5th Jashn`e`Rekhta
Celebrating Urdu-2018
14-15-16 दिसंबर, 2018
मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, नई दिल्ली
जैसा कि मैंने वादा किया था साहित्य आजतक-2018 में कि हम जश्न रेख़्ता में मिलेंगे।
मैं रविवार को फ़्री रहता हूँ तो सोचा था 16 दिसंबर को जश्न रेख़्ता में जाऊँगा। 16 दिसंबर को ही बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन का प्री का एग्जाम होना था जिसकी वज़ह से कोचिंग वालों ने 15 दिसंबर को ऑफ कर दिया और मुझे दो दिन जाने का मौका मिला जश्न रेख़्ता में 🙂
प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन से बाहर निकला तो एक मैडम मिली, उन्होंने ने बाएँ बाँह पर ख़ूबसूरत तिरंगा लगाया और बोलती हैं “हम दिव्यांगों के मदद के लिए फॉउंडेशन चलाते हैं आप कुछ डोनेट कीजिए” मैंने पर्स से 20₹ निकाला तो कहती हैं कि मिनिमम 100₹ डोनेशन अमाउंट है। मैंने कहा “मैं अभी पढ़ता हूँ, कमाता नहीं हूँ” तब उन्होंने अपना मिनिमम डोनेशन अमाउंट को 20₹ कर दिया 🙂




पहला सेशन जावेद अख़्तर-शबाना आज़मी जी का।
जावेद साहब कहते हैं कि मुश्किल ज़बान में लिखना सबसे आसान है और आसान ज़बान में लिखना सबसे मुश्किल।
कम्युनिस्ट झुकाव वाले लेखक, कवि बॉलीवुड में क्यूँ गए इसका जवाब इस सेशन में मिला।

कुछ याद आया..

ये मैं सीख के आया हूँ, बनाऊंगा 🙂

…बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ


चच्चा, हर ख़्वाहिश पर दम निकल रहा है

कदम बढ़ा ले, हदों को मिटा ले…

आमिर भाई से मिलिए, आप कुछ भी हिंदी-अंग्रेज़ी में लिख के दीजिए ये उसे शानदार उर्दू में लिख देते हैं हाथों हाथ। मैंने कुछ लिखवाया नहीं, हाँ तारिफ़ की इनकी हुनर की और बीच में टोकते हुए इन्हें कहा कि कैमरे की ओर देखिए भाई।

मैं ज़रा छुप के इनकी तस्वीर ले रहा था, इन्होंने पकड़ लिया मुझे और फ़िर अमृता साहिर का पोस्टर जो मेरे पास था, उसपर लिखी शायरी दूर से पढ़ने लगीं, मैं भी ख़ुद को पोस्टर के साथ इनके क़रीब पाया।

#MirchiSayema 🙂


चाय को ज़ेहन में दास्तानगोई के साथ उतारते हुए

गायत्री अशोकन(मलयालम प्लेबैक सिंगर)
दिल-ए-नादां ग़ज़ल को बहुतों ने गाया है पर सुरैया जैसा किसी ने नहीं। पर यही ग़ज़ल अब गायत्री जी की आवाज़ में भी सुनेंगे।
गायत्री जी कहती हैं कि केरल में लोग उर्दू नहीं जानते पर वो ग़ज़ल सुनते हैं।
गौर करने वाली बात ये है कि गायत्री जी को हिंदी नहीं आती पर ग़ज़ल गाते हुए ऐसा कभी न लगा कि हिंदी के किसी शब्द का ग़लत उच्चारण किया हो।

वारसी ब्रदर्स, इनके गले में ख़ुदा बैठे हुए हैं !

मुशायरा, साहित्य आजतक से ये अच्छा रहा जबकि इसमें इन्दौरी साहब नहीं थे। मलका नसीम जी तो राजस्थान की हैं, ये उसी दिन पता चला।

दानिश भाई, 3rd अटेम्प्ट में जियोग्राफी लेकर सिविल सर्विसेज का इंटरव्यू दिया है और इसबार सेलेक्शन तय है। मुझसे कहते हैं कोचिंग के भरोसे मत बैठना।
इनकी मिसेज उर्दू में जामिया मिलिया से PhD कर रही हैं।इत्तेफ़ाक़ से मुशायरे में मेरे पास बैठी थी। जिन लफ़्ज़ों के मानी मुझे नहीं आता उनसे पूछता और वो बताती,शायरी एक्सप्लेन करतीं।
वो मुझे उर्दू पढ़ना-लिखना सिखाएँगी 🙂

16 दिसंबर के लिए तैयार,सूरज सा चमके हम 🙂

इस दिन भी पहले सेशन में जावेद अख़्तर साहब मिल गए, शायरी पढ़ते हुए।


का बुझे ?



इसे गौर से निहारिए


🙂

ग़ालिब के चक्कर में मोमिन को न भूल जाना

परछाई है किसी रब के बंदे की
चलो माना मेरी ही है


कुमार विश्वास साहब को बोलना था बदनाम शायर पर, इन्होंने मौजूदा छोटे-बड़े निज़ाम को बढ़िया से लपेटा।
ये सेशन अटेंड नहीं करना था पर……

मेजर ध्यानचंद स्टेडियम,
कार्य प्रगति पर है भाई,असुविधा के लिए इन्हें खेद भी है।

ये जो कहते हैं कि सहारे है मेरे
मेरे भटक जाने का सबब पूछो इनसे

विशाल भारद्वाज साहब


फ़ैज़ के दीवाने,अमृतेश भाई



जश्न रेख़्ता-2018 का हासिल


रूमी साब, किचन तक आ गये


अगली मंज़िल 🙂

आशीष भईया और रूबी दी 🙂
उर्दू के दीवाने


👍
तो ऐसा रहा जश्न रेख़्ता-2018।
और भी बहुत कुछ है,हुआ-जो मेरे आँखों में है 🙂
डॉ संजीव सराफ़ को जानते हैं आप ?
आख़िरी बात जनवरी में विश्व पुस्तक मेला【प्रगति मैदान, 5-13 जनवरी, 2019】 लगने वाला है हर साल की तरह, हम वहाँ मिलेंगे, अगली कहानी के लिए।
उससे भी पहले इस गुजरते साल और आने वाले साल पर गुजरात में मिलेंगे।
🙂