ऋषिकेश ~ हिमालय का प्रवेश द्वार

3-4 मार्च 2019 🙂

अभिषेक भाई से बात हुई तो उन्होंने शिवरात्रि पर ऋषिकेश जाने का प्लान बताया, मैंने पूछ लिया साथ चलूँ आपके ? कहते हैं बिल्कुल भाई। और जाने के दिन【2 मार्च】 की सुबह कहते हैं, क्लासेज है भाई नहीं चल सकता। मैंने कहा- ठीक है मत जा, मैं अकेले ही जा रहा हूँ। रात का बस में टिकट बुक कराया, शाम को मेरी क्लास ख़त्म हुई और उत्कर्ष भाई के साथ हल्की बारिश में भीगते हुए गाज़ियाबाद पहुँच गया जहाँ से 12 बजे बस जाने वाली थी ऋषिकेश।

उत्कर्ष ने और सुप्रिया मैम ने मना किया कि अभी मत जाओ, पहाड़ों में बारिश हो रही है। मैंने कहा था-मैं तो जाऊँगा 😂

डॉ मुख़र्जी नगर से गाज़ियाबाद जाते हुए, उत्कर्ष भाई की तबियत ठीक नहीं थी, बारिश में गीले होने के डर से तेज़ भगा के 1 घण्टे में गाज़ियाबाद पहुँचना था तो पहुँचा दिया 30 मिनट में।

2 मार्च की दिल्ली में शादियाँ ख़ूब थी, बारिश भी ख़ूब। शादी वाले दिन बारिश, सारा मज़ा किरकिरा।ये घोड़ी वाले भाईसाहब ट्रैफिक में फँस गए थे और पहुँचना इन्हें बहुत ही जल्दी था, समझ रहे हैं ना 😂

गाज़ियाबाद में खंभों पर जो नगर निगम द्वारा चित्रकारी हुई है वो शानदार है। शानदार तो ये ‘खस्ता-कचौरी’ वाला भी है।

बस आ गई, हम बैठ गए, संतरा छिल लिये, रहमान साहब के गाने चला लिये, क़िताब निकाल ली और खिड़की से भीगती सड़क को देख रहे हैं और मन में ये दुविधा भी कि ऋषिकेश में सच में मौसम ज़्यादा ख़राब हुआ तो…तो…तो…..तो

3 बजे सुबह बस रुकी रुड़की के किसी ढ़ाबे पर, दिन जैसा माहौल होता है ऐसे ढ़ाबों पर। 10-12 बसें रुकी रहती हैं और ज़्यादातर को चाय ही चाहिए होती है।

😍

सुबह 7 बजे के क़रीब बस वालों ने ‘नेपाली तिराहे’ पर रोक के ऋषिकेश जाने वालों को नीचे उतार फेंका। बस देहरादून तक जाने वाली है। बस से उतरते ही ये नज़ारा जैसे मेरे इंतज़ार में हो सूरज 😂

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पैदल चलने में मेरी बराबरी अब तक तो कोई नहीं कर पाया है, एक वज़ह यह भी है कि मैं किसी को भी अपने साथ लेकर कहीं जाना नहीं चाहता।

नेपाली तिराहे से ऋषिकेश की दूरी 12 किलोमीटर है और मैं चार ऑटो वालों से पार पाके कि “भाई, मैं पैदल ही जाऊँगा ऋषिकेश, आपको कोई दिक्कत?” चलने लगा पैदल और अंतर देखने लगा- दिल्ली में, मोतिहारी में, ऋषिकेश में, मैदानी और पहाड़ी इलाकों में, लोगों में, लोगों की मुस्कान में 🙂

फ़ोटो लेते हुए, गाने सुनते हुए और ऋषिकेश की पहाड़ियों को देखते हुए 45 मिनट में 4 किलोमीटर तय कर आया। तब लगा कि नहीं अब ऑटो में बैठ जाना चाहिए। और जब रुक के ऑटो का इंतजार करने लगा तब एक ऑटो नहीं सड़क पर। दूध के लिए जा रहे एक भईया मिले बाइक से, उन्हें रोका और कहा आगे कहीं पटक देना मुझे। 😂

नदी पहाड़ सूरज

आटे की गोली मछलियों के वास्ते

पहाड़ को बोल भाई कि smile please

राम झूला 😍

राम झूला से लक्ष्मण झूले के बीच का 1 किलोमीटर का फ़ासला लाज़वाब है। कितना कुछ ख़ामोशी से विद्यमान है उस रास्ते पर। जंगल, पुराने घर【सबका नाम कोई न कोई ‘आश्रम’ है। इन घरों की बालकॉनी या छत से हमेशा गंगा नदी का दर्शन और पहाड़ों की चुप्पी।

इस रास्ते से चलते हुए सोचा कि काश अपना घर हो यहाँ, काश !

जूट की रस्सी का चप्पल

डॉगसी 😍

भरत दास जी, इनकी फ़ोटो इन्हें दिखाई तो कहते हैं उम्र हो चली है, मैंने कहा मेरी भी 😂

रसभरी और चाचा जी का गुस्सा 😍

लक्ष्मण झूला

गूगल मैप के सहारे भटकते-भटकते ही सही होटल तक पहुँचा। डॉरमेट्री लिया जिसमें एक ही रूम में 4 बेड, चार्ज मामूली सा और ठाठ बाठ 5 स्टार तो नहीं 3 स्टार होटल के जैसे 😂

चलती-फिरती चाय दुकान 😍

इस बाइक से पूछा गया होगा कि ऐसा यूज़ करने से पहले,मुझे लगता है नहीं पूछा गया होगा 😂

गंगा किनारे से लक्ष्मण झूला

जब मैं राम झूले के वहाँ था तो एक भईया ने मुझे अलग-अलग एंगल से फ़ोटो क्लिक करते देख, मुझे अपने पास बुलाया और कहा कि

”लक्ष्मण झूले के पास ‘उत्तरा आर्ट गैलरी’ है वहाँ जाना और तो और आज त्रिभुवन जी का आज जन्मदिन भी है तो जाना वहाँ”

मैं पहुँच गया-

एक दिन लेट आया मैं नहीं तो एक्सहिबिशन क् गवाह मैं भी होता पर कोई नी

त्रिभुवन सिंह चौहान जी _/\_

‘स’ मैम, जर्मनी की हैं। ऋषिकेश में 5 सालों से योगा टीचर हैं।

इसकी ज़रूरत थी सख़्त,

त्रिभुवन जी की लड़की रिपिन,चाय वही लेकर आई और कहती है मुझसे ”अंकल चाय लीजिए” 😂

4th में पढ़ती है और हमेशा मुस्कुराती रहती है और माँ से हमेशा डाँट सुनती है कि रोड देख के क्रॉस क्यों नहीं करती,मर जाएगी एक दिन। रिपिन इन ‘डाँट’ के लिए बहरी हो गई है।

सिक्के, सदियों पुराने सिक्के

【लूटने का मन हो गया एक बार तो इस दुकान को🙈】

शाम हुई, अब आरती के लिए प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट चला जाए

शक्ति शक्ति शक्ति शक्तिमान 😂

कोई मेको जलेबी और चाय में ज़हर डाल के देदे तो मेरे कोई असर ही नहीं होगा 😂

रात का राम झूला

रात का लक्ष्मण झूला

जिसको ढूँढे बहर-बहर वो बैठा है भीतर छुपके

तेरे अंदर एक समंदर क्यों ढूँढे तुबके-तुबके

मिलेंगे, मिलेंगे, तोहे पिया मिलेंगे

4 मार्च-सुबह सवेरे की घुम्मकड़ी

ये दोस्ती….

कितना प्यारा है ये 😍

पवन भाई, मध्यप्रदेश के ओरछा जिले से हैं, 9th में पढ़ते हैं और बड़े भईया की मदद करते हैं बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी कला की दुकान में।

अरे रुको भाई, बीच पुल के बीच में खड़ा होके फ़ोटो ले रहा हूँ, रुको! 😂🙈

Adam from Netherlands.

रोहित रावत

शुक्रिया और अलविदा ऋषिकेश 🙂

हरद्वार

खतौली, मुज़फ़्फ़रनगर

अपनी हाथ की चाय 😍

हासिल 🙂

पूरा देख/पढ़ लिया ?

आप धैर्यवान हैं, आपका भविष्य उज्जवल है _/\_

…अब बिहार मिलेंगे 🙂