राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली

30 मार्च 2019 🙂

30 मार्च 2019 की सुबह,

गली नंबर-9 वज़ीराबाद

रिया चतुर्वेदी, DDA का एग्जाम देने दिल्ली आई है। तो मिलना तय हुआ। विशाल भईया, रिया और हम पहुँचे राजीव चौक। कहाँ बैठे और पंचायती करें। मैंने विशाल भईया को कहा कि बताओ आप, आपको कोई जगह ध्यान हो तो।मना कर दिए तब हम उन दोनों के हाथ पकड़ के Oxford Book Store ले गएँ 😂

सौंफ वाली चाय 😍

🙂

विशाल भईया, मुझे तो बेचैन आत्मा लगे 😂😂😂

रिया चतुर्वेदी-बहुत कम बोलती है और जो कुछ सामने चल रहा है उसपर ध्यान नहीं, पीछे-आगे पता नहीं कहाँ गुम रहती है।

…और बोले तो एकदम बच्ची है 😂

ट्विटर पर रिया को ये किताब देने का वादा किया था तो दे दिया 🙂

उस वक़्त विशाल भईया को क़िताब मेंशन करना भूल गया था तो इनके लिए ख़ास किताब लेकर गया था। मेरी ख़ुद की किताब 😎😂🙈

क्लोजिंग ईयर होने की वज़ह से विशाल भईया 12 बजे तक ही वक़्त दे सके। फ़िर इन्हें ऑफिस चले जाना था। तो वो चले गए।

मैं और रिया राष्ट्रीय संग्रहालय के लिए निकल गए 🙂

पहले खा लेते हैं कुछ 😋

बड़ा आदमी बन जाएगी तो रिया अपने लिए ऐसा खरीदेगी 😂

ये सुप्रिया मैम की तरफ़ से रिया, प्यारी रिया के लिए 🙂

😍😍😍

इतना कुछ था दुनिया में
लड़ने झगड़ने को
पर ऐसा मन मिला
कि जरा-से प्यार में डूबा रहा
और जीवन बीत गया।

~ कुँअर नारायण

ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर हिंदी साहित्य उत्सव-2019

24 मार्च 2019 🙂

जब होली के लिए वृंदावन गया था तभी छोटे भाई【रवि】का ट्वीट लिंक मैसेज में आ गया था इस उत्सव का। तब मैंने सोचा था देख लूँगा, चला जाऊँगा, इतवार है उस दिन।

‘ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर हिंदी साहित्य उत्सव’ का यह चौथा संस्करण था। मेरे लिए पहला 🙂

24 मार्च को सुबह उठा और 11 बजे तक मन बना लिया कि चलते हैं ना। अरुन्धति रॉय से मिलना हो जाएगा 😍

…तो पहुँच गए हम ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर

वहाँ जाते ही पुष्पेश पंत सर मिल गए। जब से अख़बार पढ़ने की लत लगी तब से ही, शायद ही कोई आर्टिकल इनका मेरे से छूटा होगा।

कहानी पाठ-

गौतम राजऋषि, हिमांशु भाजपेयी सुजाता,विजयश्री तनवीर, सुमन परमार

प्रभात रंजन भईया की मनोहर श्याम जोशी जी पर लिखी आत्मीय वृतांत का विमोचन कार्यक्रम

मनोहर श्याम जोशी जी की सहधर्मिणी भगवती जोशी जी

🙏

कविता पाठ-

अनामिका, मृत्युंजय, सविता सिंह, इल्ला कुमार, प्रकृति करगेती

इल्ला कुमार जी

मृत्युंजय जी

सविता सिंह जी

प्रकृति करगेती जी

इल्ला कुमार मैम

😍

‘तीन रोज़ इश्क़’ की लेखिका ‘पूजा उपाध्याय’ मैम 🙂

ऐसे अचानक मुलाक़ात की सोचा नहीं था।

😍

प्रकृति करगेती मैम

😍😍😍

अरुन्धति रॉय

😍

प्रभात रंजन भईया

😍

अनामिका मैम 🙂

शब्द-कागज़ से स्क्रीन तक

अनवर जमाल, मिहिर पंड्या, गौतम राजऋषि से गिरिराज किराड़ू की बातचीत

ये सेशन बढ़िया था 🙂

चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय चाय ✋

😍

मिहिर पंड्या भईया के साथ

दास्तानगोई- फलों के राजा की

हिमांशु बाजपेयी के यह प्रस्तुति, जितनी तारिफ़ की जाए कम है।

ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर हिंदी साहित्य उत्सव का हासिल 🙂

“चलना मनुष्य का धर्म है, जिसने इसे छोड़ा वह मनुष्य होने का अधिकारी नहीं है।” ~ राहुल सांकृत्यायन

अब कहाँ मिलेंगे ? पता नहीं!

🙂

श्री धाम वृंदावन की होली

20-21 मार्च 2019 🙂

प्रतीक भाई ने जनवरी में ही कहा था, इस बार होली पर मथुरा चलेंगे, मैंने कहा था मेरा जोधपुर जाने का रहेगा तो कम ही उम्मीद है।पर होली आ गयी और हमदोनों चले गए मथुरा। रोहित, शनि, गोविंद, नितिन, उत्कर्ष इन सबसे कहा था चलने को।होली के नज़दीक आते-आते सबके घर वाले उन्हें घर बुलाने लगे नहीं तो पक्का चलते वो। और तो और सबके इसबार घर जाना जाना बहुत ज़रूरी हो गया था 😂

ख़ैर, तो प्रतीक भाई और मैं, चल पड़े

वज़ीराबाद 🙂

20 मार्च को मौसम ठीक नहीं लग रहा था,तेज़ हवा के साथ बादल और सूरज की लुक्का-छीपी दिन भर चलती रही।

हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन खुलने के इंतज़ार में, ये प्यासा साथी मिला 🙂

हवाएँ, ले जाएँ जाने कहाँ हवाएँ

दिल्ली से बाहर निकलते ही गेंहू से अटे पड़े खेत गाँव की याद दिलाते।

मथुरा 🙂

मथुरा की चाय और समोसे

प्रतीक भाई

हम सोच के चले थे कि मथुरा में ही रुकेंगे।अगले दिन वृंदावन चलेंगे फ़िर एक ट्रैफिक पुलिस वाले अंकल जी मिले चौराहे पर चालान काटते हुए। हम उनके फ़्री हो जाने का इंतज़ार कर रहे थे पर वो समझ गए कि हम कुछ पूछने के लिए खड़े हैं। चालान काटना छोड़ हमसे पूछा, क्या ? हमने कहा कि कहाँ रुके मथुरा कि वृंदावन ? कहते हैं वृंदावन निकल जाओ, वहाँ रुकने की भी दिक्कत नहीं होगी, ख़ूब धर्मशाला है।

तब हम वृंदावन के लिए निकल लिए जो कि मथुरा से 14 किलोमीटर है बस।

पूर्णमासी की चाँद 😍

रंग जी मंदिर, वृंदावन

पुराना गोविंद मंदिर

वृंदावन की गलियां

आज तक की सबसे शानदार चाय 😍

अंकल जी से मैंने पूछ लिया कैसे बनाया, क्या-क्या डाला। कहते हैं पानी एक बूंद नहीं।ख़ाली दूध की चाय और दूध भी पैकेट वाला नहीं।

गोविंद घेरा, वृंदावन की होलिका दहन-

बहुत सही, डफली ना सही, प्लेट-छोलनी सही

नया बस स्टैंड की होलिका दहन

पुराना गोविंद मंदिर

होली की सुबह 🙂

रंग जी मंदिर

मेरो तो गिरधर गोपाल दुसरो ना कोई

इस मन्दिर में विधवा महिलाएँ होली खेलती हैं

【इस तस्वीर को ध्यान से देखना】

जमुना जी ओर जाते हुए

परिक्रमा मार्ग पर चलते हुए होली का आनंद

बहुत सही बहुत सही

जूली 😍

सुबह वाली होली ख़त्म

कुल्हड़ में डालो भाई कप में दिल्ली पियेंगे

😂

श्री बाँके बिहारी लाल 🙏

दोपहर वाली होली ख़त्म

प्रिया कांत जू मंदिर-

नई दिल्ली

मथुरा के पेड़े

वृन्दावन की होली देखते-खेलते हुए बचपन की गाँव की होली याद हो आयी और यह मलाल जाता रहा।

‘ढप धरि दे यार, गई पर की’

और

गयौ मस्त महीना फागुन कौ, अब जीवै सो खेलै होरी-फाग’

मतलब अपनी ढफली और साज़ रख दो और अगले साल का इंतज़ार करो।फागुन का मस्त महीना तो अब ख़त्म हो गया, अब जो जीएगा, वही अगली होली खेलेगा।

अब कहाँ मिलेंगे ? पता नहीं !

🙂

बिहार :)

11-14 मार्च 2019

छोटी बहन की सगाई 🙂

क्लास के बाद फ़िर उत्कर्ष भाई के साथ बाइक पर बैठकर आनंद विहार रेलवे स्टेशन तक का सफर। जब ऋषिकेश जा रहा था तब बारिश हो रही थी पर इस बार बारिश जैसा कुछ नहीं था और आनंद विहार पहुँचते-पहुँचते पॉल्युशन की वज़ह से मेरी आँखों में जलन होने लगी। अब तक पढ़ता आया था उस दिन अनुभव किया कि सच में पॉल्युशन कितना ख़तरनाक हो सकता है।

दिल्ली जेल में लहराता तिरंगा 💓

23:47 ट्रेन खुल गई।

‘बिहार साइड ट्रेन खुल गई’ ही कहते हैं, राजस्थान रहते हुए ये बात दोस्तों से कहता तो वो हँसते थे कि ट्रेन कहाँ से खुल गई ? बीच से, आगे या पीछे से। वो सही करवाते कि ट्रेन खुलती नहीं रवाना होती है।

पर ट्रेन खुलती ही है 😂

सफ़र में क़िताबें, क़िताबों का सफ़र, अंदर का सफ़र, बाहर का सफ़र 🙂

रात को पढ़ते-पढ़ते भूख लगी तो उत्कर्ष भाई ने जो अँगूर दी थी उससे भूख मिटाई।

ये भी समझ आया कि रात को जब सब सो रहे हों तो अपने बैग से भी सामान नहीं निकालना चाहिए।एक आंटी उठ गई थी और उन्हें लगा था कि मैं चोर हूँ, फ़िर जब उन्होंने देखा कि चोर अँगूर थोड़े ही निकालेगा तब फ़िर सो गयीं। हाहाहा

10 मार्च की सुबह 🙂

सीतापुर से पहले

…और दीवानगी एकमात्र रास्ता है।

सिग्नल न मिलने पर ट्रेन सीतापुर के पहले रुक गई थी, यहाँ तक ट्रेन अपने समय से 30 मिनट पहले थी।लोगबाग ‘रेलवे’ की खामियों पर बात न करके एक और ‘एयर स्ट्राइक’ करवाने पर तुले थे।

10 मार्च 2019 यानी रविवार यानी क्रिकेट यानी कि सबकुछ

सीतापुर रेलवे स्टेशन

ये बच्चे जो प्लेटफॉर्म पर दिख रहे हैं, हिसाब लगा रहे हैं कि किसे कितना मिला रोने के बदले में। ट्रेन के एक-एक डब्बे को आपस में बांट लेते हैं और आपके क़रीब पैर पकड़ के ऐसे रोएँगे जैसे सबसे दुखियारे यही है। मैंने अँगूर और संतरा दिया इन्हें और चलती ट्रेन की खिड़की से अँगूर के लिए लड़ते देखा इन्हें।

सआदत हसन मंटो।बाबुषा कोहली की सलामी क़ुबूल करो।

घाघरा नदी

कश्ती

गंडक नदी, ये नदी उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा रेखा भी है। नेपाल से आती है गंगा में मिल जाती है।

10 के 2, 10 के 2, 10 के 2, 10 के 2 😂

शिखर, विमल, पान बाहर, फलाना-ढिमकाना

वाल्मीकिनगर, बिहार

नरकटियागंज की चाय 😍

आ गया मेरा मोतिहारी, आ गया।

11 मार्च की सुबह 🙂

मोतिहारी से गाँव जाते हुए

लड्डू 😍

माँ और चाय

12 मार्च की सुबह 🙂

छोटी बहन【सोनी】 के हाथ का बनाया हुआ।

ये भी

ये कागज़ का हँस भी।

ये फ़ोटो फ्रेम भी जिसमें मैं ही मैं हूँ 🙈

मेरा सबसे पसंदीदा खाना- दही और भुजा 😍

छोटी बहन को देने के लिए इत्ता सारा चॉकलेट 😰

मेरा हीरो 【छोटे मामा जी का बड़ा लड़का】

तैयारियां

इत्तेफ़ाक़ से बड़ी दीदी की 【12 मार्च 2007】शादी की सालगिरह भी उस दिन था और इसी दिन बड़ी दीदी भूटान से बिहार आ रही थी और हमसब सरप्राइज पार्टी के लिए भरे बैठें थे 😂

13 मार्च की सुबह 🙂

सीटी बजाए, नखड़े दिखाए, 😉

राक्षस लोगों के लिए भी इंतज़ाम था, राक्षस लोग 😂

छोटा भाई-रवि

सबसे छोटी बहन-स्नेहा

बड़ा भईया-मन्टू, अच्छा मैं ही हूँ क्या 😂 🙈

छोटी बहन को दिया जाने वाला सामान-बर्तन, कपड़े,सनेस, दुआएँ

18,000 ₹ आशीर्वाद में मिला।

बहुत सही बहुत सही 😐

दोनों समधी होली खेलते हुए।

हम गाना गाके 1400₹ कमा लिये 🙈

चलो भाई वापस दिल्ली-

14 मार्च की सुबह

मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर भी लहराता तिरंगा मिल गया।

गोरखपुर की चाय

15 मार्च की सुबह, हापुड़ की चाय

दिल्ली 😍

ये मिठाई का डब्बा जिस ख़ास दोस्त के लिए लेकर घर से चला था उससे मिल नहीं पाया और डब्बा आ गया दिल्ली, ठीक ही हुआ

दिल्ली की चाय, 15 मार्च

ख़त्म 🙂

ग़ैर ज़रूरी बातें-

~ भागम-दौड़ी में घरवालों से बात करने का मौका तक न मिला। माँ से भी बात करने का मौका नहीं मिला।

~ घरवालों के चेहरे पर ख़ुशी का अंबार देख, सब्बू【जिस छोटी बहन की सगाई थी】के लिए दुआएँ, उसे सारी ख़ुशनसीबी हासिल हो 🙂

~ कोचिंग में ‘इकोनॉमिक्स’ ख़त्म। होली बाद ‘मॉडर्न हिस्ट्री’ शुरू होगा।

…पर वो तो होली बाद ना,

इसबार की होली मथुरा में

Naaaaaaccchhhhhhooooo !