11-14 मार्च 2019
छोटी बहन की सगाई 🙂
क्लास के बाद फ़िर उत्कर्ष भाई के साथ बाइक पर बैठकर आनंद विहार रेलवे स्टेशन तक का सफर। जब ऋषिकेश जा रहा था तब बारिश हो रही थी पर इस बार बारिश जैसा कुछ नहीं था और आनंद विहार पहुँचते-पहुँचते पॉल्युशन की वज़ह से मेरी आँखों में जलन होने लगी। अब तक पढ़ता आया था उस दिन अनुभव किया कि सच में पॉल्युशन कितना ख़तरनाक हो सकता है।

दिल्ली जेल में लहराता तिरंगा 💓

23:47 ट्रेन खुल गई।
‘बिहार साइड ट्रेन खुल गई’ ही कहते हैं, राजस्थान रहते हुए ये बात दोस्तों से कहता तो वो हँसते थे कि ट्रेन कहाँ से खुल गई ? बीच से, आगे या पीछे से। वो सही करवाते कि ट्रेन खुलती नहीं रवाना होती है।
पर ट्रेन खुलती ही है 😂

सफ़र में क़िताबें, क़िताबों का सफ़र, अंदर का सफ़र, बाहर का सफ़र 🙂

रात को पढ़ते-पढ़ते भूख लगी तो उत्कर्ष भाई ने जो अँगूर दी थी उससे भूख मिटाई।
ये भी समझ आया कि रात को जब सब सो रहे हों तो अपने बैग से भी सामान नहीं निकालना चाहिए।एक आंटी उठ गई थी और उन्हें लगा था कि मैं चोर हूँ, फ़िर जब उन्होंने देखा कि चोर अँगूर थोड़े ही निकालेगा तब फ़िर सो गयीं। हाहाहा

10 मार्च की सुबह 🙂
सीतापुर से पहले

…और दीवानगी एकमात्र रास्ता है।

सिग्नल न मिलने पर ट्रेन सीतापुर के पहले रुक गई थी, यहाँ तक ट्रेन अपने समय से 30 मिनट पहले थी।लोगबाग ‘रेलवे’ की खामियों पर बात न करके एक और ‘एयर स्ट्राइक’ करवाने पर तुले थे।

10 मार्च 2019 यानी रविवार यानी क्रिकेट यानी कि सबकुछ

सीतापुर रेलवे स्टेशन
ये बच्चे जो प्लेटफॉर्म पर दिख रहे हैं, हिसाब लगा रहे हैं कि किसे कितना मिला रोने के बदले में। ट्रेन के एक-एक डब्बे को आपस में बांट लेते हैं और आपके क़रीब पैर पकड़ के ऐसे रोएँगे जैसे सबसे दुखियारे यही है। मैंने अँगूर और संतरा दिया इन्हें और चलती ट्रेन की खिड़की से अँगूर के लिए लड़ते देखा इन्हें।


सआदत हसन मंटो।बाबुषा कोहली की सलामी क़ुबूल करो।

घाघरा नदी




कश्ती


गंडक नदी, ये नदी उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा रेखा भी है। नेपाल से आती है गंगा में मिल जाती है।





10 के 2, 10 के 2, 10 के 2, 10 के 2 😂

शिखर, विमल, पान बाहर, फलाना-ढिमकाना


वाल्मीकिनगर, बिहार



नरकटियागंज की चाय 😍

आ गया मेरा मोतिहारी, आ गया।


11 मार्च की सुबह 🙂
मोतिहारी से गाँव जाते हुए









लड्डू 😍

माँ और चाय





12 मार्च की सुबह 🙂

छोटी बहन【सोनी】 के हाथ का बनाया हुआ।

ये भी

ये कागज़ का हँस भी।

ये फ़ोटो फ्रेम भी जिसमें मैं ही मैं हूँ 🙈

मेरा सबसे पसंदीदा खाना- दही और भुजा 😍

छोटी बहन को देने के लिए इत्ता सारा चॉकलेट 😰

मेरा हीरो 【छोटे मामा जी का बड़ा लड़का】

तैयारियां

इत्तेफ़ाक़ से बड़ी दीदी की 【12 मार्च 2007】शादी की सालगिरह भी उस दिन था और इसी दिन बड़ी दीदी भूटान से बिहार आ रही थी और हमसब सरप्राइज पार्टी के लिए भरे बैठें थे 😂




13 मार्च की सुबह 🙂




सीटी बजाए, नखड़े दिखाए, 😉




राक्षस लोगों के लिए भी इंतज़ाम था, राक्षस लोग 😂

छोटा भाई-रवि
सबसे छोटी बहन-स्नेहा
बड़ा भईया-मन्टू, अच्छा मैं ही हूँ क्या 😂 🙈

छोटी बहन को दिया जाने वाला सामान-बर्तन, कपड़े,सनेस, दुआएँ





18,000 ₹ आशीर्वाद में मिला।
बहुत सही बहुत सही 😐


दोनों समधी होली खेलते हुए।

हम गाना गाके 1400₹ कमा लिये 🙈
चलो भाई वापस दिल्ली-

14 मार्च की सुबह




मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर भी लहराता तिरंगा मिल गया।










गोरखपुर की चाय

15 मार्च की सुबह, हापुड़ की चाय

दिल्ली 😍

ये मिठाई का डब्बा जिस ख़ास दोस्त के लिए लेकर घर से चला था उससे मिल नहीं पाया और डब्बा आ गया दिल्ली, ठीक ही हुआ

दिल्ली की चाय, 15 मार्च
ख़त्म 🙂
ग़ैर ज़रूरी बातें-
~ भागम-दौड़ी में घरवालों से बात करने का मौका तक न मिला। माँ से भी बात करने का मौका नहीं मिला।
~ घरवालों के चेहरे पर ख़ुशी का अंबार देख, सब्बू【जिस छोटी बहन की सगाई थी】के लिए दुआएँ, उसे सारी ख़ुशनसीबी हासिल हो 🙂
~ कोचिंग में ‘इकोनॉमिक्स’ ख़त्म। होली बाद ‘मॉडर्न हिस्ट्री’ शुरू होगा।
…पर वो तो होली बाद ना,
इसबार की होली मथुरा में
Naaaaaaccchhhhhhooooo !