऐसे ही 1-2 ओवर खेल लिये, नितिन के साथ अजमेर जाना था इसलिए टाइम कम ही था।

नितिन, ईंट पर खड़ा होके लम्बा हुआ है मुझसे बाकी तो मेरे से 7-8 मीटर छोटा है।

ये बैठा बीच में राहुल 4th, क्लास में चार राहुल थे जिसमें ये चौथा था और सबसे कमीना, हरदम हँसने-हँसाने वाला(इसमें सीरियस होने की एक्टिंग कर रहा) और स्कूल के वक़्त का(7th क्लास) का मेरा सबसे ज़िगरी। अब ज़िगरी नहीं रहा शायद ! और इससे किनारा मैंने ही किया 😦

मेरी ये कहानी फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं पढ़े तो पढ़िए, इसे मैंने ज्यों का त्यों लिख दी है जैसा कि हमारे साथ हुआ। किरदार के नाम भी वहीं रख दिए हैं बस मैंने अपना और लड़की(?) का नाम बदल दिया है। इसमें राहुल वहीं है जिसने ये सारा कांड करवाया और भुगता मैं।

लड़की अभी जयपुर में इंजीनियर हैं। क्लास के ही एक दोस्त(सुबोध) से लड़की से बात हुई तो अब जाके 13 साल बाद ख़बर लगी है कि लड़की को मेरी कौन सी बात बुरी लगी जबकि उसे अभी भी अफ़सोस है कि उसे सर के पास नहीं जाना चाहिए था उसदिन 🙂

8th में नसीराबाद के मिशन स्कूल में था जो एक-दो मामले में बहुत ही ख़ास है मेरे लिए। जाकर देखा तो स्कूल बंद और खण्डहर में तब्दील होता जा रहा है 😦

जब जयपुर आ गया था तब इसी स्कूल के प्रिंसिपल सर(प्रजापति) का कॉल आया था कि आया था तो मिला क्यों नहीं। इसी स्कूल में था जब 8th में अजमेर जिले में मेरिट लिस्ट में आया था। प्रजापति सर फ्री में अंग्रेजी की पढ़ाई एग्जाम के एक महीने पहले से नहीं कराते तो शायद नहीं होता मेरिट लिस्ट में।

मुझे याद है। मेरिट में आने के बाद तय हुआ कि अब मैं अजमेर के St. Paul’s में पढ़ने के लिए जाऊँ तो ट्रांसफर सर्टिफिकेट देने के लिए प्रजापति सर सिरे से नकार दिए थे, यहाँ तक कि छोटे मामा से ज़ोरदार बहस हो गई थी तब जाके TC मिल पाया था।

मेरिट लिस्ट 💃

मैंने श्रेय में मामा जी(छोटे मामा) कहा था, अखबार वालों ने साथ में मामी जी भी लिख दिये, अब मामा जी के दोस्त उन्हें परेशान करने लगे कि मामी कहां से आई, जबकि मामा जी ख़ुद उस वक़्त पढ़ रहे(11th क्लास) थे।

अजमेर चलो अब.. 18 महीने बस से 25km की दूरी तय करके अजमेर(St. Pauls, 9th,10th) में स्कूल जाना। तो सोच सकते हैं कि उन रास्तों से फ़िर गुज़रना और एक एक चीज़ को देख पहचान के- अरे ये अभी तक है, अरे ये भी 😍

अजमेर ❤❤❤ 🙂

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आज रात राहुल के पसन्द के ढाबे पर गएँ

खाने के बाद कुल्हड़ में दूध

सुबोध, गौरव गॉड, नितिन, मैं, गौरव शर्मा(मिशन स्कूल वाला ज़िगरी) बाद में आया। इस दो गौरव नाम के चक्कर में उस दिन बहुत ही हसीन संयोग हुआ जिसको लेकर कभी आगे किसी कहानी में लिखूँगा।

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19 अक्टूबर 2020 🙂

सुबह जल्दी उठ के पैदल ही मैं निकल गया नसीराबाद की गलियों में

रवि(छोटा भाई) के स्कूल भी घूम आया।

छोटे मामा जी का स्कूल

इस जोधपुर स्वीट्स वाले के दो लड़के हमारे क्लासमेट थे। ये टिफ़िन में भर भर के नमकीन लाते थे, हम लगभग सारा चाट जाते थे। दोस्ती ही नमकीन के लिए हुई थी। (दोनों भाई ये ब्लॉग पोस्ट ना पढे)

और अब फुटबॉल 🙂

मो. तैय्यब भाई, जिस हवा चक्की मोहल्ले में हम रहते थे उसी मोहल्ले के हैं, बाकी ज़्यादातर खेलने वाले भी

🤗🤗🤗🤗🤗🤗

चलो अब जयपुर के लिए निकलते हैं

कचौरा

गौरव गॉड को देर से बताया था कि नसीराबाद आया हूँ। स्टेशन पहुँच गया और मैंने ख़ुद की कसम दिलाई तब जाकर इसने मुझे जयपुर जाने दिया है नहीं तो टाँग के ले जाने आया था स्टेशन। वो तो ये कहो कि इसको राहुल के पास फ़ोन नहीं करने दिया नहीं तो वो कसम की भी परवाह नहीं करता।

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चलो अब जयपुर 🙂

श्री राम जी गुरु जी, गिरीश जी गुरु जी से मिलना रह गया, अगली बार पक्का 🙂

राहुल की एक बात- मान लीजिए नसीराबाद में 100 जने रहते हों तो उनमें से 96 जनों को राहुल ने कह दिया है कि ये देखो भाई है मेरा ये कल को कलेक्टर बन रहा है। जब क्रिकेट खेलते वक़्त बॉलर फ़ास्ट बॉल फेंक रहा था तब राहुल ग्राउंड में ही चिल्ला के बॉलर को कहता है अबे धीरे डाल बॉल, कल को ये अजमेर का dm बन गया ना तो समझ ले…

एक बात और जो मुझे राहुल से कहनी नहीं चाहिए थी पर आदत के अनुसार रोक नहीं पाया और कह दी उससे, 13 ग्राम दिल पर लग गई उसके वो बात 😦

पर कोई ना….

नसीराबाद ❤❤❤ 🙂

चित्तौड़गढ़ ❤

16-17 अक्टूबर 2020 🙂

नीमच से निम्बाहेड़ा होते हुए चित्तौड़गढ़

यानी कि मध्यप्रदेश से वापस राजस्थान आते हुए

यानी कि मालवा का क्षेत्र छोड़ के मेवाड़ की भूमि पर आते हुए

यानी कि मालवा के पठार छोड़ अरावली पहाड़ी की श्रेणियों में आते हुए

यानी कि भारत के दिल से होकर भारत की आन-बान-शान की ओर आते हुए

यानी कि… बस मन्टू बस !

JK सीमेंट चौराहा, निम्बाहेड़ा

शाम को 5 बजे तक चित्तौड़गढ़

ख़ूब भागम दौड़ी करके कैसे भी चाहा था कि किले को जाके डूबते सूरज को वहाँ से क़ैद करूँ पर मुमकिन न हो सका फ़िर भी किले पर स्थित प्रसिद्ध काली का मंदिर के आरती में शामिल हो ही गया 🙂

मैं किले से उतरा और अनुराग भी आ गया, फ़िर स्टेशन के बाहर ही हमने, नहीं नहीं केवल मैंने खाना खाया.. अनुराग तो ये करोना के डर से कुर्सी पर भी टच होकर के नहीं बैठा था।

चावल+दो रोटी+दाल मख्खानी ❤

चावल तीन दिन बाद मिला तो ठूँस के खा लिया 😂

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17 अक्टूबर 2020 🙂

सोने से पहले आंटी जी【सौरभ की मम्मी】से बात हुई तो मैंने कहा कि मैं सुबह जल्दी उठ के किले पर जाऊँगा, अनुराग जो कि रोज़ 11 बजे उठता है कल मेरे लिए 8 बजे उठ के किले पर ही मिलेगा। तब आंटी जी ने बताया कि कल नवरात्र का पहला दिन भी है और यहाँ चित्तौड़ के इच्छुक लोग सुबह पैदल किले पर काली का मंदिर जाते हैं हर साल। आंटी जी कहती हैं “मैं भी चलूँ तेरे साथ?” मैंने कहा “अरे क्यों नहीं! ये चित्तौड़ वाला टूर और यादगार हो जाएगा।” और इस तरह अनुराग जो 11 बजे रोज़ उठता था कल भी 11 बजे ही उठेगा। उसे ये सब बताकर ख़ुश कर दिया 😂

सुबह 4 बजे उठ के हमारा जाना तय हुआ 🙂

अभिषेक, अंशुल, निर्मल,

इसके बाद आंटी जी किले से उतर कर मेरा वाइट करने लगी और मैंने कहाँ कि मैं घूम घाम के नीचे पहुंचता हूँ। और यही तो चाहिए था कि मैं अकेला हो जाऊँ फ़िर जितनी मर्ज़ी घूमो, फ़ोटो क्लिक करो 😂

नीचे उतरा जाए, आंटी जी इंतज़ार करके घर चली गईं 😂

नीचे उतरते ही काढ़ा ❤

ये भाई पोज़ बदल बदल के फ़ोटो क्लिक करवा रहा था 😂

भरत भईया 💕

चाय बनाने की तैयारी में लगे थे। भूख लग गयी थी मैंने इनसे पूछा बिस्कुट है कहते हैं नहीं, वो केवल कंस्ट्रक्शन वर्कर(ज्यादातर बिहार के) के लिए चाय पहुँचाते हैं। इसलिए बिस्कुट नहीं है। मैंने कहा मैं बिस्कुट लेकर आता हूँ तबतक आप चाय बनाइये, भईया कहते हैं अगले चौराहे पर ही पी लेना, पर नहीं यहीं पूछा है तो यहीं चाय पियेंगे।

भैया मेरे बोलने के लहज़े और गले में भगवान जी का लॉकेट देख पूछ बैठे- बिहार से हो या यूपी से ?

गम्भीरी नदी

सौरभ के घर का काम चल रहा है। आंटी जी बोली कि तू upsc की तैयारी कर रहा है तेरी GK बढ़िया होगी। मैंने कहा हाव, तो कहती हैं तुझे टाइल्स, पत्थर, मार्बल के बारे में जानकारी होगी। मैंने कहा हाँ चलो चलते हैं मार्बल खरीदने

हालांकि, वहाँ जाके मैं फ़ोटो ही क्लिक करता रहा, फैक्ट्री में घुस के वीडियो बनाता रहा, आंटी जी समझ गईं होंगीं कि मुझे कितना पता 😐

घर आकर मस्त दाल चावल परांठे ❤

जब उदयपुर था तभी अनुराग से कह दिया था the kite runner मुझे गिफ़्ट कर देना। रेलवे स्टेशन अनुराग ही छोड़ने आया।

अनुराग, हीरा है हीरा, कहता है, मुम्बई आ भाई जल्दी, तेरे बहाने मैं भी मुम्बई एक्सप्लोर कर लूँ। देखते हैं !

हालाँकि, 2012 की होली पर चित्तौड़ ही आया था जयपुर से। तो उस टाइम तो किला बढ़िया से घूमा ही था इस बार करोना की वज़ह से सबकुक बंद भी था।

मैं सौरभ, अनुराग (pc-हर्षित)

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मनीष(कपासन) से मिलना भी रह गया, मैं चित्तौड़ आया तब तक वो अपनी बेटी को डॉ से दिखाने उदयपुर चला गया था।

चलो! अब नसीराबाद ❤❤❤

शुक्रिया चित्तौड़गढ़ 🙂

..फ़िर दिसम्बर में आ ही रहा हूँ!